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बात करने से शादी बनेगी अफेयर-प्रूफ

रिसर्च से सिद्ध होता है कि पुरुष अपनी पत्नी को सेक्स के लिए और महिलाएं अपने पति को भावनाओं के लिए धोखा देती हैं, तो ये बातें महज एक रूढि़वादी सोच नहीं हैं।

शादी के बाद बेवफाई से बचना मुमकिन है? एक हालिया अध्ययन के मुताबिक 41 प्रतिशत कपल्स में पति या पत्नी में कोई न कोई या तो शारीरिक या भावनात्मक रूप से अपने साथी को धोखा देता है। इनमें से 41 प्रतिशत पुरूषों और 51 प्रतिशत महिलाओं ने स्वीकार किया कि उनके रिश्ते में कहीं न कहीं धोखा है।
अब जब शादी के बंधन में धोखा भी उतनी ही सामान्य बात हो गई है, जितना कि प्यार, तो शादी को अफेयर-प्रूफ बनाना जरूरी हो गया है। रिसर्च से सिद्ध होता है कि पुरुष अपनी पत्नी को सेक्स के लिए और महिलाएं अपने पति को भावनाओं के लिए धोखा देती हैं, तो ये बातें महज एक रूढि़वादी सोच नहीं हैं।
इसके बावजूद एक अच्छी खबर है। इनमें से ज्यादातर शादियां न केवल इस धोखेबाजी के बाद भी बच जाती हैं बल्कि इसके बाद पति-पत्नी का रिश्ता और भी मजबूत हो जाता है। इसके लिए उन बातों का ध्यान रखना और उन पर बात करना जरूरी है, जो आपको अपने साथी से दूर कर रही हैं। ग्लानि या फिर पकड़े जाने के डर के कारण आप और फंसते ही जाएंगे। हमेशा कुढ़ते रहने और अपने साथी पर शक करते रहने से बेहतर है कि आप इस समस्या की जड़ को समझें। जिन कारणों से आप या आपके साथी की एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में पडऩे की संभावना है, उस पर बात करें। पति-पत्नी शारीरिक संबंध पर भी बात करें। आप दोनों अब भी सेक्सुुअली आकर्षक हैं और दूसरों से आकर्षित भी होते हैं। इन भावनाओं के बारे में बात करने से रिश्ते में नाटकीय तरीके से नजदीकियां बढ़ जाती हैं।
इस बात को याद रखिए कि सीक्रेट्स बांटने से नजदीकियां बढ़ती हैं। जब आप एक-दूसरे को अपने सीक्रेट्स बताएंगे तो आपको एहसास होगा कि आप कुछ बेहद खास खो तो नहीं रहे हैं।

किसी खास शख्स की मौजूदगी जरूरी है
ऐसी ही हालत डाइबीटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के मामले में भी पाया गया है। हालांकि सेक्सुअली एक्टिव, एक-दूसरे से अलग रह रहे पति-पत्नी, तलाकशुदा लोगों के मामले में यह तस्वीर उतनी साफ नहीं है। इसके अलावा शोधकर्ताओं ने इस बात की भी जांच नहीं की है कि शादीशुदा लोग वाकई खुशहाल हैं या नहीं। उनका कहना है कि सिर्फ शादीशुदा होने की बजाए आपकी जिंदगी में किसी खास शख्स की मौजूदगी से भी फर्क पड़ता है।

पहली नजर में कुछ-कुछ नहीं होता तो डेमिसेक्सुुअल हैं आप

क्या आप अपने दोस्तों को बाहर किसी अजनबी के साथ रात बिताते देखकर सोचते हैं कि आप ऐसा नहीं कर सकते हैं? अगर आप ऐसा करते हैं तो आप डेमिसेक्सुअल हो सकते हैं। डेमिसेक्सुअल शब्द वैसे लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जिसके दिल में किसी को सिर्फ देखकर सेक्सुुअल आकर्षण नहीं पैदा होता है। ऐसे लोग पहले किसी से अच्छी तरह भावनात्मक रूप से जुडऩे के बाद ही कुछ-कुछ महसूस करते हैं। वैसे ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है।
2008 में इस शब्द का एक वेबसाइट पर पहली बार इस्तेमाल हुआ था। उसके बाद से यह शब्द लोकप्रिय होता चला गया क्योंकि ऐसे बहुत से लोगों की पहचान हुई जो इस तरह की सेक्सुुअलिटी रखते हैं। एक 23 वर्षीय महिला ने बताया कि किसी पुरुष को सिर्फ देखने भर से उसके अंदर आकर्षण पैदा नहीं होता। उन्होंने रेडिट पर अपने बारे में लिखा, जब मैं थोड़ी छोटी थी। मेरे दोस्त सिलेब्रिटीज के बारे में बात करते थे कि वह कितने हॉट हैं। मेरी समझ में नहीं आता था कि किसी व्यक्ति को अच्छी तरह जाने बगैर आप किसी की ओर आकर्षित क्यों हो जाते हैं।
बढ़ जाती है जान बचने की उम्मीद

