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फॉर्म दिखाने मैदान में उतरे

देहरादून। जब केंद्र के साथ ही उत्तराखंड में भी बीजेपी की सरकार बनी और ऐसे अंदाज में बनी कि इतिहास ही रच गया, तो सभी को उम्मीद थी कि विकास के मामले में तो राज्य में जादू ही हो जाएगा। आखिर खुद प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जो ऐलान कर गए थे कि उत्तराखंड में भी बीजेपी को जितवा कर विकास का डबल इंजन लगा दीजिये। पहाड़ और मैदान के लोगों ने मोदी पर यकीन किया और हाथ को बाय-बाय कर कमल का फूल बड़ी ही खूबसूरती से खिला दिया। खुद बीजेपी के दिग्गज नतीजे देख कुछ दिन तक सही तरीके से बोलने की सूरत में नहीं थे तो बुरी तरह लुट और पिट गई कांग्रेस के नेताओं की जुबान से बोल तो तब फूटते जब दिखते। ऐसी हार हुई कि सिर पर पांव रख कर सार्वजनिक जीवन से ही कुछ वक्त के लिए भाग खड़े हुए। अभी भी कई दिग्गज समझे जाने वाले नेता नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में त्रिवेंद्र के मुख्यमंत्री बनने के बाद लोगों ने वाकई अति उम्मीद बांध ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तेजी के कारण उनके कामकाज की समीक्षा बहुत जल्द होने लगी। हालांकि, आज योगी नाकाम साबित होते दिख रहे हैं और त्रिवेंद्र फॉर्म में आने की कोशिश में जुट गए हैं। उनको लग रहा है यही वक्त सही है, अपनी काबिलियत दिखाने की। ऐसा वह करने लगे हैं। हर मोर्चे पर। किसी घायल को देख कर काफिला रुकवा वह लोगों के बीच संवेदनशील और आम लोगों के प्रतिनिधि की छवि बनाना चाह रहे हैं और अस्पतालों और सरकारी दफ्तरों में अचानक पहुंच कर कामकाज में चुस्ती लाने का भी संदेश देने लगे हैं। अब उन्होंने एक साथ दो कदम उठा कर नौकरशाहों को जता दिया है कि अब तक जैसा होता रहा, वह अब नहीं चलेगा। उन्होंने भ्रष्टाचार को प्रोत्साहित करने वाली खरीद नीति को बदल दिया और सभी जिलाधिकारियों को चेतावनी दे डाली कि वे जिम्मेदारियों का निर्वहन तरीके नहीं करेंगे तो नतीजे भी भुगतने को तैयार रहे।

