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जालसाजों के हाथों देश का भविष्य

देहरादून में 15 गुरुओं की डिग्री फर्जी

देहरादून। शिक्षा महकमे में इन दिनों खलबली है। शिक्षकों पर नौनिहालों को शिक्षा देकर देश के भविष्य के तौर पर तैयार करने की जिम्मेदारी है, लेकिन विशेष जांच दल की रिपोर्ट ने साबित कर दिया कि गुरूजी लोग पढ़ाने के नहीं बल्कि जालसाजी के गुरु हैं। जांच दल ने इन गुरुओं के साथ ही उनको नियुक्ति देने वाले अफसरों और उनके दस्तावेजों की जांच करने वाले बाबुओं के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की है। इसके बावजूद किसी के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा महकमे में और भी खुलासे होने की संभावना पैदा हो गई है। साथ ही शिक्षा विभाग में बरसों से क्या खेल चल रहा, वह भी सामने आ गया। इनमें से किसी के भी खिलाफ अभी पुलिस में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। अलबत्ता हरिद्वार के आठ शिक्षकों को चार्जशीट दी है कि वे 15 दिनों के भीतर डिग्री प्रस्तुत करें।
डिग्री प्रस्तुत न कर पाने पर ये शिक्षक बर्खास्त मान लिए जाएंगे। ये आठ शिक्षक जांच के दौरान प्रमाण पत्र पेश नहीं कर पाए थे। इस पर जांच दल ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को इसकी रिपोर्ट देते हुए प्रमाणपत्र मुहैया कराने को कहा। इसके बाद शिक्षक प्रमाण पत्र नहीं दे पा रहे हैं। कुछ तो छुट्टी चले गए। देहरादून में भी चार शिक्षक शक के दायरे में हैं। वे भी प्रमाण पत्र नहीं दे पाए हैं। जांच दल ने उनके साथ ही उनको नियुक्ति देने वाले उस वक्त के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई को कहा है। पुलिस की भूमिका इस मामले में ढीली साबित हो रही है। देहरादून के हर्रावाला इलाके में स्थित सावित्री शिक्षा निकेतन के जिन शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है, उनके खिलाफ अभी तक गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं हो पाई है। पुलिस का इस मामले में कहना है कि आरोपियों के आरोप का अध्ययन किया जा रहा है कि उनको तत्काल गिरफ्तार करने की जरुरत है या नहीं। जरुरत हुई तो गिरफ्तार करेंगे। शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय मान चुके हैं कि आरोपी शिक्षकों की डिग्री फर्जी है। उनको नियुक्ति देने वाले उस वक्त के अफसरों को भी नहीं बख्शा जाएगा। उनका कहना है कि इस मामले में जांच दल को पूरा सहयोग दिया जाएगा। हैरानी की बात है कि विभाग की पास आरोपी शिक्षकों के प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं हैं। विभाग ने प्रमाण पत्र उपलब्ध करा पाने में असमर्थता जाहिर कर दी है। इससे साबित होता है कि शिक्षा विभाग में क्या होता रहा है। भ्रष्टाचार और लापरवाही विभाग में छाई हुई है। 17 साल में उत्तराखंड ने यही उपलब्धि हासिल की कि जिन लोगों के कंधों पर देश का भविष्य तैयार करने का जिम्मा है, वही फर्जी और जालसाज हैं और उनके साथ विभाग के अफसर और बाबू लोग हैं। आखिर ऐसे फर्जी शिक्षकों के हाथों पड़े छात्रों से देश और समाज किस तरह की उम्मीद कर सकता है।

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