ब्रिटेन में 10 लाख अडल्ट्स पर किए गए एक शोध के आधार पर शोधकर्ताओं ने बताया कि एक प्यार करने वाला पार्टनर आपको अपनी देखभाल बेहतर तरीके से करने को प्रेरित करता है। शोध करने वाले ऐस्टन मेडिकल स्कूल के डॉक्टर पॉल कार्टर और उनके सहकर्मियों ने बताया कि शादी से दिल का दौरा पडऩे पर जान बचने की उम्मीद बढ़ जाती है। ब्रिटिश कार्डियोवैस्क्यूलर सोसायटी के इस हालिया शोध में इसकी वजह भी बताई गई है।

साथी में पिता की छवि क्यों ढूंढती हैं लड़कियां?
बात जब साथी के चुनाव की होती है तो लडक़ा और लडक़ी ऐसे साथी की तलाश में होते हैं, जिनमें उन्हें अपने पैरेंट की झलक मिलती हो। यहां चेहरे की समानताओं की बात नहीं हो रही है। इससे अलग चाल-ढाल, व्यवहार, बातचीत का लहजा और सोच की बात हो रही है। ऐसे कई फैक्टर हैं जो पार्टनर चुनते वक्त आपको प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि लड़कियां ऐसे लडक़ों से शादी करना पसंद करती हैं, जिनमें उन्हें अपने पिता या भाई की छवि दिखती है। यह बात सिर्फ लड़कियों तक ही सीमित नहीं है। बल्कि समान रूप से लडक़ों पर भी लागू होती है।
शोध में सामने आया है कि लडक़े भी ऐसी ही लड़कियों की तरफ आकर्षित होते हैं जिनमें उन्हें अपनी मां के आचार-व्यवहार की झलक मिलती है। नोर्थमब्रिया यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने पाया कि किसी भी व्यक्ति की पसंद पर उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का गहरा असर होता है। यही बात उस वक्त भी लागू होती है जब वह अपने लिए साथी का चुनाव कर रहा/रही होता है। आप अपने परिवार में पैंरेंट्स में से जिसके ज्यादा करीब होते हैं उसकी ही झलक अपने पार्टनर में देखना पसंद करते हैं। नोर्थमब्रिया यूनिवर्सिटी के असोसिएट प्रोफेसर तमसिन सेक्सटन के अनुसार इसमें फैमिलिएरिटी फैक्टर काम करता है। साथ ही मूल्यांकन का रोल भी हो सकता है। हालांकि ज्यादार समुदायों में पारिवारिक रिश्तों में वैवाहिक संबंध नहीं जोड़ते हैं, इसका एक कारण जेनेटिक डिसऑर्डर का खतरा भी बताया जाता है। हालांकि कई जीन्स एक साथ बेहतर रिजल्ट भी देते हैं। ऐसे में एक पार्टनर जिसमें आपको परिवार के सदस्यों की झलक मिलती है उसकी पारिवारिक पृष्ठïभूमि से आपकी पुरानी पीढिय़ों का कोई पुराना लिंक हो सकता है।
आइसलैंड में 165 साल में हुई एक रिसर्च में वहां के जाने-माने जोड़ों पर किए गए एक सघन शोध में सामने आया कि जिनके सबसे अधिक ग्रैंडचिल्ड्रन थे, उन कपल के बीच तीसरी या चौथी पीढ़ी के कजिन्स का रिलेशन रहा है। ऐसे में विकास की दृष्टि से यह एक अच्छा संकेत भी है। इसी तरह भाई-बहन के फीचर्स के प्रति आकर्षण को भी समझा जा सकता है कि हाई फर्टिलिटी पॉप्युलेशन में भाई-बहनों के फीचर्स एक-दूसरे से काफी हद तक मिलते हैं। फीचर्स के प्रति आकर्षण को समझने के लिए सेक्सटन ने अपने कॉलीग्स के साथ मिलकर 56 महिलाओं को चुना और प्रत्येक को चार फोटो देकर उनमें से अपने पति जैसे फीचर वाले फोटो का चुनाव करने के लिए कहा गया। इन चार फोटो में एक फोटो उन महिलाओं के भाई की भी थी। रिजल्ट में सामने आया कि ज्यादार ने अपने भाई की फोटो चुनी। जिन केसेज़ में भाई और पार्टनर के फीचर्स में कोई मेल नहीं था, उन महिलाओं ने भी सही ऑप्शन का चुनाव किया।

