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गंगा जैसे पवित्र हैं सीएम योगी: चिन्मयानंद

पूर्व गृहराज्य मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी स्वामी चिन्मयानंद ने कल सीएम योगी से काफी देर तक विभिन्न मुद्दों पर बात की। स्वामी जी को कल कुछ मुस्लिमों ने ज्ञापन सौंप कर मंदिर बनाने की बात की थी जो ज्ञापन उन्होंने सीएम को दिया। इसके तत्काल बाद योगी की प्राथमिकताओं, उनके व्यक्तित्व और उनके जीवन के तमाम अनछुए पहलुओं पर उन्होंने लाइव टुडे चैनल पर 4पीएम / वीकएंड टाइम्स /नया लक्ष्य के संपादक संजय शर्मा से खुलकर बात की। राममंदिर मुद्दा, अवैध बूचडख़ानों और शराबबंदी जैसे सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। पेश हैं बातचीत के कुछ अंश-

कुछ मुस्लिमों ने मंदिर बनाने के लिए आपको ज्ञापन दिया और आपने इसके बाद सीएम से लंबी मीटिंग की। क्या कुछ हो रहा है मंदिर मामले में?
शिया समाज के लोग मुझसे मिले थे। उनका कहना है कि बाबरी मस्जिद बनवाने वाला मीर बाकी शिया मुस्लिम था। लिहाजा इसका फैसला करने का अधिकार हमारा है। यह कौम शांति में विश्वास करती है। सुप्रीम कोर्ट जब इस मामले को सुलझाने के लिए उत्सुक है तब कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। इस मामले में हाईकोर्ट ने फैसला दिया था। जापान की कंपनी को हायर किया था। कंपनी को वहां मंदिर के सबूत मिले हैं। उस समय राजनीतिक व मुस्लिम हलकों से यह बात कही जा रही थी कि यदि वहां मंदिर के सबूत मिल जाएंगे तो हम अपना दावा वापस ले लेंगे। शिया समुदाय के लोग इसको हल कराना चाहते हैं।

मांगपत्र पर योगी का क्या रवैया था?

इस बारे मैं कुछ नहीं बता सकता। मुख्यमंत्री के नाते उनकी जिम्मेदारियां अलग हैं। दूसरी बात इस सारे मामले में सरकार कोई पक्ष नहीं हैं। जब सरकार की भूमिका होगी तब भले ही योगी जी विचार कर सकते हैं। ज्ञापन बेकार नहीं जाएगा। यह बात दीगर है कि बेवजह मीडिया के लोग योगी को अलग फ्रेम में प्रस्तुत कर रहे हैं।

मीडिया में जो रिपोर्ट आ रही है, वह निरर्थक नहीं है। योगी ने पिछले दिनों जो बयान दिए हैं, वह फायरब्रांड नेता की तरह थे। वे मुस्लिमों को ललकारने वाले बयान देते थे। जब इमेज ऐसी बनी है तो उसमें मीडिया की क्या गलती है?
मैं बयानों पर नहीं जा रहा हूं। मैं पांच-पांच चुनाव लड़ा हूं। शरद यादव को हराया है लेकिन हमारी भाषा कभी इतनी ट्रैक से बाहर नहीं रही। इस चुनाव में गधा भी मुद्दा बना। एक पार्टी की नेत्री खुल्लमखुल्ला संप्रदाय के नाम पर वोट मांग रही थीं, लेकिन मीडिया की ऊंगली उधर नहीं उठी। योगी ने कोई ऐसा बयान नहीं दिया जिसे असंवैधानिक या असामाजिक कहा जा सकता है। उनके बयान आक्रामक हो सकते हैं लेकिन उनकी भावना आक्रमण करने की नहीं है।
योगी जी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहती हैं। वे कट्टïर हैं, शुद्धिकरण कराते हैं। पूजा करते हैं। योगी जी आपके बहुत करीबी हैं। वे क्या निजी जीवन में भी इतनी शुचिता का ध्यान रखते हैं? योगी बहुत कट्टïर हैं या कुछ साफ्ट हैं?
जहां शुचिता होगी वहां कट्ïटरता तो होगी ही। मैं योगी के जीवन के बारे में केवल इतना ही कहूंगा कि उनका जीवन गंगा जैसा पवित्र है। वे आज भी नित्य साधना करते हैं। यह पवित्रता उन्हें परंपरा से मिली है। शुचिता उनके जीवन में है। वे पांच बार सांसद रहे हैं। योगी महासभा के अध्यक्ष हैं। योगी महासभा के करीब दो हजार मठ हैं। 36 कॉलेज हैं। इसके संचालन को लेकर उन पर कोई आरोप नहीं लगा है। लोग उनको कट्ïटर कहते हैं, लेकिन आप ताज्जुब करेंगे उनके अस्पताल में हिंदुओं से ज्यादा मुस्लिमों का इलाज होता है। जहां तक भड़काऊ भाषण का सवाल है। प्रदेश में पांच सालों में 403 दंगे हुए लेकिन गोरखपुर में एक भी दंगा नहीं हुआ। अवैध बूचडख़ाने हैं। कई माननीय विधायक स्लॉटर हाउस में हिस्सेदार हैं। स्लॉटर हाउस और खनन का पैसा सीधे सत्ता में बैठे लोगों तक पहुंचता रहा है। इस पर योगी ने रोक लगाई है। वैध बूचडख़ाने बंद नहीं होने चाहिए। आवारा गायों के लिए गोशाला की रिपोर्ट मांगी गई है। गोशाला के लिए हजारों एकड़ जमीन है। इसकी बंदरबांट हुई है। इसको सही कर, यहां आवारा गायों को रहने की व्यवस्था होगी। बेरोजगारों को भी वहां काम मिलेगा।

