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रफ्तार की रेस में शामिल हुआ भारत

संजय शर्मा

सब कुछ सही तरीके से हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब भारत के लोग बुलेट ट्रेन में सफर करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन की नींव रखी तो पूरे देश में खुशी का माहौल दिखा। भारत के लिए बुलेट ट्रेन सपना सरीखा था, लेकिन इस सपने को हकीकत में बदलने का काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। उन्होंने चुनावों में वादा किया था कि वह सत्ता में आते हैं तो देश में बुलेट ट्रेन चलायेंगे। उन्होंने अपने वादे को पूरा किया। भारत भी अगले पांच साल बाद यूरोप के उन देशों की श्रेणी में खड़ा होगा जहां बुलेट ट्रेन चलती है। फिलहाल एक बात तो तय है कि भारत में बुलेट ट्रेन का जब भी जिक्र होगा दो बातों की चर्चा जरूर होगी। पहला भारत में बुलेट ट्रेन चलाने के लिए पीएम मोदी को याद किया जायेगा तो दूसरा पीएम मोदी और जापानी पीएम शिंजो आबे की दोस्ती को।

मेट्रो नेटवर्क के बाद बुलेट ट्रेन देश में सबसे अहम रेल प्रोजेक्ट है। सही समय पर बुलेट ट्रेन का काम हुआ तो 15 अगस्त 2022 को मुंबई-अहमदाबाद ट्रेन दौडऩे लगेगी। बुलेट ट्रेन पीएम मोदी का सपना है। उन्होंने अपने इस सपने से देशवासियों को जोड़ा। भारत के लिए बुलेट ट्रेन सपने सरीखा था लेकिन मोदी ने लोगों को यकीन दिलाया कि भारत में भी बुलेट ट्रेन चल सकता है। मोदी कई बार कह चुके हैं कि बुलेट ट्रेन की रफ्तार देश में रोजगार के साथ व्यापार भी लायेगी। फिलहाल देश का युवा वर्ग इससे खासा खुश है। बुलेट ट्रेन की रफ्तार सभी को आकर्षित करती है। हर देश की चाहत होती है कि उसके यहां बुलेट ट्रेन चले। भारत के लिए भी बुलेट ट्रेन सपने सरीखा था। लोगों के जेहन में दूर-दूर तक यह बात नहीं आती थी कि भारत में बुलेट ट्रेन चलेगा, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा कर दिखाया। जापान के सहयोग से भारत अपने इस सपने को साकार करने जा रहा है। इस पर 1 लाख 8 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें कुल खर्च का 81 प्रतिशत जापान आसान कर्ज के तौर पर मुहैया करा रहा है जिस पर सिर्फ 0.1 फीसदी के दर से ब्याज देना होगा। पहले 15 साल तक भारत सरकार को कोई किश्त नहीं देनी होगी और 50 साल में भारत को ये कर्ज जापानी मुद्रा येन में चुकाना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री के साथ इसकी आधारशिला रखने के बाद कहा कि अगर कोई ये कहे कि बिना ब्याज के ही लोन ले लो और दस-बीस नहीं, 50 साल में चुकाओ, तो आप यकीन करेंगे क्या? हम देश के फ्यूचर प्रूफिंग पर ध्यान दे रहे हैं ताकि आने वाली पीढिय़ों के हिसाब से इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा सके। पीएम मोदी ने कहा, ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर? रेलवे को फायदा होगा, तकनीशियन, निर्माताओं को लाभ मिलेगा और एक तरह से पूरा रेलवे नेटवर्क लाभान्वित होगा। मैं मानता हूं कि टेक्नोलॉजी सभी के लिए है। टेक्नोलॉजी का लाभ तभी है जब देश का सामान्य नागरिक भी इसका उपयोग कर सके।  भारत की पहली बुलेट ट्रेन की स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी। अहमदाबाद से मुंबई पहुंचने में इसे महज दो घंटे लगेंगे। मौजूदा समय में अहमदाबाद से मुंबई पहुंचने के लिए 7 से 8 घंटे का समय लगता है। भारत में बुलेट ट्रेन लगाने में जापान की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। जापान में बुलेट ट्रेन को ‘शिंकासेन’ नाम से जाना जाता है। इस ट्रेन के बारे में फेमस है कि यह आज तक 60 सेकंड से भी ज्यादा लेट नहीं हुई है। ऐसे में संभव है कि भारत की बुलेट ट्रेन भी पंक्चुुअल होगी। इसके अलावा सबसे बड़ी उम्मीद है कि भारत में बुलेट ट्रेन रोजगार लेकर आयेगी। ऐसा प्रधानमंत्री भी कह चुके हैं। दरअसल जापान में जब 60 के दशक में बुलेट ट्रेन की शुरुआत हुई थी, तो इसने यहां रोजगार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। ट्रैक मेंटीनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट मिला। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि भारत में भी बुलेट ट्रेन रोजगार बढ़ाने में मदद कर सकती है।  हाई स्पीड रेल या कहें बुलेट ट्रेन ज्यादातर यूरोपीय देशों में दौड़ रही है। ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, पोलैंड, पुर्तगाल, रूस, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्वीडन, ताइवान, तुर्की, ब्रिटेन, अमेरिका और उजबेकिस्तान में बुलेट ट्रेनें दौड़ रही हैं। केवल यूरोप में ही बुलेट ट्रेन देश की सीमाओं से पार जाती हैं। दुनिया में 1964 में पहली बार बुलेट ट्रेन धरती पर दौड़ी थी। सबसे पहले जापान ने बुलेट ट्रेन को दौड़ाया और लोगों के प्रयोग में लेकर आई। बुलेट ट्रेन की अमूमन स्पीड 250 किलोमीटर प्रतिघंटा तक हो सकती है और अक्सर इसे 200 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से दौड़ाया जाता है। खास बात है कि भारत का पड़ोसी देश चीन दुनिया में बुलेट ट्रेन का जाल बिछाने में सबसे आगे है। दिसबंर 2016 तक चीन ने 22000 किलोमीटर तक की दूरी के लिए बुलेट ट्रेन का जाल बिछा लिया था। ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के सिलसिले में सबसे आगे जर्मनी हुआ करता था। 23 अक्टूबर 1903 को जर्मनी ने 206.7 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से ट्रेन दौड़ाई थी। 1955 से अब तक के रिकॉर्ड के अनुसार फ्रांस ने सबसे तेज रफ्तार से बुलेट ट्रेन को दौड़ाने का रिकॉर्ड बनाया है। 2007 में फ्रांस ने 574.8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन दौड़ाई थी। 21 अप्रैल 2015 में नॉन पैसेंजर ट्रेन को 603 किलोमीटर प्रतिघंटा के रफ्तार से दौड़ाया गया है। 

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