रिश्तों में धोखा देने के मामले में युवा कपल्स से आगे हैं बुजुर्ग
एक्स्ट्रा-मैरिटल सेक्स के किस्से बढ़ते जा रहे हैं लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इसे बढ़ावा देने में युवा जेनरेशन का हाथ नहीं है। इंस्टिट्यूट फॉर फैमिली स्ट्डीज में प्रकाशित एक नई स्टडी के मुताबिक यूएस में अपने पार्टनर से बेवफाई करने के मामले में बुजुर्ग लोग युवाओं से कहीं आगे हैं।
अमेरिका में एक्स्ट्रा-मैरिटल सेक्स में न्यू जेनरेशन गैप नाम की इस रिसर्च के मुताबिक 55 साल से अधिक की उम्र वाले 20 प्रतिशत अमेरिकियों ने एक्सट्रा-मैरिटल सेक्स करने की बात को स्वीकार किया, तो वहीं 55 साल के कम उम्र के एक्स्ट्रा-मैरिटल सेक्स करने वालों की संख्या सिर्फ 14 प्रतिशत है। इसके पीछे की वजह यह हो सकती है कि 55 से अधिक उम्र के लोग लंबे समय से शादीशुदा रिश्ते में होते हैं इसलिए उनके पास पार्टनर से बेवफाई करने का ज्यादा टाइम होता है। इस रिसर्च में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि साल 2000 के बाद से 55 साल से अधिक उम्र के शादीशुदा लोगों के बीच अडल्टरी के मामले तेजी से बढ़े हैं जबकि 18 से 55 की उम्र के कपल्स के बीच अडल्टरी में कमी आयी है। यूनिवर्सिटी ऑफ यूटॉ के प्रोफेसर निकलस वोल्फिंगर जो इस रिसर्च के लीड ऑथर हैं के मुताबिक, यह स्टडी जेनरेशन में हुए बदलाव को दिखाता है और इस ओर भी इशारा करता है कि 55 साल से अधिक उम्र के लोग सेक्सुअल रेवलूशन के समय बड़े हुए थे। इसलिए यह जानना जरूरी है कि यह स्टडी सिर्फ रिलेशनशिप के अंदर मौजूद अडल्टरी पर नहीं बल्कि एक्स्ट्रा-मैरिटल सेक्स पर थी। हालांकि बहुसंख्यक लोगों ने एक्स्ट्रा-मैरिटल सेक्स को अस्वीकार किया। बावजूद इसके करीब 16 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे पिछले 30 सालों से अपने जीवनसाथी के साथ बेवफाई कर रहे थे। इसके बाद भी उन लोगों का रवैया बेहद कैजुअल था।

खाली टाइम में फेसबुक नहीं फ्लर्ट करें, जानें क्यों?
अगर आप हफ्ते भर की बोरियत दूर करने के लिए वीकेंड पर टीवी देखते हुए या फेसबुक पर अपना खाली समय बिताते हैं या फिर जाम का सहारा लेते हैं तो गलत है। वीकेंड इफेक्ट नाम की एक स्टडी में कैटरीना ऑन्सटैड ने लिखा है कि ऐसा करने से भले ही क्षणिक राहत तो मिल जाती है लेकिन इसका दूरगामी असर सही नहीं होता है। वह लिखती हैं, हम वीकेंड पर कैजुअल लेजर जैसे पीने, ऑनलाइन शॉपिंग या टीवी और फेसबुक पर समय बिताने को तरजीह देते हैं क्योंकि उनसे तुरंत संतुष्टि मिलती है। उनकी वजह से दिमाग डोपमीन नाम का हॉर्मोन रिलीज करता है जो क्षणिक आराम देता है। वह कहती हैं कि इसकी बजाए सीरियस लेजर की जरूरत है जिसका लॉन्ग टर्म असर पड़ता है। दूसरों के साथ समय बिताने का भी अच्छा असर पड़ता है। अगर आप किसी के साथ फ्लर्ट करते हैं या फिर अपना यह समय बच्चों को पढ़ाने पर खर्च करें तो इससे आप खुद को काफी असरदार और सक्षम महसूस करते हैं जिसका असर काफी समय तक रहेगा।
अगर आपका ब्वॉयफ्रैंड आपकी तरह मेच्योर नहीं है, तो…
गर आपका ब्वॉयफ्रैंड आपकी तरह मेच्योर नहीं है, तो एक अच्छी-खासी रिलेशनशिप खराब हो जाती है। यहां हम कुछ टिप्स बता रहे हैं, जिससे आप पहचान सकती हैं कि आपका ब्वॉयफ्रैंड मेच्योर है या नहीं:

