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संपत्ति कब्जाने के आरोप में घिरे मंत्री

मुख्य सचिव आवास अपने नाम करने का लग चुका है आरोप

देहरादून। जीरो टालरेंस वाली सरकार के एक मंत्री पर अब हरिद्वार में साझेदार की संपत्ति कब्जा लेने का आरोप लगा है। मंत्री पर पहले ही मुख्य सचिव के लिए अधिसूचित सरकारी आवास पर कब्जा करने का आरोप लग चुका है। संपत्ति कब्जाने का आरोप लगाने वाले दंपत्ति के मुताबिक, वे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक से शिकायत और दर्द बयान कर चुके हैं, फिर भी उनकी समाप्ति मिलना तो दूर अब अपने शहर से भी बेगाने हो चुके हैं। उनका कहना है कि सभी जगह उनको अदालत जाने की ही सलाह दी जाती है, जो की अब उनके वश से बाहर है।
दर-दर ठोकरें खा रहे अनुज गर्ग के मुताबिक, मंत्री का भाई हरिद्वार में उनके आभूषण के शोर रूम में 50 फीसदी का साझीदार था। हालांकि, यह सिर्फ दिखावे के तौर पर था। असल में साझेदार मंत्री थे। उन्होंने कहा कि राजनीति में होने के कारण वह खुलकर कारोबार नहीं कर सकते हैं। इसलिए भाई को साझीदार बना दिया। भाई ही उनका सारा कारोबार देखता है। दोनों के बीच पहले रिश्ते अच्छे थे। इसमें कड़वाहट तब आई जब मंत्री (तब विधायक थे) मनी लॉंड्रिंग करने लगे। उन्होंने इसका विरोध किया तो संबंध खराब होने लगे। एक दिन जब वह शो रूम गए तो उसमें ताला लगा हुआ था। मैंने पूछा तो बताया गया कि अब इसके मालिक पूरी तरह विधायक जी हैं। इसके बाद मैंने मौजूदा मंत्री से कई बार घर जा के बात की। वह भी मेरे घर आए, लेकिन शो रूम न तो छोडऩे को राजी हैं, न ही मेरे हिस्से का पैसा ही देने को राजी हैं।
पीडि़त के मुताबिक, उन्होंने यह भी पेशकश की कि उनको बाजार भाव से कम पैसा ही दे दिया जाए। वे रूडक़ी भी छोड़ कर चले जाएंगे। उनके मुताबिक, उनकी दोनों किडनी खराब है और बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसा भी चाहिए। न तो मुख्यमंत्री से शिकायत करके कुछ फायदा हुआ न ही प्रधानमंत्री कार्यालय से ही उनको कोई सहयोग मिल रहा है। उनकी समझ में नहीं आ रहा कि क्या किया जाए। उलटे उनको जुबान बंद रखने की धमकियां दी जा रही हैं। हैरानी इस बात की है कि पीडि़त का दर्द सामने आने के बावजूद सरकार इस मामले की छानबीन तक करने को राजी नहीं है। पीडि़त के मुताबिक उनके पास इतना वक्त और पैसा नहीं है कि अब अदालत में जा सके।
जिस मंत्री पर आरोप लगा है उन पर मंत्री बनने के बाद मुख्य सचिव का राजपुर रोड पर स्थित सरकारी चिह्नित आवास अपने लिए चुन लिए जाने और वहां जाने का फैसला करने का आरोप भी है। मुख्य सचिव एस रामास्वामी को इसके कारण अपने चिह्नित आवास में जाने को नहीं मिला। उनको गढ़ी कैंट में टपकेश्वर में नए बने आवास में जाने को मजबूर होना पड़ा। मंत्री ने इस आवास के साथ ही यमुना कॉलोनी में भी सरकारी आवास बुक करा लिया था। यह बात अलग है कि बाद में मंत्री को किसी ने इसके शुभ-अशुभ के फेर में डाल दिया। इसके बाद कई महीने इन्तजार करने के बाद मंत्री ने यमुना कॉलोनी जाने का फैसला किया।अब मुख्य सचिव का भवन खाली पड़ी हुई है।

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