खरीद नीति में बदलाव करते हुए उन्होंने सभी महकमों के लिए गवर्नमेंट ई मार्केटिंग पोर्टल में रजिस्ट्रेशन करना जरूरी कर दिया। अब महकमों को कोई भी खरीद करनी होगी तो अपनी मांग और जरूरत को पोर्टल में डालना होगा। इसके जरिये ही खरीद होगी। कम्पनियां पोर्टल देखकर अपनी तरफ से वस्तु की कीमत देगी। सबसे कम कीमत वाली कंपनी को टेंडर दे दिया जाएगा। इसके बाद भी हालांकि, रिवर्स बिडिंग का प्रावधान कर दिया है यानि, सबसे कम कीमत देने के बाद फिर बिडिंग होगी और उससे कम कीमत आने पर टेंडर आवंटित हो जाएगा। इसको उन्होंने कैबिनेट की बैठक में मंजूर भी करा लिया। 25 लाख रुपये से ज्यादा की खरीद ई-टेंडर से ही होगी।
त्रिवेंद्र की छवि नरम किस्म के मुख्यमंत्री की बन रही थी। इस छवि को तोडऩे में भी वह जुट गए हैं। उन्होंने उद्यान विभाग के आम समारोह में तब तीन विभागीय अफसरों को बुरी तरह मंच से डांट पिला दी, जब वे पीछे बैठकर आपस में बातें कर रहे थे। फिर इसको और मजबूती प्रदान करने के लिए जिलाधिकारियों को कसने में जुट गए। स्वच्छता अभियान में उन्होंने प्रदेश के शहरों को शीर्ष शहरों में लाने की कोशिश मेहनत के साथ शुरू करने को कहा। उन्होंने कहा कि उप जिलाधिकारियों और डिप्टी कलेक्टर की चरित्र पंजिका में उनके इस दिशा में की गई कोशिश का जिक्र जरूर करें। सभी नगर निगम अब यह सुनिश्चित करेंगे कि हर घर के आगे से कचरा उठाया जाए। जिलाधिकारी ही शहरी स्वच्छता के नोडल अधिकारी होंगे। बारिश और मानसून के कारण बाढ़ चौकियों को अधिक दुरुस्त करने पर भी उन्होंने बल दिया। प्रधानमंत्री आवास योजना में लोगों को भूमि देने के काम में तेजी लाने, दैवीय आपदा में सरकारी सहायता जल्दी देने, तहसील दिवस और समाधान पोर्टल पर विशेष ध्यान देने, हर जिले में नदी, तालाब को पुनर्जीवित करने पर उन्होंने जिलाधिकारियों को नसीहत दी है।
नैनीताल में वन विभाग में बायोमीट्रिक हाजिरी न लगने पर नाराज होने के साथ ही जिलाधिकारियों को एक हफ्ते में बायो मीट्रिक सिस्टम लागू करने के भी निर्देश उन्होंने दिए। वह जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस में इस बात पर गुस्सा हुए कि नैनीताल, काठगोदाम, हल्द्वानी में सफाई का हाल बहुत खराब है। बागेश्वर में खाद्यान्न भण्डार की खराब स्थिति पर भी वह बरसे। जिलाधिकारियों को उन्होंने खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा और किसानों की आय बढ़ाने पर बल दिया।
मुख्यमंत्री इस बात पर भी खफा हुए कि 434 शहरों में देहरादून 316वें स्थान पर है। पहाड़ों में मोबाइल कनेक्टिविटी खराब होने पर वह नाखुशी जाहिर करने से नहीं चूके। उन्होंने कहा कि आइन्दा मोबाइल कम्पनियों को केबल बिछाने की अनुमति तभी दी जाए, जब वे पहाड़ों में कनेक्टिविटी सुधारेंगे। उन्होंने चार धाम यात्रा, पर्यटन और कार्य संस्कृति में सुधार पर भी बहुत जोर दिया और इसमें सुधार न होने पर संबंधित जिलाधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने की चेतावनी दी। त्रिवेंद्र के इस बदले और आक्रामक तेवर से बीजेपी खुश दिख रही है।
उसको लग रहा है कि सरकार ने अब सही दिशा और रफ्तार पकड़ ली है। सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक के मुताबिक सरकार शुरू से ही बहुत अच्छा कार्य कर रही है, बस इसकी रफ्तार बढ़ गई है तो लोगों को परिवर्तन महसूस हो रहा है। पार्टी के युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में विकास की रफ्तार की तुलना उत्तर प्रदेश सरीखे स्थापित और मैदानी राज्य से करना ज्यादती है लेकिन मुख्यमंत्री सोच समझकर पहाड़ी राज्य के लिए बेहतर योजनाओं को तैयार कर रहे हैं और उनको अमल में ला रहे हैं। इसमें जल्दबाजी ठीक नहीं होती। योजनायें रोज नहीं बदली जाती। पिछली कांग्रेस सरकार ने राज्य को नुकसान पहुंचाने वाली अनेकों योजनाएं लागू की थी या फैसले किए थे। उनसे राज्य को बहुत क्षति पहुंची। उनका विश्लेषण कर उनके स्थान पर सार्थक योजनाएं लाई जा रही हैं।
त्रिवेंद्र को केंद्र सरकार से भी सहयोग मिलने लगा है। जिस देहरादून को स्मार्ट सिटी की रेस में केंद्र सरकार पिछली कांग्रेस सरकार के वक्त बार-बार फेल कर रही थी, उसको अब शामिल कर लिया गया है। इससे राज्य की सरकार के पास यह कहने का मौका मिल गया है कि डबल इंजन का फायदा राज्य को मिलने लगा है। त्रिवेंद्र केंद्र में अपनी ही पार्टी की शक्तिशाली सरकार होने का कितना फायदा उत्तराखंड के लिए ले पाते हैं, यह अहम है। फिलहाल तो बीजेपी के साथ ही अवाम को भी उम्मीद है कि फायदा निश्चित रूप से मिलेगा। यह बात अलग है कि पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज हरीश रावत ने बीजेपी सरकार पर नाकाम होने का ठप्पा लगाने के साथ ही उसकी सौ से ज्यादा विफलता भी गिनाई है। त्रिवेंद्र को हालांकि अपने मंत्रियों से वैसा सहयोग नहीं मिल रहा है, जैसा अपेक्षित था। मंत्री सालाना तबादले तक नहीं कर पाए। इसके चलते सरकार को तबादला सीजन बढ़ा कर 20 जुलाई करना पड़ा है।

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