कमिटमेंट करने से घबराता है
वह कोई भी कमिटमेंट से आना-कानी करता है। जब भी उससे मिलने के लिए कहती हैं, तो वह बहस करने लगता है, तो इससे साफ जाहिर है कि वह अपनी रिलेशनशिप को लेकर सीरियस नहीं है।

कभी गलती नहीं मानता
जब उसकी गलती होती है, तो वह दूसरों पर डाल देता है या अपनी गलती मानता नहीं है। अगर आप मैनेज करने की कोशिश करती हैं, तो वह आपसे भी लडऩे लगता है और सारी गलतियों के लिए आपको दोषी मानने लगता है।

जॉब फिक्स्ड नहीं है
ब्वॉयफ्रैंड की जॉब फिक्स नहीं है और आप हमेशा उसके लिए जॉब सर्च करती रहती हैं। वहीं, आपको लगता है कि वह हमेशा ऊंची जॉब पाने की बात करता रहता है।

सीरियस नहीं है
वह रिलेशनशिप को लेकर सीरियस नहीं है। जब भी आप उसे कुछ कहती हैं, तो वह आपके साथ रिश्ता तोडऩे की बात करता है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि वह आपके लिए पर्फेक्ट नहीं है।

आपको लेकर प्लानिंग नहीं
वह प्यार करने का दावा तो करता है, लेकिन वहीं वह आपके साथ अपनी कोई फ्यूचर प्लान भी नहीं कर रहा है। आपके साथ रहकर वह दूसरी लड़कियों के बारे में बातें करता है और आपकी किसी भी चीज के बारे में बातें नहीं करता है, तो इससे साफ जाहिर है कि वह आपको टेक इट ईजी ले रहा है और आप उसके लिए सिर्फ टाइमपास हैं।

सोशल मीडिया पर साथी की बेवफाई से अधिक दुखी होती हैं महिलाएं…
एक नई स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि फेसबुक या दूसरे सोशल मीडिया पर अपने रोमांटिक पार्टनर की बेवफाई से जुड़ी बातें पढक़र पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा जेलस फील करती हैं और दुखी हो जाती हैं। यह खुलासा हुआ है ब्रिटेन में कार्डिफ मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक रिसर्च में। इस सर्वेक्षण के दौरान इमोशनल इनफिडैलिटी यानी भावनात्मक बेवफाई का सोशल मीडिया पर खुलासा होने के बाद पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक दुखी नजर आईं।
वहीं, दूसरी ओर पुरुष सोशल मीडिया पर अपनी महिला साथी के संबंध में भावनात्मक बेवफाई से कहीं अधिक सेक्सुुअल इनफिडैलिटी यानी यौनिक बेवफाई का खुलासा होने पर दुखी होते हैं। इस स्टडी में यह बात भी सामने आयी है कि महिलाएं तब ज्यादा दुखी होती हैं, जब भावनात्मक बेवफाई वाला मेसेज उन्हें किसी विरोधी व्यक्ति से मिलता है जबकि पुरुषों के मामले में यह बिल्कुल उलटा है। पुरुष किसी विरोध व्यक्ति की अपेक्षा अपने ही साथी से मिलने वाले बेवफाई के संदेश से अधिक दुखी होते हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि, इन सबके बावजूद कुल मिलाकर सोशल मीडिया पर अपने साथी द्वारा बेवफाई का संदेश पाकर पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं अधिक दुखी होती हैं। यह शोध डिजिटल युग में ईष्र्या की मौजूदगी को रेखांकित करता है। इस शोध के लिए अध्ययनकर्ताओं ने 21 मेल और 23 फीमेल अंडरग्रैजुएट स्टूडेंट्स को चुना था और उन्हें फेसबुक पर काल्पनिक संदेश दिखाए जिसमें उनका पार्टनर उनसे इमोशनल या सेक्शुअल बेवफाई कर रहा था।
यह शोध इवोल्यूशनरी साइकोलॉजिकल साइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इस स्टडी के जरिए इस बात पर भी जोर दिया गया कि पार्टनर हकीकत में बेवफाई कर रहा हो या उसके ऐसा करने का शक हो जिसकी वजह से सेक्सुुअल या इमोशनल जेलसी होती है, इसे अक्सर घरेलू हिंसा और बुरे बर्ताव का कारण माना जाता है।

