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तो क्या चीफ सेके्रटरी के घर पर लिखी गई थी रिवर फ्रंट घोटाले की न्यायिक जांच रिपोर्ट

4पीएम के हाथ लगी रिपोर्ट में राहुल भटनागर को बचाने की कोशिश…

रिवर फ्रंट घोटाले की न्यायिक जांच रिपोर्ट में इंजीनियरों पर फोड़ा ठीकरा
4पीएम के हाथ लगी न्यायिक जांच रिपोर्ट की कॉपी
रिपोर्ट में पूरी कोशिश सिर्फ चीफ सेके्रटरी राहुल भटनागर को बचाने की
असली गुनहगार अभी भी बैठे हैं शासन के शीर्ष पद पर, इसलिए जांच हो रही प्रभावित

संजय शर्मा
लखनऊ। 4पीएम लगातार आपको रिवर फ्रंट घोटाले का सच सामने लाने की कोशिशें में जुटा है और इसी क्रम में हमने जानना चाहा कि आखिर इस घोटाले को खोलने के लिए बनी जांच रिपोर्ट में सच क्या है। 4पीएम के हाथ जब इस घोटाले की न्यायिक जांच रिपोर्ट लगी तो साफ हो गया कि यह और कुछ नहीं बल्कि राहुल भटनागर को बचाने की एक कोशिश का हिस्सा भर है। इस रिपोर्ट के आधार पर कल गोमती नगर थाने में जो एफआईआर दर्ज हुई उसमें भी सिर्फ अभियंताओं को ही दोषी ठहराया गया है। असली घोटालेबाज अफसरों और नेताओं को बख्श दिया गया। इस जांच रिपोर्ट और उसके बाद हुई कार्रवाई पर आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाते हुए कहा है कि यह सपा और भाजपा का मिलाजुला खेल है। इस रिपोर्ट से साफ है कि हजारों करोड़ के घोटाले के असली गुनाहगारों को प्रभावशाली पद पर बैठे हुए लोग बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
लगभग 74 पेज की रिपोर्ट में जांच कर रहे न्यायमूर्ति ने कहीं भी यह सवाल खड़ा नहीं किया कि प्रमुख सचिव वित्त रहते राहुल भटनागर ने पहले ही चरण में योजना को वित्तीय अनुमोदन किया। यहीं नहीं जब दूसरे चरण में योजना की धनराशि दोगुने से अधिक कर दी तब भी सूबे के प्रमुख सचिव राहुल भटनागर पर न्यायिक जांच में सवाल नहीं उठाए गए। यहीं नहीं कई महीनों तक परियोजना की उच्च स्तरीय अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष के रूप में जब वह चीफ सेके्रटरी थे मीटिंग की गई और परियोजना का निरीक्षण किया गया, मगर पूरी जांच रिपोर्ट में इस बिन्दु पर कोई सवाल नहीं उठाए गए। जाहिर है यह सब इसलिए हुआ क्योंकि राहुल भटनागर जिन पर वित्तीय संसाधनों को संभालने की जिम्मेदारी थी वह इस धांधली में शामिल थे, वे सबसे बड़ी कुर्सी पर बैठे हैं, तो कोई भी जांच निष्पक्ष हो पाएगी इसकी उम्मीद करना ही बेमानी है।

आखिर भाजपा का कौन बड़ा नेता बचा रहा है चीफ को
लखनऊ से लेकर दिल्ली तक मीडिया और नौकरशाहों में इस बात की बेहद चर्चा है कि आखिर चाहकर भी सीएम अपने इस बदनाम चीफ सेके्रटरी को क्यों नहीं हटा पा रहे। सूत्रों के अनुसार शुगर लॉबी ने सूबे के सबसे ताकतवर एक बाहरी नेता को 10 करोड़ रुपया दिया। शुगर लॉबी चाहती है कि राहुल भटनागर से शुगर लॉबी का साथ न छूटे। आाजदी के बाद से यह पहला मौका है कि जब किसी चीफ सेके्रटरी ने किसी विभाग के प्रमुख सचिव का पद भी अपने पास रखा हो। व्यक्तिगत बातचीत में भाजपा के स्थानीय नेता भी अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहते है कि हम सब इस बात का जवाब नहीं दे पा रहे कि चुनाव से पहले जब हमने राहुल भटनागर के भ्रष्टïाचार की शिकायतें चुनाव आयोग से की थी और उन्हें तत्काल चीफ सेके्रटरी के पद से हटाने की मांग की थी तो अब आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि राहुल भटनागर को अभी तक चीफ सेके्रटरी के पद से नहीं हटाया गया।

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