You Are Here: Home » नौकरशाही » ऐसा विपक्ष मिले तो हर सरकार की मौज

ऐसा विपक्ष मिले तो हर सरकार की मौज

लिहाफ ओढ़े सोई है मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस

सत्ता पर हमला करने में सुस्ती

देहरादून। कांग्रेस उत्तराखंड में ऐसे विपक्ष की भूमिका में दिख रही है, जिसके कमांडर लिहाफ ओढक़र वातानुकूलित कमरों में सोये पड़े हैं। उनको न अपने भविष्य की चिंता दिख रही न सत्ता पक्ष के आराम में खलल डालने को ही वे राजी दिखते हैं। उनको देख कर लगता है कि वे विरोधी तो हैं लेकिन सडक़ों पर लगातार उतरना और सरकार के मामलों को तलाश कर उस पर हमले करना उसके बूते से बाहर है। पार्टी आपसी झगड़ों और महत्वाकांक्षाओं की लड़ाई से ऊपर नहीं उठ पा रही है और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार मौज कर रही है। अभी तक कांग्रेस एक बार भी उसके लिए छह महीने में कोई संकट खड़ा करने में कामयाब नहीं हो पाई है।
ऐसा नहीं है कि सरकार बहुत बढिय़ा चल रही है और उसको घेरने के लिए मुद्दे हैं ही नहीं। भले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने त्रिवेंद्र सरकार की भूरी-भूरी तारीफ की लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों की तरह यह सरकार भी कमियों और खामियों से सज्जित है। कोई भी सरकार सर्वगुण संपन्न नहीं हो सकती और विपक्ष मुद्दाविहीन नहीं हो सकता है। सिर्फ सोच और कोशिशों का सवाल है। सिर्फ कभी कभार एकाध प्रेस कांफ्रेंस कर देने भर को विपक्ष की तरफ से सरकार को हिला और झकझोर डालने की कोशिश नहीं कही जा सकती है। प्रदेश में नौकरशाही बुरी तरह हावी है। विपक्ष तो दूर खुद सत्तारूढ़ बीजेपी के विधायक और राजनेता तक रो रहे हैं कि अफसर बेलगाम हो गए हैं। मनमानी कर रहे हैं। मंत्रियों तक की कदर नहीं हो रही है।
उधमसिंह नगर में राष्ट्रीय राजमार्ग-74 के निर्माण के लिए हुए जमीनों के अधिग्रहण के दौरान खूब घोटाले हुए और इसको खुद कांग्रेस भी स्वीकार करती है। यह बहुत बड़ी बात इसलिए है कि घोटाला कांग्रेस के वक्त का है, लेकिन पार्टी में बड़ा धड़ा इस बात के हक में है कि सरकार को घेरने के लिए यह बड़ा मौका है। जिन लोगों के नाम कांग्रेस सरकार के दौरान घोटाले में उछले थे, वे अब बीजेपी में हैं। बीजेपी सीबीआई जांच नहीं होने दे रही है तो इसके पीछे राज्य के नेताओं के साथ ही केंद्र के एक बड़े मंत्री का नाम भी इसमें आने की आशंका को माना जा रहा है। मीडिया में यह मुद्दा छाया हुआ है लेकिन कांग्रेस है कि प्रेस कांफ्रेंस से काम चला रही है। सामान्य शिक्षक मृत्युंजय कुमार मिश्र को एक के बाद एक मलाईदार और आईएएस कैडर तक की कुर्सी पर बिठाये जाने को कांग्रेस मुद्दा नहीं बना पा रही है। सत्ता की नाकामी बहुत बड़ा मुद्दा हो चुका है। सरकार के मंत्री आपस में समर्थकों के जरिये टकरा रहे हैं। हरिद्वार में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और मदन कौशिक तथा रूडक़ी में सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और विधायक प्रणव सिंह चैंपियन के समर्थक भी टकरा चुके हैं। देहरादून के मेयर और विधायक तो मुख्यमंत्री तक से सार्वजानिक तौर पर व्यवस्था को लेकर असंतोष और नाराजगी जता चुके हैं।कर्मचारियों में किसी न किसी मुद्दे को लेकर इतनी जल्दी सरकार के खिलाफ असंतोष चल रहा है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें बहुत से विभागों और निगमों में लागू नहीं हो पाई हैं। मंत्रियों के कई फरमान एकदम अव्यावहारिक साबित हो रहे हैं और सरकार उनको लागू नहीं करवा पा रही है।
विश्वविद्यालयों में कुलपतियों का अकाल छाया हुआ है। इसका नतीजा उच्च शिक्षा पर पड़ रहा है। इतना सब कुछ होने के बावजूद कांग्रेस मित्र विपक्ष बन कर बैठा हुआ है। ऐसा नहीं कि बीजेपी सरकार कांग्रेसियों को तवज्जो देती है, जैसा कि राज्य में एनडी तिवारी सरकार के दौरान बीजेपी के लोगों को खूब भाव दिया जाता था। बीजेपी वालों के काम भी जम कर होते थे। इसके चलते बीजेपी को मीडिया और बाकी लोगों ने मित्र विपक्ष का तमगा दे दिया था। कांग्रेस के लोगों को तो बीजेपी पूछ भी नहीं रही है। सिर्फ अपनी सुस्ती के कारण ही कांग्रेस इन दिनों बीजेपी को आराम से सरकार चलाने दे रही है। प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को आक्रामक तेवर वाला माना जाता है। वह मंत्री रहने के दौरान मुख्यमंत्री और नौकरशाहों से भिड़ते रहते थे। अब उनके तेवरों में पार्टी के लोग वही अंदाज देखना चाह रहे हैं। जब तक वह गरम नहीं होंगे तब तक बीजेपी सरकार शान्ति से सरकार अपने हिसाब से चलाती रहेगी।

 

All Rights Reserved to Weekand Times . Website Developed by Prabhat Media Creations.