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अमित शाह…जिसने बदल दी तीन सालों में भाजपा की तस्वीर

लोग उन्हें यूं ही चाणक्य नहीं कहते। उनकी चाणक्य नीति से ही आज दिल्ली से लेकर देश के 18 राज्यों में भगवा परचम लहरा रहा है। परदे के पीछे रहकर अपनी कुशल रणनीति से उन्होंने बीजेपी को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनाने के साथ-साथ ‘अपराजेय’ की श्रेणी में ला दिया है। ‘किंग मेकर’ और भाजपा के ‘चाणक्य’ के नाम से मशहूर भाजपा राष्टï्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी कुशल रणनीति से भाजपा को आज एक चमकता सितारा बना दिया है। कहते हैं कि राजनीति में टाइमिंग जबरदस्त होनी चाहिए। जब टाइमिंग सही होती है तो अभेद्य किले को भी आसानी से भेदा जा सकता है। शाह-मोदी की युगलबंदी ने पहले दिल्ली की तख्त पर कब्जा जमाया और फिर राज्यों में भगवा फहराया। जो काम पिछले 33 सालों में बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व नहीं कर सका वो काम अमित शाह ने तीन साल में कर दिया। शाह के नेतृत्व में बीजेपी नित नये इतिहास रच रही है। चाहे लोकसभा में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना हो या उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करना हो।

2014 से पहले तक अमित शाह की गिनती नरेन्द्र मोदी के करीबी के तौर पर होती थी। उनका राजनीतिक क्षेत्र भी गुजरात तक ही सीमित था। शाह का रूझान राजनीति में शुरु से रहा लेकिन किसी पद की चाह उन्हें कभी नहीं रही। वह संगठन को ही मजबूत करने में लगे रहे। गुजरात में नरेन्द्र मोदी तीन बार मुख्यमंत्री बने और उसमें भी शाह का अहम योगदान रहा। 1995 में पहली बार बीजेपी की सरकार गुजरात में बनी और केशुभाई मुख्यमंत्री बनाये गए। अक्टूबर 2001 में बीजेपी ने केशुभाई पटेल को हटाकर नरेंद्र मोदी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया। साल 2002 में जब गुजरात में विधानसभा चुनाव हुए तो अमित शाह ने अहमदाबाद के सरखेज सीट से चुनाव लड़ा और उन्हें इसमें बड़ी जीत हासिल हुई। साल 2007 में फिर उन्होंने सरखेज से चुनाव लड़ा और फिर एक बड़ी जीत हासिल हुई। इस बार वह गुजरात सरकार में गृहमंत्री बने और साथ में संगठन के विस्तार के लिए भी काम करते रहे।

मोदी-शाह की युगलबंदी ने किया कमाल
साल 1982 में अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शाह की पहली मुलाकात आरएसएस की वजह से हुई थी। मोदी उस समय आरएसएस के प्रचारक थे और शहर में आरएसएस की युवा गतिविधियों के कर्ता-धर्ता थे। अमित शाह वर्ष 1983 में एबीवीपी के स्टूडेंट विंग के लीडर बने। इसके बाद साल 1986 में वह बीजेपी का हिस्सा बने। इसके एक वर्ष बाद ही पीएम मोदी बीजेपी में शामिल हुए थे। साल 1987 में वह बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ता बने और उसके बाद उन्हें संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां दी गईं। वह लगातार संगठन को धार देने में लगे रहे। उनकी मेहनत भी रंग लायी। शाह ने साल 1991 में लोकसभा चुनावों के दौरान वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के लिए गांधी नगर में प्रचार किया। साल 1995 में गुजरात में पहली बार बीजेपी ने सरकार बनाई और केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया। उस समय कांग्रेस, बीजेपी की मुख्य प्रतिद्वंदी थी और काफी प्रभावी पार्टी थी। मोदी और शाह ने साथ में मिलकर काम किया और ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस की पकड़ को कमजोर बनाया। दोनों ने मिलकर करीब 8,000 ऐसे प्रभावी नेताओं का एक नेटवर्क तैयार किया जो प्रधानी का चुनाव हार चुके थे। साल 2001 में अमित शाह के राजनीतिक कॅरियर ने करवट ली। अक्टूबर 2001 में बीजेपी ने केशुभाई पटेल को हटाकर नरेंद्र मोदी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद मोदी और शाह की जोड़ी और करीब हो गई और दोनों ने धीरे-धीरे अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को किनारे कर दिया।

2014 में बने बीजेपी के अध्यक्ष
साल 2014 में लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिली पूर्ण बहुमत के बाद से अमित शाह की राजनीतिक और कूटनीति समझ के सभी कायल हो गए। 2014 लोकसभा चुनाव में अमित शाह भाजपा के राष्टï्रीय महासचिव थे, उन्हें उत्तर प्रदेश की कमान दी गई थी। उत्तर प्रदेश के प्रभारी के रूप में एनडीए को 73 सीटें जितवाने वाले अमित शाह को पीएम नरेंद्र मोदी ने पूरे चुनाव के लिए ‘मैन ऑफ द मैच’ घोषित किया था। इसके बाद अमित शाह को बीजेपी का राष्टï्रीय अध्यक्ष बनाया गया। बतौर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी को कई नए मुकाम तक पहुंचाया। अमित शाह के अध्यक्ष पद संभालते ही झारखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र में बीजेपी और सहयोगी दलों को जीत मिली और सरकारें बनी। वहीं गोवा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में बहुमत न होने के बावजूद कुछ राजनीतिक गुणाभाग से बीजेपी को सत्ता मिली। शाह की रणनीति का ही नतीजा था कि पूर्वोत्तर में पहली बार असम में सर्बानंद सोनोवाल की अगुवाई में बीजेपी की बहुमत वाली सरकार बनी। और तो और जम्मू कश्मीर में विचारधारा के लेवल पर बिल्कुल उलट पीडीपी के साथ बीजेपी की गठबंधन की सरकार बनी, जो अब तक चल रही है। बिहार और दिल्ली में मिली हार मोदी-शाह की जोड़ी के यश को कम कर रही थी लेकिन शाह-मोदी की जोड़ी ने वक्त बदलने का इंतजार किया और अब बिहार में भी बीजेपी सत्ता में आ गई। नीतीश कुमार को अपने पाले में करके बिहार में एनडीए की सरकार बनवाई। अमित शाह की एक सबसे बड़ी उपलब्धि है कि बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन गई हैं। बीजेपी ने 11 करोड़ सदस्य जोड़े हैं। फिलहाल भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का 9 अगस्त को पार्टी प्रमुख के रूप में तीन साल हो गए। दिलचस्प यह है कि इस खास मौके पर उनके गृह राज्य गुजरात के विधायकों ने उन्हें राज्यसभा में भेजकर विशेष तोहफा दिया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि वह कोई मंत्रालय देख सकते हैं लेकिन अमित शाह इससे इनकार कर चुके हैं। अब देखना होगा कि अमित शाह अपने लक्ष्य ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ को पाने के लिए संगठन को धार देंगे या कोई मंत्रालय संभालते हैं।

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