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इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजर सुरक्षा है मूल मंत्र

Captureप्रवेश का तरीका
जो लोग औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन से जुडऩा चाहते हैं, उन्हें संबंधित कोर्स करना होगा, जिसके लिए स्नातक या स्नातकोत्तर होना जरूरी है। औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन पाठयक्रम में इंजीनियरिंग कंट्रोल और एप्लिकेशन, परमाणु ऊर्जा संयंत्र, पेट्रोलियम इंडस्ट्री जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आपात स्थिति पर नियंत्रण करना, औद्योगिक उपकरणों की निगरानी करना, मेडिकल विजिलेंस, चोट-नुकसान और जानलेवा स्थितियों को रोकना, खराब उपकरणों की सूची बनाना इत्यादि को जानना-समझना पड़ता है। औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा और डिग्री जैसे कोर्स उपलब्ध हैं। वैसे तो इंजीनियरिंग के छात्रों को प्राथमिकता मिलती है, लेकिन कुछ संस्थानों में 12वीं पास विद्यार्थी भी सर्टिफिकेट और डिप्लोमा जैसे कोर्स कर सकते हैं। ये पाठयक़्रम करने के बाद फायर प्रोटेक्शन इंजीनियर, सिस्टम सेफ्टी इंजीनियर, कंस्ट्रक्शन सेफ्टी इंजीनियर, रिस्क मैनेजमेंट, कंसल्टेंट, ट्रांसपोर्टेशन, सेफ्टी सुपरवाइजर, इंडस्ट्रियल हाइजीन मैनेजर, एनवायर्नमेंट सेफ्टी मैनेजर जैसे पदों पर नियुक्ति मिल सकती है।

काम के घंटे : चूंकि सुरक्षा व्यवस्था का कार्य 24 घंटे का होता है, लिहाजा इसमें शिफ्टों में काम होता है। आमतौर पर इसमें तीन शिफ्टें होती हैं।
वेतनमान : औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन के पदानुक्रम में आप किस क्रम पर हैं, इस बात से तय होगा कि वेतनमान क्या होगा। 10 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपए तक की तनख्वाह मिल सकती है। जैसे-जैसे पद बड़ा होता जाता है, कंपनी के प्रोफाइल के हिसाब से वेतन में भी बढ़ोत्तरी होती रहती है।

जैसे-जैसे उद्योग धंधों का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। आज औद्योगिक सुरक्षा को लेकर कानून सख्त हुए हैं, लेकिन उससे भी जरूरी है वास्तविक सुरक्षा। औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन का मकसद है जोखिम, दुर्घटना और उससे लगने वाली चोटों व नुकसान को कम करना और इसके लिए सुरक्षा प्रबंधन के तमाम सिद्धांतों व तकनीकों पर अमल किया जाना। कर्मचारी की सेहत से लेकर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी व मजबूती तक के मकसद को हासिल करने में मदद करते हैं इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजर।
जोखिम और संपत्ति के बीच की दूरी को बनाए रखना उतना आसान तो नहीं है, लेकिन उतना कठिन भी नहीं है। यदि औद्योगिक सुरक्षा के नियमों, सिद्धांतों और मानकों का सही-सही पालन किया जाए तो कोई वजह नहीं कि हादसा हो जाए। आज न तो उद्योगों की कमी है और न ही जोखिमों की, लिहाजा औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन ने एक अनिवार्य विधा के रूप में अपनी जगह बना ली है।
इससे जुड़े तमाम किस्म के कोर्स भी उपलब्ध हैं, जिन्हें करके न सिर्फ कॅरियर को समृद्ध किया जा सकता है, बल्कि देश की आर्थिक समृद्धि को भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

स्किल्स
ह्नसुरक्षा के बुनियादी सिद्धांतों की जानकारी। ह्नऔद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में नवीनतम विकास की जानकारी रखना। ह्नजरूरत के मुताबिक तुरंत और सही निर्णय लेने की क्षमता। ह्नपैनी निगाह और सुरक्षा व्यवस्था में होने वाली चूक को भांपने और रोकने की क्षमता। ह्नमानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होना।

प्रमुख संस्थान
इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी, मैदान गढ़ी, नई दिल्ली
दिल्ली कॉलेज ऑफ फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग, द्वारका, नई दिल्ली
इंटरनेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ सिक्योरिटी एंड सेफ्टी मैनेजमेंट, पुणे, महाराष्ट्र
इंस्टीटय़ूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट एंड फायर सेफ्टी, मोहाली, पंजाब
नेशनल सेफ्टी काउंसिल ऑफ इंडिया, नवी मुंबई
पेरियार मनियामाई यूनिवर्सिटी, तंजावुर, तमिलनाडु

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