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क्या हादसों के बाद ही चेतेगा शासन-प्रशासन

Captureअंकुश जायसवाल
लखनऊ। अपने जान-माल की परवाह न तो खुद उन लोगों को है जो जर्जर भवनों में रह रहे हैं और न ही शासन-प्रशासन को। शासन-प्रशासन भी आने वाले खतरे से अनजान बना हुआ है। जी हां, बारिश की शुरुआत हो चुकी है और पुराने लखनऊ में दर्जनों ऐसी इमारतें मिल जाएंगी, जो जर्जर और खस्ताहाल हालत में हैं। सालों से इन इमारतों की रिपेयरिंग तो दूर की बात पेंट तक नहीं करवाया गया है। इसके अलावा पॉश इलाकों में कुछ ऐसे जर्जर भवन बने हुए हैं, जिनमें धड़ल्ले से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। इसमें ज्यादातर चौक का गोल दरवाजा मार्केट, अमीनाबाद मार्केट, नक्खास मार्केट व मौलवीगंज जैसे इलाके शामिल हैंं। संबंधित विभाग भी शायद कोई बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है तभी इस दिशा में कार्रवाई नहीं कर रहा।
पुराने लखनऊ की गलियों में सैकड़ों ऐसी जर्जर इमारतें हैं, जो १०० साल से भी अधिक पुरानी हैं और जिनकी एक बार भी मरम्मत भी नहीं करायी गयी। लोग इन इमारतों में बिना किसी डर, दबाव के अपने परिवार के साथ रह रहे हैंं। इनकों नहीं पता है कि वह कभी भी किसी बड़े हादसे का शिकार हो सकते हैं। पूराने लखनऊ का चौक इलाका हो या फिर अमीनाबाद। मौलवीगंज हो या नक्खास। इन इलाकों में जर्जर इमारतों में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। हर आदमी आने वाले खतरे से अंजान होकर दौलत कमाने के चलते अपना उल्लू सीधा करने में लगा हुआ है। यहां की इमारतें सालों पुरानी हैं और खस्ताहाल हो चुकी हैं।
शहर में जितनी भी १०० साल पुरानी या ५० से ६० साल पुरानी इमारत हैं, सभी में गारा, चूना व मिट्टïी का इस्तेमाल कर बनाया गया है। इसलिए इन इमारातों पर धराशायी होने का ज्यादा खतरा बना रहता है लेकिन संबंधित विभागों को शायद इसकी कोई परवाह नहीं है।जर्जर इमारतों के लिए बरसात खतरे की घंटी की तरह है और फिर खस्ताहाल इमारतों के धराशयी होने के पीछे कई बार बरसात का मौसम ही जिम्मेदार रहा है। बरसात के मौसम में इन जर्जर इमारतों में पानी जमा हो जाता है और ऐसे में घर की छत हो या फिर दीवार जर्जर होकर पलस्तर छोडऩे लगती है, जिससे वह इमारत कमजोर होकर खोखली होने लगती है। कहीं-कहीं लोग इन इमारतों में रिपेयरिंग कराकर अपना काम चला लेते हैं पर कहीं तो लोगों का इस ओर ध्यान ही नहीं जाता है।जिम्मेदार विभाग शायद आपातकालीन स्थिति के इंतजार में रहते हैं। पिछले वर्ष पुराने लखनऊ की दर्जनों जर्जर इमारतों की लिस्ट बनाकर इन्हें खाली कराकर ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था, लेकिन इसके बाद ये मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया था। इस पर अब तक आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई।
क्या कहते हैं जिम्मेदार

इस संबंध में आपदा सीडीओ प्रशांत शर्मा ने कहा कि अभी तक नगर निगम ने हमारे यहां जर्जर भवन की लिस्ट नहीं भेजी है। लिस्ट आने के बाद नोटिस भेजा जाता है ताकि वह जल्द से जल्द उसे रिपेयरिंग करा ले या मानक के अनुरूप पुन: निर्माण करा लें। इसके बाद भी यदि इमारत में कार्य नहीं कराया जाता है तो कार्रवाई करते हुए मकान ध्वस्त कराया जाता है। लिस्ट मिलने के बाद ही हम कुछ कर सकते हैं।

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