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सोशल मीडिया भी आचार संहिता के दायरे में

42 हजार फर्जी मतदाता सूची से बाहर, 1 लाख 56 हजार नये वोटर बिना शोर के होगा इस बार का  विधानसभा का चुनाव

देहरादून। उत्तराखंड में 15 फरवरी को विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हंै। हर बार विपक्षी दलों का आरोप रहता है कि सरकार सत्ता में वापसी के लिए फर्जी मतदान कराती है। इस बार भी इसी प्रकार के आरोप फिर से लग सकते हैं। शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने की क्या है निवार्चन विभाग की तैयारियां। जानते है राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी से:
क्तफर्जी मतदान रोकने के लिए निर्वाचन विभाग की क्या तैयारियां हंै।
निर्वाचन विभाग ने 42 हजार फर्जी मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया है। ऐसे वोटरों की जांंच की गई और वह पूरी तरह से फर्जी पाए गए थे। यदि किसी के पास वोटर कार्ड भी है तो और उसका नाम मतदाता सूची में नहीं है तो वह अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाएगा। यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में है तो वह अपने पुराने वोटर कार्ड से अपना वोट डाल सकता है। मतदाता सूची में वोटर का नाम होना जरूरी है। तभी कोई अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएगा।
क्त यदि किसी व्यक्ति का मतदाता सूची में नाम नहीं है और वह अपना वोट डालना चाहता है,उसके लिए निर्वाचन विभाग ने क्या व्यवस्था कर रखी है। क्या वो मतदान से वंचित रह जाएगा।
निर्वाचन विभाग ने सभी विधानसभा की मतदाता सूची ऑन लाइन कर रखी है। कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन जाकर अपना नाम मतदाता सूची मेें देख सकता है। यदि उसका नाम मतदाता सूची में नहीं है तो वह 17 जनवरी से पहले अपना नाम फार्म-6 भरने के बाद तहसील में ईआरओ के पास जमा करा सकता है। 17 जनवरी के बाद किसी भी व्यक्ति का नाम फिलहाल चुनाव तक मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा। नए मतदाताओं की पूरक सूची आएगी उसके आधार पर नये वोटर मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे।
क्तऐसी शिकायते भी मिलती है कि एक व्यक्ति दो स्थानों से पहचान पत्र बनाकर वोट डाल देता है। ऐसा उत्तर प्रदेश के एक नेता ने भी किया था। इस बार ऐसे व्यक्ति के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?
राज्य में फर्जी मतदान को रोकने के लिए कड़़े कदम उठाये जा रहे है। दो स्थानों पर मतदान करने वाले व्यक्ति को एक साल की जेल के साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी देना होगा। उत्तर प्रदेश के नेता ने पिछले चुनाव में यूपी व उत्तराखंड के सितारगंज से दो पहचान पत्र बनाकर दोनों स्थानों पर वोट डाले थे। उसकी शिकायत मिलने पर जांच की गई को शिकायत सही पाई गई और यूपी के नेता की शिकायत केंद्रीय निर्वाचन आयोग से की गई थी,अभी यह मामला आयोग के पास लंबित पड़ा है।
क्तसोशल मीडिया एक सरल प्रचार का माध्यम बन गया है। यहां बिना किसी खर्च के कोई भी प्रत्याशी अपना प्रचार करने में देरी नही लगाता है। क्या कोई सोशल मीडिया पर अपना प्रचार कर सकता है? इसके लिए क्या आदर्श आचार संहिता का उल्लघंन होगा की नहीं। उसकी के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।
चुनाव लडऩे वाले नेताओं पर निर्वाचन आयोग की पैनी नजर है। सोशल मीडिया से लेकर पोस्टर तक ब्योरा मांगा जा रहा है। यदि कोई भी प्रत्याशी या उनका समर्थक बिना अनुमति के सोशल मीडिया पर प्रचार करता है,तो वह भी आचार संहिता के उल्लघंन के दायरे में आता है। उसको पहले विभाग की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा और उससे जवाब मांगा जाएगा। उसके बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्तयदि कोई नेता अपना सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर लगाकर प्रचार करता है,तो उसकी शिकायत कैसेे और कहा की जा सकती है। प्रत्याशी इस बार अपना प्रचार कैसे करेंगे।
पहली बार निर्वाचन आयोग ने नये नियमों को सख्ती से लागू करने के साथ ही नेताओं पर नकेल कसनी शुरु कर दी है। निर्वाचन विभाग की पूरी टीम सभी नेताओं की गतिविधिओं पर नजरे रखे हुए है। राज्य के सभी 13 जिलों में कंट्रोल रुम बनाए गए है। यहां आने वाले प्रत्येक सूचना पर पुलिस और निर्वाचन आयोग की टीम कार्रवाई कर रही है। अभी तक कोई आचार संहिता का कोई भी बड़ा मामला सामने नहीं आया है। नेताओं को पोस्टर व बैनरबाजी को छोडक़र घर-घर जाकर वोट मांगने होगें। लाल बत्ती के लगाने पर भी पूरी तरह से रोक लगाई गई है। राज्य या उससे बाहर का कोई भी व्यक्ति अपने वाहन में लालबत्ती लगाकर नहीं आ सकता है।
क्तइस बार कितने नये मतदाता सूची में शामिल हुए है। सर्विस वोटरों की संख्या कितनी है। मतदाता जागरुक अभियान का किसना असर वोटरों पर पड़ा है।
प्रदेश में कुल 58 लाख 87 हजार 765 वोटर हंै। एक लाख 56 हजार नये मतदाता जुड़े हैं। निर्वाचन आयोग के सख्त निर्देश है कि कोई भी मतदाता वोट डालने से वंचित न रहे। लिए इस बार महिलाओ,युवाओं ने इस कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर भाग लिए और अपने वोटर कार्ड बनाए है। नये वोटरो में 18 साल के 25 हजार मतदाता बने है। अब उनकी संख्या 2 लाख 44 हजार हो गई है। सर्विस क्लास वोटर की संख्या एक लाख चार हजार है।
क्तहाल में प्रदेश सरकार द्वारा सोशल मीडिया से प्रचार कर आचार संहिता उल्लंघन किया पर निर्वाचन विभाग ने अभी तक क्या कार्रवाई की है।
राज्य सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर मतदाताओं को रिझाने की शिकायत मिलने के बाद राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दिया गया है। सरकार से इस बारे में स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। आचार संहिता के मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह किसी भी दल का क्यों न हो।
क्तचुनाव के दौरान मीडिया पेड न्यूज से प्रत्याशियों का प्रचार करते है। क्या मीडिया भी आचार संहिता के उल्लघंन के दायरे में आते है।
मीडिया द्वारा प्रकाशित करने वाले पेड न्यूज पर भी आयोग की निगाहें हैं। ऐसा करने वाले मीडिया को भी आचार संहिता के उल्लंधन का दोषी माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए निर्वाचन विभाग ने पूरी तैयारियां कर ली है। पुलिस और निर्वाचन विभाग की पूरी टीमे लगातार पार्टियों की हर गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। ऐसे में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी करना फिलहाल संभव नजर नहीं आता है।

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