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गिरिराज

यह है भारत का शुभ्र मुकुट
यह है भारत का उच्च भाल,
सामने अचल जो खड़ा हुआ
हिमगिरि विशाल, गिरिवर विशाल!
कितना उज्ज्वल, कितना शीतल
कितना सुन्दर इसका स्वरूप?
है चूम रहा गगनांगन को
इसका उन्नत मस्तक अनूप!
है मानसरोवर यहीं कहीं
जिसमें मोती चुगते मराल,
हैं यहीं कहीं कैलास शिखर
जिसमें रहते शंकर $कपाल!
युग युग से यह है अचल खड़ा
बनकर स्वदेश का शुभ्र छत्र!
इसके अंचल में बहती हैं
गंगा सजकर नवफूल पत्र!
इस जगती में जितने गिरि हैं
सब झुक करते इसको प्रणाम,
गिरिराज यही, नगराज यही
जननी का गौरव गर्व-धाम!
इस पार हमारा भारत है,
उस पार चीन-जापान देश
मध्यस्थ खड़ा है दोनों में
एशिया खंड का यह नगेश!

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