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महिलाओं में साइलेंट रोग है पेल्विक टीबी
By Weekand Times On 6 Jun, 2011 At 06:42 AM | Categorized As स्वास्थ्य | With 0 Comments

अगर आप यह सोचते हैं कि टीबी यानी तपेदिक के लक्षण सिर्फ  सांस की परेशानी और खांसी है और यह सिर्फ  आपके फेफड़े को ही प्रभावित करता है तो एक बार फिर सोचना शुरू कर दीजिए। काम का तनाव, सिगरेट का धुआं और आपका गलत खानपान, यह सब न सिर्फ आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करते हैं बल्कि और भी कई बीमारियां दे सकता है जैसे पेल्विक टीबी यानी श्रोणीय टीबी। टीबी बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है और यह शरीर के दूसरे अंगों को उतना ही प्रभावित करता है जितना फेफड़े को। पलमोनरी टीबी या फेफड़ों का तपेदिक 85 से 90 प्रतिशत तक जितना फेफड़े को प्रभावित करता है बाकी 10-15 फीसद संक्रमण शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे हड्डी, पेट (आमाशय) और तिल्ली (स्पलीन) में होता है। महिलाओं में प्रजनन की उम्र में पेल्विक या जेनाइटल टीबी होने का खतरा ज्यादा होता है जिसके कारण महिलाओं में बांझपन की आशंका बढ़ जाती है। एक सर्वे के मुताबिक इस वजह से दस फीसदी महिलाओं में बांझपन की समस्या पायी गई है।
क्या है लक्षण- पेल्विक टीबी ‘साइलेंट बीमारी‘ की तरह है। महिलाओं में होने वाली यह बीमारी उनके शरीर में चुपचाप प्रवेश कर जाती है। दस से 20 साल तक उन्हें इसका कुछ पता भी नहीं चलता। बांझपन के कारण जब महिलाओं की जांच की जाती है, तब इस बीमारी की आशंका होती है। कुछ लक्षण जो इस बीमारी के कारण हो सकते हैं वह हैं पेट दर्द, असहनीय पीठ दर्द और अनियमित महावारी, कभी-कभी पेल्विक में दर्द दूसरे तरह के तपेदिक का संकेत होता है, जैसे आंत या पेट का।
कैसे होती हैं आप संक्रमित- संक्रमण के कई कारण हैं खासकर जब आप पहले से किसी बीमारी से ग्रस्त रहे हों। जननांगों के रास्ते वायरस आपके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जब हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, तो ये हमारे शरीर पर हावी हो जाते हैं। इससे दूसरे संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है खासकर एचआईवी। तपेदिक होने के और भी कारण हैं जैसे स्मोकिंग। स्मोकिंग से कारसिनोजेन और दूसरे हानिकारक रसायन निकलते हैं, जिससे शरीर में संक्रमण का खतरा बढ़ता है और रोग से लडऩे की क्षमता धीरे-धीरे घटती जाती है। कई महिलाएं लम्बे समय तक डाइटिंग भी करती रहती हैं। हम जानते हैं कि शरीर की सही क्षमता बनाए रखने के लिए और व्हाइट ब्लड कोशिका के कार्य के लिए विटामिन जरूरी है। इसलिए ज्यादा दिन तक डाइटिंग भी तपेदिक का मुख्य कारण है। इसके अलावा ज्यादा तनाव से हमारे शरीर में कारटिकोस्टेरॉयड बनता है, जिससे शरीर की क्षमता कम होती जाती है। भारत जैसे देश में एनीमिक महिलाएं इस बीमारी की ज्यादा शिकार होती हैं।
क्या है इलाज- जब यह पता चल जाए कि आप तपेदिक से ग्रस्त हैं तो घबराने की जरूरत नहीं। इस बीमारी का इलाज अब असाानी से किया जा सकता है। इलाज में करीब सात से नौ महीने का समय लग जाता है वह भी डॉक्टर की देखरेख में। कई बार ऐसा भी होता है कि टीबी के मरीज को कौन सी दवाई उसे ठीक कर रही हैं, यह पता करना मुश्किल हो जाता है। कई बार तपेदिक के मरीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और शरीर पर कई दवाइयां असर नहीं करतीं। तपेदिक की दवाइयों से शरीर में विषैलापन बढ़ जाता है इसलिए मरीजों को पानी ज्यादा पीने की सलाह दी जाती है। उन्हें ज्यादा प्रोटीन वाला खाना भी देना जरूरी है, क्योंकि बैक्टीरिया शरीर में प्रोटीन टिश्यू को नष्ट करते रहते हैं। अपने लिवर का टेस्ट जरूर कराएं ताकि यह पता लग सके कि कहीं ये दवाइयां आपके लीवर को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहीं। सबसे जरूरी बात यह हैं कि तपेदिक की दवाइयों को पूरा कोर्स लेना बेहद जरूरी होता है हालांकि यह काफी मुश्किल है पर बिना डॉक्टर की सलाह लिए दवाइयां न छोड़ें। महिलाएं दवाइयों का पूरा कोर्स करने के बाद इन विट्रो-फर्टिलाइजेशन द्वारा अपने बच्चे का सपना पूरा कर सकती हैं।

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