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लोकतंत्र पर हमला…

इसकी जितनी भी भत्र्सना की जाए कम है। लोकतंत्र की दुहाई देने वाली भाजपा खुद ही लोकतंत्र का गला घोट रही है। उत्तर प्रदेश के इतिहास में जो काम अब तक नहीं हुआ था वो भाजपा के शासनकाल में हो रहा है। विधानसभा की कैंटीन में पत्रकारों के हाथ से थाली छीन ली गई तो राष्टï्रपति चुनाव के लिए पत्रकारों को पास नहीं दिया गया। सुरक्षा के नाम पर पत्रकारों के पास निरस्त कर दिए गए। और तो और बेहतर कानून-व्यवस्था की दुहाई देने वाली योगी सरकार के राज में सरेआम पत्रकार की हत्या हो रही है तो वहीं अखबार के दफ्तर पर हमले भी होने लगे हैं। हो भी क्यों न? चुनाव में सबसे ज्यादा अपराधियों को टिकट भाजपा ने ही दिया था। जब माननीय लोगों का खुद का आपराधिक रिकार्ड है तो भला प्रदेश में हम राम राज्य की उम्मीद कैसे कर सकते हैं।

मोदी सरकार पर लगातार आरोप लगता आ रहा है कि सरकार मीडिया की आवाज दबाने पर लगी हुई है। इतना ही नहीं अब तो यह सर्वविदित हो गया है कि जो मीडिया हाउस मोदी का गुणगान करेगा उसकी बल्ले-बल्ले है और जिसने मोदी की खिलाफत की उसकी खैर नहीं। ऐसा ही आरोप अब योगी सरकार पर लग रहा है। धीरे-धीरे सरकार मीडिया पर अंकुश लगाना शुरू कर दी है। पिछले दिनों हुए कुछ घटनाक्रम पर गौर करें तो ऐसा होता दिख रहा है। विधानसभा में विस्फोटक पदार्थ मिलने के बाद से आनन-फानन में मीडियाकर्मियों के पास निरस्त होने के साथ-साथ वाहनों के पास निरस्त कर दिये गए। इतना ही नहीं राष्टï्रपति जैसे महत्वपूर्ण चुनाव के लिए पत्रकारों को पास तक नहीं दिया गया। इससे प्रदेश के पत्रकारों में काफी रोष था। पत्रकारों के लाख कोशिश के बावजूद उन्हें कवरेज की अनुमति नहीं मिली। इतना सब तो ठीक था। विधानसभा की कैंटीन में वरिष्ठï पत्रकारों के साथ जो अभद्रता की गई वह शर्मनाक घटना थी। विधानसभा में कुछ मंत्रियों के इशारे पर पत्रकारों के साथ इस दशक का सबसे बुरा बर्ताव हुआ। विधानसभा में पत्रकारों के हाथों से भोजन की थालियां छिनवा ली गईं जिसमें आधा दर्जन से अधिक वरिष्ठ पत्रकारों में महिलाएं भी शामिल थीं। उद्दंडता पूर्वक विधानसभा रक्षकों व मार्शलों ने पत्रकारों के हाथ से थाली छीनकर सभी पत्रकारों के हाथ पकडक़र कैंटीन से बाहर खदेड़ दिया। पत्रकारों के साथ इस तरह का बर्ताव करते हुए नियम-कानून का हवाला देते हुए धक्के मार-मारकर कैंटीन से बाहर खदेड़ा गया और जमकर अभद्रता की गई। और तो और वहां मौजूद अधिकारी पत्रकारों की इस दुर्दशा पर हंसते रहे। नाराज पत्रकारों ने संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना का घेराव किया। सुरेश खन्ना ने इसके लिए खेद भी व्यक्त किया। पत्रकारों के साथ इस तरह का बर्ताव किए जाने के पीछे का कारण बताया जाता है कि इधर कई दिनों से विधानसभा की हो रही रिपोर्टिंग से अफसर और मार्शल नाराज थे। यह मामला विधानसभा अध्यक्ष तक भी पहुंचाया गया।
उत्तर प्रदेश में जिस तरह चौथे स्तंभ पर चोट पहुंचाई जा रही है वह कतई ठीक नहीं है। लचर कानून-व्यवस्था का फायदा उठाकर अपराधी सरेआम चौथे स्तंभ पर हमला कर रहे हैं। पिछले दिनों लखीमपुर खीरी में एक पत्रकार को मार दिया गया तो लखनऊ के एक चर्चित अखबार के दफ्तर पर गुंडों ने हमला कर दिया। अखबार के दफ्तर पर हुए हमले की तीखी आलोचना की गई मगर ऐसी घटनाएं हो क्यों रही है इसके पीछे का कारण जानना होगा। प्रदेश में कानून-व्यवस्था जो हाल है वह इन आंकड़ों से समझा जा सकता है। उत्तर प्रदेश में दो महीने में 729 मर्डर, 800 से ज्यादा रेप हुआ है। उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने के बाद आदित्यनाथ योगी सरकार जिस मुद्दे पर सबसे ज्यादा नाकाम रहने के आरोप झेल रही है, वह है- कानून व्यववस्था। पिछले दिनों सरकार ने खुद इस बात को स्वीकारा है कि अपराध की घटनाएं बढ़ी हैं। विधानसभा में एक सवाल के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सरकार के गठन से लेकर 9 मई तक राज्य में कुल 729 हत्याएं, 803 बलात्कार, 60 डकैती, 799 लूट और 2682 अपहरण की घटनाएं हुई हैं। हालांकि विपक्षी दल इसी दौरान पिछले सालों में हुए अपराध का तुलनात्मक ब्यौरा चाहते थे लेकिन सरकार के पास वो उपलब्ध नहीं थे। विपक्ष का दावा है कि बीते सालों की तुलना में अपराध में तीस फीसदी से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है। सरकार दो महीने में ही अपराध की इतनी बड़ी सूची भले ही पेश कर रही हो लेकिन अपराध के मामले बढऩे की वजह कुछ ऐसा बता रही है कि विपक्षी दलों का गुस्सा और बढ़ गया है। खुद मुख्यमंत्री योगी ने सदन में कहा कि अपराध बढ़े नहीं हैं बल्कि वो बढ़े हुए इसलिए दिख रहे हैं कि क्योंकि पहले अपराध दर्ज नहीं होते थे, जबकि अब अपराध दर्ज हो रहे हैं। विधानसभा में ये बात कहते हुए योगी ने सीधे तौर पर बीएसपी और समाजवादी पार्टी की ओर इशारा किया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुलिस और प्रशासन को सरकार इस बारे में निर्देशित करती है कि मामले दर्ज किए जाएं या नहीं। प्रदेश में कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने में सरकार जुटी है लेकिन यह दुरुस्त कैसे होगा जब बीजेपी नेता और कार्यकर्ता ही कानून का माखौल उड़ा रहे हैं। अभी तो शुरुआत है लेकिन जल्द ही इसमें सुधार नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं कि पूर्ववर्ती सरकार की तरह इस सरकार पर भी ठप्पा लग जाएगा।

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