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संवेदन हीनता

उत्तर प्रदेश की राजधानी में गरीबों के इलाज के लिए किये जा रहे सरकार के सभी दावे बेकार साबित हो रहे हैं। आज भी गरीबों तथा मानसिक रोगियों के साथ अस्पतालों में अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। लोकबन्धु अस्पताल से लेकर डॉ. राममनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय तक मरीजों के साथ संवेदनहीनता का दौर बदस्तूर जारी है। राजधानी के लोकबंधु अस्पताल तथा लोहिया अस्पताल में मरीजों के साथ आये दिन अमानवीय व्यवहार की घटनाएं अब आम हो चुकी हैं। इसलिए लोग सरकारी अस्पतालों में जाने से कतराने लगे हैं। सरकार के सपनों को चिकित्सा विभाग मुंह चिढ़ा रहा है। हालत यह है कि राजधानी के अस्पतालों में इलाज के लिए गरीब मरीज दर-दर की ठोकरें खा रहा है। वहीं चिकित्सा संस्थानों में तैनात डॉक्टर अपनी अफसरशाही का रौब झाडऩे और मरीजों का इलाज करने की बजाय आराम फरमाने में व्यस्त रहते हैं। ताजा मामला लोकबंधु अस्पताल का सामने आया है, जहां शनिवार की रात एक वार्ड में भर्ती गम्भीर मरीज को रात में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने यह कह कर भगा दिया कि तुम्हारे साथ कोई तीमारदार नहीं है। इसलिए अस्पताल में इलाज नहीं मिल सकता है। जबकि उस गरीब को प्रॉपर इलाज की जरूरत थी। आखिरकार तीन दिन तक वह गरीब अस्पताल के बाहर पड़ा रहा, इसके बाद उस गरीब मजदूर को सामाजिक कार्यकर्ता अमित मिश्रा बलरामपुर अस्पताल ले गये और वहां उसका तीमारदार बनकर अस्पताल में भर्ती कराया। बताते चलें कि बनवारी रावत (40) जनपद हरदोई के उमरा भीटा गांव का रहने वाला है। गांव के दबंगों ने उधार लिये गये 6000 रुपये के बदले पहले तो मजूदरी करायी , फिर उसकी दो बीघा जमीन लिखवा ली। दबंगों ने मारपीट कर भगा दिया, तो मजबूरन लखनऊ आकर लेबरमंडी में मजदूरी करने लगा। इससे उसका और उसके बच्चों का गुजारा हो रहा था। लेकिन दिन-रात परिश्रम करने और भर पेट भोजन न मिलने की वजह शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो गई। वह बीमार रहने लगा। गरीब होने के बावजूद उसके पास बीपीएल कार्ड तक नहीं है। गरीबी और कुपोषण ने बनवारी रावत को अनेकों गंभीर बीमारियों की सौगात दी है, उसे सेप्टीसीमिया और अन्य कई प्रकार के रोगों ने घेर लिया है।

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