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टीवी की जगह लेता इंटरनेट

देश में ऑनलाइन उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या के साथ ही अब ऑनलाइन मनोरंजन प्लेटफॉर्म भी लोकप्रिय होने लगे हैं। धीरे-धीरे फिल्म, टीवी शो और कहानियों के निर्माण और उन्हें देखने के तरीके में बड़े बदलाव आ रहे हैं। मनोरंजन के बाजार को किस तरह प्रभावित कर रहा है ऑनलाइन, बता रहे हैं अरुण जनार्दन

देश-दुनिया से एकत्रित किए आंकड़े बताते हैं कि वल्र्ड वाइड वेब (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू) की भारत में पहुंच लगातार बढ़ रही है। इसने दुनिया को और अधिक करीब लाने का काम किया है। इसने न केवल स्थान के बंधन तोड़े हैं, बल्कि लोगों का नजरिया भी बदला है और उन्हें जानकारियों के असीमित भंडार में ला खड़ा किया है। इसके साथ-साथ ऑनलाइन मनोरंजन का नया दौर भी शुरू हो चुका है। तमाम बड़े चैनल्स ने एप के जरिए हर समय अपने सीरियल और फिल्में, गाने, ट्रेलर, खेल आपकी जेब में पहुंचा दिए हैं। हॉटस्टार, वूट, यूट्यूब आदि इनमें प्रमुख नाम हैं। ऐसे में इन सभी एप्स के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है और खुद को इस दौड़ में अव्वल साबित करने के लिए ये कई नए तरीके भी आजमा रहे हैं। पिछले कुछ सालों में इंटरनेट पर रचनात्मकता के नाम पर छोटी फिल्में और शो खूब आए हैं। यूट्यूब पर तो कुछ बड़े स्टूडियो और एसएंडपी (स्टैंडर्ड एंड प्रेक्टिसेज) डिपार्टमेंट्स के नाम पर इन फिल्मों और शोज में रचनात्मकता की सीमा रेखाओं तक को लांघा गया है। पर सोशल मीडिया के नाम पर यहां सब चलता है। बीते साल के आरंभ में, मनोरंजन जगत के बड़े नाम नेटफ्लिक्स ने इस क्षेत्र में कदम रखा था। वीडियो ऑन डिमांड की बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी ने बाजार में पहले से मौजूद हॉटस्टार और इरोज नाउ को टक्कर देने का मन बनाया। ये सभी पहले से ही दर्शकों को फिल्में, टीवी शो, डॉक्यूमेंटरीज और कई बार खेल तक उपलब्ध करा रहे हैं। मार्च में वाईकॉम 18 ने वूट पेश किया।
अभी हाल ही में बालाजी टेलीफिल्म्स लिमिटेड ने एएलटी बालाजी के जरिए खुद को ऑनलाइन करने की बात कही है। पहले से मौजूद अपने ऑनलाइन माध्यमों द्वारा सामग्री परोसने वालों में- स्टार इंडिया से हॉटस्टार, इरोज इंटरनेशनल से इरोज नाउ आदि शामिल हैं। हालांकि इनमें से कुछ विदेशी सीरियल्स, फिल्में या वीडियो भी दिखाते हैं, जैसे हॉट स्टार आजकल गेम ऑफ थ्रोंस (जीओटी) सीजन 6 दिखाता है और इसी तरह इरोज नाउ ने एक पाकिस्तानी शो दिखाना आरंभ किया है। कुल मिला कर आप यह कह सकते हैं कि जो कुछ भी आपके टीवी पर है, वह अब ऑनलाइन भी उपलब्ध है। पर ऐसा क्या है, जो एक सामग्री प्रदाता को दूसरे से अलग बनाता है। वह है ओरिजनल कार्यक्रम या ऐसी सामग्री, जो खासतौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए ही तैयार की गई हो। यह सामग्री सेंसरशिप से मुक्त होती है और टेलीविजन व बॉलीवुड को एक समान प्लेटफॉर्म पर लाकर खड़ा कर देती है। ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ मनोरंजन परोस कर ही एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में हैं। पिछले साल हॉट स्टार ने पार्टनरशिप में ‘ऑन एयर विद एआईबी’ नामक टॉक शो बनाया था, जिसमें कुछ लडक़े हर विषय पर अश्लील व भद्दी टिप्पणियां व गाली-गलौच करते थे। द वायरल फीवर (टीवीएफ) नाम के एक अन्य प्रोडक्शन हाउस ने, जो टीवीएफ प्ले और यूट्यूब पर वीडियो संचालित करता है, ने टीवीएफ पिचर्स नामक वेब सिरीज बनाई थी। वूट ने इन चार के साथ शुरुआत की- बैडमैन, सोडीज, सिंसकारी और चाइनीज तथा उनका पांचवां ‘शादी बॉयज’ भी रिलीज हुआ है। नेटफ्लिक्स ने भी फैंटम फिल्म्स के साथ एक सिरीज लाने की घोषणा की है, जो विक्रम चंद्रा की किताब सेक्रेड गेम्स पर आधारित होगी। इन बड़े खिलाडिय़ों के अलावा कुछ ऐसे छोटे नाम भी हैं, जो बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं। जैसे ‘क्यूकि’ नामक मीडिया कंपनी, जिसमें तीन साल की लडक़ी कुकिंग शो करती दिखती है। इस शो का नाम है ‘टाइम आउट’। ऐसा ही एक अन्य नाम है ‘दरिया’। डिजिटल एंटरटेनमेंट कंपनी पॉकेट एसेज पिक्चर्स ने इस वेब सिरीज और शॉट्र्स को बनाया है। इसमें दिखाया जाता है कि बॉयफे्रंड और गर्लफे्रंड्स किस तरह का बर्ताव करते हैं आदि। ये सिर्फ कुछ उदाहरण हैं। वेब फिल्म निर्माताओं को अपनी बात कहने की पूरी छूट देता है और साथ ही उन्हें सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के कड़े नियमों से भी नहीं गुजरना पड़ता। उन पर समय की पाबंदी नहीं होती, जो फीचर फिल्मों पर अमूमन तीन घंटे की होती है और टीवी पर 30 से 60 मिनट की। वेब के लिए किसी भी तरह के फॉर्मेट, शूटिंग स्टाइल, भाषा और कलाकारों का चुनाव किया जा सकता है, क्योंकि यहां पर रेटिंग पाने का कोई दबाव नहीं होता। यहां पर ज्यादा बेहतर तरीके से कहानी को बयां कर सकते हैं और यथार्थता का अधिक भावपूर्ण चित्रण संभव है। जैसा कि देवाशीष मखीजा कहते हैं- ‘आपको पात्रों को स्थापित करने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि आप तो सीधे तौर पर अपनी बात रख सकते हैं’। तांडव, एबसेंट, अगली बार जैसे शॉट्र्स के लेखक व निर्देशक मखीजा कहते हैं, ‘चूंकि हमारे पास इन विशाल सामाजिक, राजनैतिक, दार्शनिक प्रश्नों को एक छोटी फिल्म में विस्तार देने का अधिक समय नहीं होता, इसलिए जब हम एक व्यक्ति की कहानी को बयां करते हैं, उसकी कठिन परिस्थितियों के बारे में बताते हैं तो उसके दार्शनिक एवं भावात्मक पक्ष को सामने रखना आसान होता है। इससे कहानी और अधिक दमदार बनती है।’
क्या असली, क्या नकली
‘ओरिजनल (असली)’ नामक शब्द का इस क्षेत्र में प्रयोग तो बहुत होता है, पर बिना किसी स्पष्ट अर्थ के साथ। अमूमन इसे इनहाउस बनाए गए शोज के लिए प्रयोग किया जाता है। जैसे हॉटस्टार, गेम ऑफ थ्रोंस के लिए यह दावा करता है, क्योंकि भारत में यह शो केवल इसी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इस पर स्टार इंडिया डिजिटल आर्म के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी अजीत मोहन कहते हैं, ‘कई सारे ओटीटी (ओवर द टॉप कंटेंट) प्लेटफार्म हैं, जहां वे कहते हैं कि वेब सिरीज या डिजिटल असली हैं, वे इसे ‘सस्ता और जल्दी’ परोसने से जोड़ते हैं। हम मानते हैं कि हम ऐसे शोज बनाएं, जो लोगों के दिलों को छू जाएं।
वेब टीवी
इसे इंटरनेट टीवी भी कहा जाता है यानी टेलीविजन कार्यक्रमों की ऐसी सेवा, जो इंटरनेट के जरिये आप तक पहुंचती है। वेब टीवी की कई ऐसी सेवाएं और कंपनियां भी शुरू हुई हैं, जो इंटरनेट के जरिये प्रसारित होने वाले कार्यक्रम और लघु फिल्में बना रही हैं।
आईपीटीवी
टेलीविजन कार्यक्रमों और चैनलों की यह सेवा भी इंटरनेट के जरिये घरों तक पहुंचती है। लेकिन आईपीटीवी और वेब टीवी में फर्क यह होता है कि वेब टीवी में आप एक इंटरनेट कनेक्शन लेते हैं, जबकि आईपीटीवी में केबल टीवी की तरह कनेक्शन चैनल के पैकेज के साथ आता है और इस कनेक्शन का कोई दूसरा उपयोग नहीं कर सकते।
टीवी एप
कई प्रसारण कंपनियों ने अपनी एप्लिकेशन लॉन्च की हैं, जिनके जरिये आप उनके टीवी कार्यक्रमों को अपने मोबाइल फोन, टैबलेट या कंप्यूटर पर देख सकते हैं। इसमें सबसे लोकप्रिय एप यूट्यूब है। दूरदर्शन के चैनलों को देखने के लिए भी एप उपलब्ध हैं।
ओपन सर्विस
इंटरनेट पर उपलब्ध वे प्रसारण सेवाएं, जिनके लिए आपको न तो कोई भुगतान करना पड़ता है और न ही अलग से किसी लॉग-इन और पासवर्ड की जरूरत पड़ती है, वो ओपन सर्विस के दायरे में आती हैं।
सब्सक्रिप्शन सेवाएं
ये वे प्रसारण सेवाएं होती हैं, जिनके कार्यक्रम इंटरनेट पर देखने के लिए आपको निश्चित शुल्क जमा करना पड़ता है।

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