ब्रेकअप के बाद पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाते हैं लोग
इस बात को कोई नहीं झुठला सकता है कि ब्रेकअप के बाद एक इंसान पूरी तरह से टूट जाता है। खासतौर पर तब जब आपने उसी रिश्ते के इर्द-गिर्द अपनी दुनिया बसा ली हो और आप इस पल के लिए तैयार न हों।
जिंदगी एक ऐसा संघर्ष लगने लगती है जो कभी खत्म होती नहीं दिखती। उस समय कुछ भी नहीं सूझता क्योंकि जिसके साथ आपने भविष्य के सपने सजाए होते हैं वो आपको छोडक़र जा चुका होता है।
इन सारी बातों के बाद जो एक बात याद रखने के लिए है वो यह कि जो होता है अच्छे के लिए होता है। चीजें आगे किस तरह बढ़ेंगी यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप आज की परिस्थितियों को कैसे देखते हैं। हर किसी के लिए यह समय अलग होता है। उससे उबरने में उसे समय लगता है।
इन सबके बावजूद सिर्फ एक बात जो आपको याद रखनी है वो यह कि एक बार अगर आप इस दर्द से उबर गए तो सब ठीक होगा और आप कहीं ज्यादा मजबूत इंसान बनकर सामने आएंगे।

ब्रेकअप के बाद आपको यह समझ आ जाएगा कि असलियत क्या है। आप चीजों को प्रैक्टिकल तरीके से लेना शुरू कर देंगे और भविष्य में चीजों को बेहतर तरीके से संभाल पाएंगे।
ब्रेकअप के बाद आप भावनात्मक रूप से कहीं अधिक मजबूत हो जाएंगे।
आपको यह समझ आ जाएगा कि कुछ भी स्थायी नहीं होता है और उतार-चढ़ाव जिंदगी का हिस्सा है।
आप अपने लिए और सही के लिए लडऩा सीख जाएंगे।

एक साल में 30 बार इंतजार करवाना बनती है झगड़े की वजह
आप जानते हैं कि एक साल में कम से कम 30 बार तो आप अपने पार्टनर से लड़ाई सिर्फ इसलिए करते हैं क्योंकि उसकी वजह से आपको इंतजार करना पड़ा। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि एक सर्वे में यह बात सामने आई है। रोजाना लाखों लोगों के झगड़े सिर्फ इस वजह से होते हैं क्योंकि वह अपने स्वभाव और चीजों को लेकर काफी अव्यवस्थित होते हैं और ज्यादातर काम को लास्ट मिनट पर करते हैं या फिर ऐसे ही अधूरा छोड़ देते हैं।
इस सर्वे में यह पाया गया है कि ज्यादातर महिलाएं लेट-लतीफ होती हैं। चाहे बात अपॉइंटमेंट की हो, दोस्त से मिलने की या फिर किसी की शादी में ही क्यों न जाना हो, महिलाएं अक्सर देर करती हैं। सर्वे के मुताबिक छुट्टियों के नाम पर एक तरफ जहां महिलाएं हफ्तेभर पहले से ही तैयारियां करने लगती हैं, वहीं पुरुष आखिरी मिनट पर पैकिंग शुरू करते हैं। 2000 लोगों पर किए गए इस सर्वे में 55 फीसदी पुरुषों की तुलना में 65 फीसदी महिलाएं कोई भी काम समय पर सुव्यवस्थित ढंग से करने का दावा करती हैं। सर्वे में यह बात साफ है कि रोजाना के काम में महिलाएं भले ही लेट हों, लेकिन छुट्टियों पर कहीं जाने की बात हो तो वे काफी ऐक्टिव हो जाती हैं और इसकी तैयारी समय पर करती हैं।

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