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शिवपाल को साधकर कांटे से कांटा निकाल सकती है भाजपा

पुत्र मोह में फंसे मुलायम सिंह से मोहभंग हो चुका है शिवपाल और अमर सिंह का
तीन महीने बाद मुलायम के घर पहुंचकर अखिलेश ने दिए खास संकेत
सीधे भाजपा में जाने के बजाय जनता दल यू के जरिये भाजपा से जुड़ सकते हैं शिवपाल
यूपी में नई सरकार बनने के बाद भाजपा से मजबूत रिश्ते बनाए हुए हैं शिवपाल यादव

अरूण पाराशरी
लखनऊ। आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी की राजनीति में बड़ी गहमागहमी के आसार हैं। पार्टी में बड़े उलटफेर की संभावना बन रही हैं। शिवपाल और अमर सिंह का मुलायम से मोहभंग होता जा रहा है। मुलायम सिंह के पुत्र मोह में फंसे होने की बात अब धीरे-धीरे सार्वजनिक होती जा रही है। तीन महीने बाद पिता मुलायम सिंह के घर यकायक पहुंच कर अखिलेश यादव ने इसे और पुख्ता कर दिया है। अब यह बात आम हो चुकी है कि मुलायम सिंह लंबे समय से भाई शिवपाल यादव को झांसा दे रहे हैं। ऐसे में मुलायम सिंह और शिवपाल की दूरियां बढ़ती जा रही हैं। ऐसी स्थिति में शिवपाल अलग राजनीतिक राह पकड़ सकते हैं। जानकारों की मानें तो शिवपाल रास्ता चाहे जो भी पकड़ें लेकिन वह रास्ता अंतत: उन्हें भाजपा की ओर ही ले जाएगा। दशहरा और दीपावली के बीच इस संबंध में कोई भी राजनीतिक घटनाक्रम संभव है। राजनीतिक लोगों की नजरें इस ओर लगी हुई है।
एक समय में अमर सिंह और शिवपाल यादव सबसे बड़े मुलायमवादी कहलाते थे। शिवपाल तो मुलायम के सबसे प्रिय भाई हैं और पिछले दिनों ही मुलायम सिंह ने रामगोपाल को हटाकर उन्हें लोहिया ट्रस्ट का सचिव बनाया है। उधर, अमर सिंह कहते रहे हैं कि वे समाजवादी नहीं, मुलायमवादी हैं। मुलायम ने अपनी पार्टी के तमाम विरोध के बावजूद उनको राज्यसभा में भेजा था। इस सबके बावजूद इन दिनों दोनों का मुलायम सिंह से मोहभंग हो गया है। वजह अखिलेश यादव हैं। अमर सिंह और शिवपाल यादव ने मान लिया है कि मुलायम अपने बेटे अखिलेश के मोह में फंसे हैं और किसी हाल में उनको कमजोर करने वाली राजनीति के साथ नहीं रहेंगे। हालांकि सपा की पारिवारिक कलह की शुरुआत से ही यह कहा जाता रहा है कि इस झगड़े के जरिए मुलायम ने अखिलेश को मजबूत किया है और पूरी पार्टी मुलायम सिंह ने अपने बेटे को सौंप दी है।
दरअसल समाजवादी पार्टी में शिवपाल का अब कोई राजनीतिक अस्तित्व नहीं बचा है। ऐसे में शिवपाल के सामने मुलायम का विरोध करने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है। अब आने वाले दिनों में शिवपाल का अगला कदम क्या होगा यह तो साफ नहीं है किंतु यह तय है कि सपा में अब उनका रहना उनके राजनीतिक अस्तित्व के लिए हितकारी नहीं होगा। यूपी में समाजवादी पार्टी आज भले ही कमजोर हो किंतु आने वाले समय में भाजपा के लिए चुनौती सपा ही बनेगी। ऐसे में सपा को कमजोर करने की भाजपा की कोशिश रहेगी। भाजपा की सरकार बनने के बाद शिवपाल भी भाजपा से अपने रिश्ते मजबूत बनाए हुए हैंं। भाजपा सरकार ने रामगोपाल, डिंपल यादव, आजम खां सहित कई सपा नेताओं की सुरक्षा में जहां कटौती की वहीं शिवपाल यादव को जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की। जानकारों की मानें तो शिवपाल सीधे तौर पर भाजपा में न जाकर जनता दल यू के जरिये भाजपा के साथ जा सकते हैं। शिवपाल के लिए कुछ और विकल्प भी खुले हुए हैं। समाजवादी पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को इक_ा करने के लिए शिवपाल छोटे दलों के साथ मोर्चा बना सकते हैं।

शिवपाल के अरमानों पर फिरा पानी

इन चर्चाओं के बावजूद अमर सिंह और शिवपाल को उम्मीद थी कि समाजवादी पार्टी को तोडऩे में मुलायम सिंह उनकी मदद करेंगे, लेकिन मुलायम सिंह ऐसा नहीं चाहते। नई पार्टी बनाने के प्रस्ताव पर मुलायम सिंह पलटी मार गए हैं। शिवपाल को पहले ही उम्मीद थी कि मुलायम नई पार्टी बनाने की घोषणा नहीं करेंगे। इसीलिए मुलायम की पिछले दिनों हुई प्रेस कांफ्रेंस में शिवपाल नहीं पहुंचे। यद्यपि शिवपाल मुखर होकर इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहे किंतु अमर सिंह ने पहली बार खुलकर कहा कि मुलायम सिंह पुत्रमोह में फंसे हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के विंध्यवासिनी मंदिर पहुंचे अमर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खूब प्रशंसा की। उसके बाद उन्होंने मुलायम के पुत्रमोह की बात करते हुए ऐसे संकेत दिए कि अब वे मुलायमवादी नहीं रह गए हैं।

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