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आखिर अब तक कौन बचा रहा था बलात्कारी बाबा को ?

बलात्कारी बाबा राम रहीम को सीबीआई कोर्ट द्वारा 20 साल की सजा मिलने के बाद सवाल उठने लगा है कि आखिर अब तक बाबा को कौन बचा रहा था? ऐसा भी नहीं है कि बाबा के करतूतों के बारे में किसी को जानकारी नहीं थी, तो क्या फिर बाबा अपने रसूख की वजह से अब तक बचता आ रहा था? बाबा का रसूख भारत सहित दुनिया के कई देशों में है। सत्ता के गलियारों में बाबा की धमक जगजाहिर है। राजनीतिक दलों के तमाम नेता बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते थकते नहीं थे। सवाल उठता है कि क्या गुरमीत को अब तक माननीय बचा रहे थे? जिस मामले में बाबा को सजा मिली है उसमें वर्ष 2002 में एफआईआर दर्ज हुई थी। फैसला आने में 15 साल का वक्त लग गया। मीडिया रिपोट्र्स की माने तो बाबा को बचाने के लिए सीबीआई अफसरों पर बड़े नेताओ से लेकर अधिकारियों तक का दबाव था। फिलहाल बलात्कारी बाबा सलाखों के पीछे पहुंच चुका है। बाबा को सजा मिलने के बाद से एक बात साफ हो गई है कि कोई कितना बड़ा रसूखदार क्यों न हो, देश के कानून से बच नहीं सकता।

बाबा राम रहीम का विवादों से शुरु से नाता रहा है। यदि यह कहें कि दोनों का चोली दामन का साथ है तो गलत नहीं होगा। फर्श से अर्श पर गुरमीत कैसे पहुंचा और कैसे अरबों का अंपायर खड़ा किया, यह शुरु से विवादों में रहा है। अकूत संपत्ति के मालिक राम रहीम के भारत के साथ-साथ विदेशों में भी लाखों की संख्या में अनुयायी है। एक कहावत है कि ईश्वर की लाठी में आवाज नहीं होती। जब पड़ती है तो जोर की पड़ती है। ऐसा ही कुछ राम रहीम के साथ हुआ। अकूत दौलत के घमंड में वह लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाता रहा। जिसने उसके कुकर्म का विरोध किया उसे धमकी देकर चुप करा दिया। उसे अंदाजा नहीं था कि एक चि_ïी उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने का कारण बनेगी। दरअसल हरियाणा के कुरुक्षेत्र इलाके में 15 साल पहले एक सुबह अचानक लोगों को एक गुमनाम चि_ी मिलती है। उस चि_ी में लिखा था कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा राम रहीम ने अपने डेरे में कई साध्वियों के साथ बलात्कार किया है और चिठ्ठी लिखने वाली उन साध्वियों में से एक है। चि_ी में उस साध्वी ने अपने नाम की जगह नीचे बस इतना लिखा था, एक दुखी अबला। बस इस एक गुमनाम चि_ी के सहारे आगे जो कुछ होता है वो वाकई किसी भी इंसाफ पसंद देश के लिए एक मिसाल है। बाबा राम रहीम बलात्कार के इल्जाम में दोषी करार दिए जाने के बाद बेशक जेल पहुंच गया, मगर उनके खिलाफ ये इकलौता मामला नहीं है। अभी और भी ऐसे मामले हैं जिनका फैसला जल्द आने वाला है और जो परेशान बाबा की परेशानी और भी बढ़ा सकते हैं। इनमें कत्ल से लेकर गुमशुदगी और सैकड़ों लोगों को नपुसंक बनाने के कई मामलों की अदालत में सुनवाई चल रही है। कुछ मामलों में तो चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है।
बाबा राम रहीम को सलाखों तक पहुंचाना सीबीआई के लिए आसान नहीं रहा है। आज भले पूरा देश सीबीआई और जज पर गर्व कर रहा है, लेकिन सीबीआई के अधिकारियों के लिए इस केस को मंजिल तक पहुंचाने में नाको चने चबाने पड़े थे। एक रिटायर्ड सीबीआई अधिकारी ने खुलासा किया है कि 2002 के बाद से उस पर डिपार्टमेंट के बड़े अधिकारियों समेत कई लोगों से गुरमीत राम रहीम के खिलाफ केस को गिराने का दबाव पड़ा था। इसके साथ ही राम रहीम के खिलाफ बलात्कार का मामला साबित करने के लिए सीबीआई के सामने बीते 15 साल के दौरान कई कड़ी चुनौतियां थीं जिसका खुलासा सीबीआई के रिटायर्ड अधिकारी ने दी। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ सीबीआई जांच टीम का नेतृत्व कर चुके ज्वाइंट डायरेक्टर मुलिंजा नारायणन ने राम रहीम को सजा दिए जाने के बाद राहत की सांस ली। मुलिंजा ने बताया कि राम रहीम के खिलाफ जांच में 15 साल के दौरान कई बार हार और जीत का सामना करना पड़ा, लेकिन अंत में राम रहीम को सजा मिलने से साफ है कि देश में कानून से बड़ा कोई नहीं है। गौरतलब है कि सितंबर 2002 में जब दिल्ली और हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच सौंपी उस वक्त मुलिंजा नारायणन दिल्ली में बतौर डीआईजी (स्पेशल क्राइम) तैनात थे। मुलिंजा ने बताया कि 12 दिसंबर 2002 को सीबीआई द्वारा केस रजिस्टर करने के फौरन बाद उन्हें सीबीआई के एक सीनियर अधिकारी ने राम रहीम के खिलाफ केस को तुरंत बंद करने और किसी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेने का फरमान सुनाया। हालांकि इस सीनियर अधिकारी की सलाह को नकारते हुए नारायणन ने मामले को और गंभीरता से लिया और राम रहीम से जुड़े कई पहलुओं को खंगाला। इसके बाद भी कई सीनियर अधिकारी और नेता लगातार सीबीआई ऑफिस पहुंचकर मामलों को बंद करने का दबाव डालते रहे, लेकिन कोर्ट की निगरानी के चलते राम रहीम के खिलाफ जांच अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंची और सीबीआई राम रहीम को आरोपी साबित करने में सफल हुई। ऐसा ही एक खुलासा बाबा राम रहीम की बेटी हनी प्रीत इंसा ने पिछले दिनों किया। एक अखबार से खास बातचीत में उसने कहा कि बीजेपी ने चुनाव जीतने के बाद डेरा प्रमुख के खिलाफ सारे केस खत्म करने का वादा किया था। हनी प्रीत के मुताबिक बीजेपी ने उन्हें धोखा दिया है। उसके मुताबिक 2014 में चुनाव से पहले बीजेपी के कुछ शीर्ष नेताओं ने राम रहीम के साथ इस तरह की डील की थी। डील में तय हुआ था कि राम रहीम अपने समर्थकों से बीजेपी के पक्ष में वोट डालने की अपील करेंगे। हनी प्रीत ने बहुत सारे खुलासे किए है। जाहिर है इनमें कुछ तो सच्चाई होगी। राजनीति में वोट के खातिर कितने बड़े-बड़े समझौते होते हैं, यह किसी से छिपा नहीं है।

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