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…तो क्या अपनों के निशाने पर हैं मोदी सरकार

पिछले दिनों भाजपा के वरिष्ठï नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के एक लेख और उनके इंटरव्यू ने भाजपा और आरएसएस की चिंता बढ़ा दी है। भले ही यह मामला अभी शांत दिख रहा हो लेकिन पार्टी के भीतरखाने में विद्रोह की चिंगारी उठनी शुरु हो गई है। सार्वजनिक मंच से भले ही कोई कुछ कहने की हिमत नहीं जुटा पा रहा हो लेकिन देश की जीडीपी ने सबकी चिंता बढ़ा दी है। चिंता बढऩा स्वाभाविक है क्योंकि काई राज्यों में विधान सभा चुनाव होना है तो 2019 में लोकसभा। ऐसे में जब पार्टी के लोग ही सरकार की साख पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करेंगे तो विपक्ष को तो बैठे बिठाए मुद्दा मिलना ही है। यशवंत  सिन्हा ने भी अपने इंटरव्यू में कहा था कि पार्टी के नेता डरते है इसलिए नहीं बोल रहे हैं, सभी चिंतित हैं। बैकफुट पर आयी भाजपा ने भले ही यशवंत को चुप कराने के लिए उनके बेटे को खड़ा कर दिया लेकिन भाजपा के ही शत्रुघ्न सिन्हा के समर्थन में खड़े होने से मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। और तो और भाजपा के वरिष्ठï नेता अरुण शौरी ने भी नोटबंदी एक बहुत बड़ी मनी लांड्रिंग स्कीम बताया है। जाहिर है एक तरफ मोदी और उनके मंत्री नोटबंदी और जीएसटी को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहे है तो वहीं उनकी ही पार्टी के वरिष्ठï नेता वित्त मंत्री अरूण जेटली के कामकाज पर प्रश्न खड़ा कर रहे है.

गिरती जीडीपी की वजह से केन्द्र सरकार पर चौतरफा हमला हो रहा हैै। अभी तक हमला विपक्षी दल कर रहे थे लेकिन अब भाजपा के नेता भी विरोध कर रहे हैं। फरवरी माह में देश के चार राज्यों में भाजपा की जीत की वजह जो नोटबंदी बतायी गयी थी आज वही नोटबंदी केन्द्र सरकार के गले की हड्डïी बनती दिख रही है। गिरती जीडीपी की वजह नोटबंदी मानी जा रही है। पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और वर्तमान गर्वनर उर्जित पटेल के बयान के बाद से मोदी के नोटबंदी के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दल हाय तौबा मचा ही रहे थे कि यशवंत सिन्हा के लेख और उनके इंटरव्यू ने आग में घी डालने का काम किया। सिन्हा को शांत कराने में बीजेपी लगी ही थी कि शत्रुघ्न सिन्हा और शिवसेना ने यशवंत का समर्थन कर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी। रही सही कसर पत्रकार से राजनेता बने अरूण शौरी ने पूरी कर दी। उन्होंने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा और कहा कि नोटबंदी एक बहुत बड़ी मनी लांड्रिंग स्कैम थी, जिसे सरकार द्वारा काले धन को सफेद करने के लिए लागू किया गया था। शौरी के अनुसार आरबीआई गवर्नर ने अपने एक बयान में कहा था कि नोटबंदी के कारण 99 प्रतिशत बैन लगे हुए नोट वापस आए हैं जबकि यह कहा जा रहा था कि नोटबंदी के कदम से टैक्स और काला धन वापस आएगा जो कि वापस नहीं आया है। अरुण शौरी ने जीएसटी को लेकर भी बीजेपी सरकार को घेरते हुए कहा कि देश इस समय आर्थिक संकट से परेशान है और वहीं जीएसटी को बहुत ही गलत समय पर लागू किया गया है जो कि एक नासमझी वाला कदम था। इसके नियमों में तीन महीनों में सात बार संशोधन किया गया था। शौरी ने कहा कि कल्पना कीजिए कि टैक्स सुधार की तुलना भारत की स्वतंत्रता से की जा रही है। इसके बाद शौरी ने कहा कि आर्थिक व्यवस्था गड़बड़ा गई है जिसे सुधारा नहीं जा सकता भले ही सरकार 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले सब ठीक करने का दावा क्यों न कर रही हो। यशवंत और शौरी के निशाने से भाजपा में हडक़ंप मचना स्वाभाविक है। जिस तरह से बीजेपी नेता ही सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं उससे सरकार की साख पर सवाल उठना लाजिमी है। डूबती अर्थव्यवस्था को लेकर कई भाजपा नेता लगातार वित्त मंत्री पर हमला कर रहे हैं, लेकिन जिन आर्थिक फैसलों से यह स्थिति आई है, उन्हें लेने में प्रधानमंत्री की भूमिका पर एक चुप्पी छाई हुई है। सीधे तौर पर प्रधानमंत्री का कोई नाम नहीं ले रहा है।  इस बार गौर करने वाली बात है कि पिछली बार जब यशवंत सिन्हा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था, तब वो हमला सीधे मोदी पर था। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव के बाद यशवंत सिन्हा ने मोदी का नाम लिए बिना कहा था कि अगले चुनाव में ‘जनता उन्हें धूल चटा देगी।’ ये बात दूसरी है कि इस बात का असर अगर किसी पर पड़ा तो वे थे सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा। जयंत से वित्त राज्यमंत्री की जिम्मेदारी लेकर उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय भेज दिया गया। इस बार सीनियर सिन्हा थोड़े सतर्क थे। उन्होंने मोदी का नाम तक नहीं लिया। उन्होंने सिर्फ जेटली को ही इसका जिम्मेदार बताया। एक बात तो तय है कि जेटली का विरोध हो या मोदी का, सरकार की साख पर ही बट्टïा लग रहा है। एक बात जग जाहिर है, भाजपा मतलब मोदी और शाह। सरकार से लेकर पार्टी तक में उनके ही फैसले माने जाते है। ऐसे में नोटबंदी का फैसला हो या जीएसटी का, फैसला तो पीएम मोदी का ही है। शायद इसीलिए पीएम मोदी की भी प्रतिष्ठïा प्रभावित हो रही है। यदि पीएम मोदी की प्रतिष्ठïा प्रभावित होती है तो निश्चित ही इसका असर विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पड़ेगा। 2014 लोकसभा और कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में जीत के सूत्रधार पीएम मोदी ही रहे हैं। 2019 में लोकसभा चुनाव होना है। इतने कम समय में सरकार कैसे सब ठीक करती है देखना दिलचस्प होगा। 

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