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प्रगतिशील लेखक संघ की हीरक जयंती

प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना के चैहत्तर साल पूरे हो गए इसकी हीरक जयंती पर एक विशेष समारोह लखनऊ में 8 व 9 अक्टूबर को आयोजित हुआ। जिसका उद्घाटन वरिष्ठ साहित्यकार एवं आलोचक डॉ. नामवर सिंह ने किया।
गौरतलब है कि लखनऊ में रिफाहेआम क्लब में 10 अप्रैल 1936 को प्रगतिशील लेखक संघ का पहला जलसा हुआ था जिसे मुंशी प्रेमचंद, सज्जाद जहीर, मौलाना हसरत नोमानी, चैधरी मोहम्मद अली साहब रुदौलवी आदि ने सम्बोधित किया था। यहीं प्रेमचंद ने अपना ऐतिहासिक दस्तावेज प्रस्तुत किया था जो आज भी साहित्य की दुनिया में मील का पत्थर माना जाता है। इसी जलसे के दौरान प्रख्यात शायर फैज अहमद फैज ने 19वीं व 20वीं शताब्दी के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आंदोलन पर अपना आलेख प्रस्तुत किया था। इस अंजुमन के महामंत्री सज्जाद जहीर बने थे। इस सम्मेलन में डॉ. रामविलास शर्मा, अहमद अली, महमुदज्जफर, फिराख गोरखपुरी, अली सरदार जाफरी, डॉ. अलीन ऐहतेशाम हुसैन और जयप्रकाश नारायण ने भी शिरकत की थी। तबसे साहित्य की दुनिया में काफी बदलाव आ चुका है। इस मौके पर प्रगतिशील लेखक आंदोलन के पच्चहत्तर वर्षः परिपेक्ष्य एवं चुनौतियां विषय पर बहस हुयी। इस सत्र की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कहानीकार तथा ज्ञानपीठ से सम्मानित अमरकांत को करनी थी लेकिन वह समारोह में नहीं आये। पहले दिन यह आयोजन लखनऊ में नेहरू युवा केंद्र में हुआ। पहले दिन शाम 7रू30 काव्य पाठ व इप्टा की इकाई के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुये। दूसरे दिन निशातगंज में बने कैफी आजमी अकादमी में प्रगतिशील आंदोलन की विरासतरू पक्षधरता के जोखिम विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गयी। इसमें नामवर सिंह ने अध्यक्षीय भाषण दिया। इस मौके पर प्रलेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष खगेन्द्र ठाकुर, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अली जावेद, काशीनाथ सिंह, इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. जितेन्द्र रघुवंशी केरल से आये डॉ. वाल्लकव मोहनदास, नुसरत मोहिउद्उदीन, जनवादी लेखक संघ के दूधनाथ सिंह आदि ने शिरकत की। इस समारोह के दौरान कई मुद्दों पर वैचारिक मतभेद देखने को मिला। प्रलेस ने अगले 25 सालों में अपनी पहचान को पुख्ता करने के लिए अन्य लेखक संगठनों जनवादी लेखक संघ तथा जन संस्कृति मंच के साथ बैठक करने का फैसला किया है। सम्मेलन की समाप्ति पर दूसरे दिन कई समसामायिक मुद्दों से जुड़े तीन अहम प्रस्ताव भी पेश किये गये जिन्हें उपस्थित लेखकों ने अपनी मंजूरी प्रदान की। प्रलेस की अगली अहम बैठक नई दिल्ली में होने वाली है।

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