तो क्या प्रदेश के हर जनपद में गोशालाओं का
निर्माण होगा?
निर्माण की बात नहीं कर रहा हूं। उनके पुनर्निर्माण की बात हो रही है। तमाम बीमारियां अवैध मांस और अवैध शराब से होती हैं। यह एक ऐसी पहल है जो किसी वर्ग विशेष के लिए नहीं है। इसका यदि कोई विरोध करता है तो वह पूर्वाग्रह से ग्रसित है।

यूपी पुलिस बहुत काबिल है, इशारा होते ही वह वैध बूचडख़ानों को भी बंद कराने लगती है। यदि ऐसे कार्रवाई होगी तो प्रदेश में मीट का कारोबार बंद हो जाएगा इससे प्रदेश में खराब संदेश नहीं जाएगा?
नानवेज को बंद नहीं किया जा रहा है। केवल मानकों का ध्यान रखा जा रहा है। अवैध बूचडख़ानों को बंद किया जाएगा।

बूचडख़ाने के बाद क्या शराबबंदी भी लागू होगी?

फिलहाल तो यूपी में अभी इस पर कोई चर्चा नहीं हो रही है।
आपकी और योगी की छवि भारतीय संस्कृति के संवाहक के रूप में है। क्या मांस खाना और शराब पीना आपकी नजर में भारतीय संस्कृति का विरोध है?
हम लोगों को निरामिष नहीं बना रहे हैं, लेकिन खान-पान सही हो
इसका प्रयास किया जा रहा है। लोगों के स्वास्थ्य के लिए ऐसा किया जा रहा है।

हड़ताल हो रही है, सरकार की ओर से कोई पहल क्यों नहीं
हो रही है?
हड़ताल कुछ कुंठित राजनेता करा रहे हैं। क्या अवैध कामों को मंजूरी दी जा सकती है। योगी सरकार कोर्ट और एनजीटी के हिसाब से काम
कर रही है।

जब आप केंद्रीय गृह राज्यमंत्री थे तब आपको पूर्वोत्तर की कमान सौंपी गई थी। वहां आंदोलन चल रहे थे उसे आपने खत्म कराया था। राममंदिर को लेकर क्या इसी तरह मुख्यमंत्री से कुछ खिचड़ी पक रही है?
योगी से हमारे संबंध राजनीतिक नहीं हैं। उसको राजनीतिक चश्मे से देखना ठीक नहीं है। महंत अवैद्यनाथ मेरे माता-पिता थे। उन्होंने पहले हमारा निर्माण किया फिर योगी का निर्माण किया। हम निजी मुलाकात करने गए थे। योगी और हम महंत अवैद्यनाथ की संतान के समान हैं। हम दोनों ने संस्कार उन्हीं से सीखे हैं।

आप योगी जी से क्या उम्मीद करते हैं?

योगी की प्राथमिकता होनी चाहिए कि वे जनता में विश्वास को और मजबूत करें। सुशासन उनका उद्देश्य है। वह भ्रष्टïाचार अनाचार को रोकें। प्रशासनिक शिथिलता के कारण, पुलिस की लापरवाही के कारण या राजनीतिक संरक्षण के कारण ऐसा होता है, इसे रोका जाए।

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