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दस करोड़ में ली जमानत और अब करोड़ों खर्च करके जेल में मौज कर रहा है बलात्कार का आरोपी गायत्री प्रजापति

जमानत देने के लिए कुछ दिनों पहले ही तैनात किये गये थे जज
इस सरकार में भी पैसों के दम पर जेल में मौज कर रहा है गायत्री
जिला कारागार से लेकर शासन के अफसरों तक हर महीने पहुंचाता है इन सुविधाओं के बदले करोड़ों रुपये

वीकएंड टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति ने अपने पैसों के दम पर न्यायपालिका में शामिल कुछ लोगों को खरीदकर हाईकोर्ट से जमानत हासिल की थी। इस बात का खुलासा इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज दिलीप बी भोसले की रिपोर्ट से हुआ है, जिसमें बताया गया कि गायत्री को जमानत देने के लिए 10 करोड़ रुपये की डील की गई। इस डील में पॉस्को कोर्ट के जज ओपी मिश्रा और तीन वकील शामिल हैं, जिनके बीच जमानत के लिए दी गई रकम बांटी गई। वहीं पैसों के दम पर गायत्री ने जेल में भी अपने ऐशो आराम का सारा इंतजाम कर रखा है। उसको ऐशो आराम मुहैया कराने की सुविधा के बदले जिला कारागार से लेकर शासन के अफसरों तक को हर महीना करोड़ों रुपया गायत्री के गुर्गों की तरफ से पहुंचाया जाता है। यदि ऐसे ही पैसों के बल पर लोग जमानत पर छूटते रहे और जेल में ऐशोआराम करते रहे, तो निश्चित तौर पर न्यायपालिका के लिए खुद को पाक-साफ साबित करना मुश्किल हो जायेगा। हालांकि जमानत में पैसे की डील की खबर के बाद हाईकोर्ट ने जमानत खारिज कर जमानत देने वाले जज को निलंबित कर दिया है।
गायत्री प्रजापति ने अपने जुगाड़ के दम पर ही मात्र पांच साल में बीपीएल श्रेणी से अरबपति बनने का सफर तय कर लिया। प्रदेश में खनन के अवैध धंधे से गायत्री ने हजारों करोड़ की काली कमाई की थी। जेल में बंद होने और प्रदेश में नई सरकार बनने के बावजूद गायत्री का रसूख कम नहीं हुआ है, इस बात की मिसाल जेल में गायत्री को मिलने वाली ऐशोआराम की सुविधाएं हैं। जो कि कहीं न कहीं जेल प्रशासन और शासन में बैठे गायत्री के शुभचिंतकों की वजह से मिल रही हैं। ऐसे में रेप केस में जमानत पाने के लिए गायत्री की तरफ से की गई 10 करोड़ की डील ने साबित कर दिया है कि जेल में बंद होने के बावजूद उसका नेटवर्क काफी सक्रिय है। इसी वजह से उसने जेल में बैठे-बैठे खुद को हाईकोर्ट से जमानत दिलाने के लिए 10 करोड़ रुपये की डील कर ली। नियमों की अनदेखी कर सेशन जज ओपी मिश्रा को रिटायरमेंट से ठीक तीन हफ्ते पहले पॉस्को कोर्ट का जज नियुक्तकर दिया गया। उसके बाद तीन वकीलों की मदद से गायत्री ने अपनी जमानत की सारी सेंटिंग बिठा दी। आखिरकार 25 अप्रैल को गायत्री को जमानत मिल गई। जस्टिस भोसले की रिपोर्ट के मुताबिक जज और तीनों वकीलों की मीटिंग भी कई बार हुई, जिसके बाद प्रजापति को जमानत दे दी गई। हालांकि इस मामले की सुनवाई जस्टिस लक्ष्मीकांत राठौड़ कर रहे थे, लेकिन उनकी जगह 7 अप्रैल को ओपी मिश्रा को मामले की सुनवाई के लिए लाया गया, जबकि वो कुछ समय बाद रिटायर होने वाले थे।

मार्च में दी थी बेल की अपील
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद गायत्री प्रजापति के खिलाफ यूपी पुलिस ने 17 फरवरी को एफआईआर दर्ज की थी। उसके बाद पुलिस की कई टीमें गायत्री को ढूंढती रहीं। गायत्री को नाटकीय ढंग से गिरफ्तार किया गया और उसने गिरफ्तारी के बाद 15 मार्च को हाईकोर्ट में बेल की अपील की और उसे 24 अप्रैल को पॉस्को कोर्ट ने जमानत दे दी। जबकि सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद यूपी पुलिस ने गायत्री और उनके सहयोगियों अशोक तिवारी, पिंटू सिंह, विकास शर्मा, चंद्रपाल, रूपेश और आशीष शुक्ला के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 376डी, 511, 504, 506 और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। जानकारों के मुताबिक आईपीसी की धारा- 376 के तहत रेप का केस दर्ज होता है। इसमें आरोपी को 10 साल की कैद या उम्रकैद होती है। धारा- 376 डी के तहत गैंगरेप का केस दर्ज होता है, जिसमें उम्रकैद की सजा होती है।

जेल प्रशासन भी सवालों के घेरे में
हाईकोर्ट के जज डीबी भोसले की रिपोर्ट से साबित हो चुका है कि गायत्री ने अपनी जमानत की सारी सेटिंग बहुत ही शातिर ढंग से की थी। वहीं सूत्रों की मानें तो जेल में बंद गायत्री से उसके गुर्गे बहुत ही आसानी से मुलाकात कर लेते हैं। वह जेल में बैठकर अपने सारे कामों की जानकारी रखता है, अपने कारिंदों को निर्देश देता रहता है। इतना ही नहीं वह जेल में भी ऐशो आराम की सुविधाओं का मजा ले रहा है।

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