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तो क्या हिंदुत्व का दामन थामे रहेंगे योगी ….

लहाल यह तो तय है कि उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व का बेल और फलेगा-फूलेगा। भले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘सबका साथ और सबका विकास’ के फलसफे पर चलने की बात कह रहे हो लेकिन पिछले दिनों योगी सरकार ने जो बजट पेश किया उससे स्थिति साफ हो गई कि हिंदुत्व के धार को और मजबूत किये जाने की तैयारी हो गई है। सरकार के एंजेडे में धार्मिक शहर और महापुरुष के नाम पर विकास उनकी प्राथमिकता में है। शायद इसीलिए अयोध्या, मथुरा और काशी के विकास के लिए बजट जारी किया गया तो बीर, शबरी, अहिल्याबाई, लक्ष्मीबाई आदि नामों से योजनाएं शुरू कर सरकार ने संस्कृति की रक्षा के संकल्प को आगे बढ़ाया है। सरकार ने जनसंघ के संस्थापक सदस्य पं. दीनदयाल उपाध्याय के नाम के सहारे हिंदुत्व के एजेंडे को धार दी है तो वहीं समाज के गरीब तबके को रिझाने की भी कोशिश की है। फिलहाल विपक्ष चाहे जो हो-हल्ला मचाए पर सरकार अपने मंसूबे में कामयाब होती दिख रही है।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने पहले बजट में हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने के लिए एक से बढ़ कर एक प्रावधान किए हैं तो वहीं अल्पसंख्यक कल्याण के बजट पर जमकर कैंची चलाई है। मथुरा-वृंदावन और अयोध्या-फैजाबाद को मिलाकर दो नए नगर निगम बनाकर, कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए अनुदान 50 हजार से बढ़ा कर एक लाख करके और मुख्यमंत्री के हाथों सरयू आरती की शुरुआत के जरिये सरकार ने यह साबित कर दिया है कि आने वाले दिनों में राज्य में धर्म विशेष के आग्रहों और हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने में कोई कसर नहीं रखी जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राजनीति का केन्द्र बिंदु हमेशा से हिंदुत्व ही रहा है, लेकिन सत्ता संभालने के बाद से वे इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बचते रहे हैं। उन्होंने हमेशा ‘सबका साथ और सबका विकास’ की बात कही। सियासी गलियारों में भी इस बात की चर्चा थी कि अब बीजेपी विकास की राजनीति कर रही है लेकिन योगी सरकार का बजट पेश होने के बाद सारी आशंकाएं धरी की धरी रह गई। यह पहला मौका नहीं है जब सरकार ने हिंदुत्व को मुद्दे को धार देने की कोशिश की है। सीएम योगी सरकार बनने के साथ ही हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए अनुदान बढ़ाना, मानसरोवर भवन बनाना, अयोध्या और वृंदावन को नगर निगम का दर्जा, अयोध्या में कारसेवकों से जुड़े सभी स्थलों पर सीएम का पहुंचना और वहां के विकास के लिए घोषणाएं करना, मुगलसराय रेलवे स्टेशन के नाम बदलने का प्रस्ताव, ये सभी ऐसे मुद्दे हैं जिनके सहारे सरकार हिंदुत्व के एजेंडे को धार दे रही थी। योगी सरकार ने अपने पहले बजट में भी इसी को आगे बढ़ाया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अयोध्या, मथुरा और काशी उसके लिए अति महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। सरकार यह भी संदेश देना चाहती है कि उसके लिए नेताओं के गृह जनपद नहीं बल्कि धार्मिक आस्था वाले स्थान महत्वपूर्ण हैं। ध्यान रहे कि पिछली सरकार में आजमगढ़, इटावा, कन्नौज और रामपुर वीवीआईपी जिले थे। सरकार ने अयोध्या के विकास के लिए दो सौ करोड़, मथुरा और वृंदावन के विकास के भी दौ सौ करोड़, वाराणसी के लिए लगभग 650 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में की गई है। सरकार ने भाजपा व संघ से जुड़़े महान चिंतकों के नाम से भी योजनाएं शुरू की हैं। पं. दीन दयाल उपाध्याय के नाम से नौ योजनाएं शुरू की गई हैं, जबकि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से चल रही एक योजना को विस्तार दिया गया है। भाऊराव देवरस के नाम से लखनऊ विश्वविद्यालय में शोधपीठ की स्थापना के लिए बजट में धन की व्यवस्था की गई है। अखिलेश सरकार में कब्रिस्तानों की चाहरदीवारी के लिए कई सौ करोड़ रुपया खर्च करने का मामला गत चुनाव में मुद्दा बना था। भाजपा नेताओं ने इसे तुष्टिकरण बताया था। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पहले बजट में ही न केवल कब्रिस्तान की चाहरदीवारी योजना को समाप्त कर दिया है बल्कि अल्पसंख्यक कल्याण के बजट को भी कम कर दिया है। बजट में मदरसों के लिए अनुदान हेतु कोई धन नहीं है, जबकि 146 मदरसों के अनुदान के लिए सपा सरकार में सीएम अखिलेश ने 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की थी। दरअसल बीजेपी जानती है कि आगे सत्ता में आने के लिए यह जरूरी है।
प्रदेश की आबादी के लिहाज से देखा जाए तो यह बजट किसके लिए है अंदाजा लगाना आसान है। उत्तर प्रदेश की सत्ता में भी बीजेपी हिंदुत्व के भरोसे ही आयी है। 2019 करीब है और बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व जानता है कि यूपी में विजय पताका फहराना है तो इस मुद्दे को और धार देने की जरूरत है। राम के नाम के साथ-साथ गाय को भी जिंदा रखना है तभी तो वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने बजट भाषण यह कह कर शुरु किया कि राष्टï्र की अस्मिता के प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का स्मरण करना हमारी प्रतिबद्धता है। उनको नमन कहकर अपनी बात शुरु करता हूं। वहीं गायों के संरक्षण और संवर्धन के लिए ‘कान्हा गोशाला व बेसहारा पशु आश्रय योजना’ के तहत कांजी हाउस/पशु शेल्टर होम्स की स्थापना की भी घोषणा की
गई है। इससे योगी सरकार की मंशा स्पष्टï दिख रही है।

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