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ताजमहल पर बैक फुट पर आयी योगी सरकार

राजनीति में ऐसा कई बार हो चुका जब सत्ताधारी पार्टी के नेताओं का बड़बोलापन पार्टी पर बहुत भारी पड़ा। इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो कई बार हालात इतने बदतर हुए हैं कि सत्ता से बेदखल होने की तक की नौबत आयी। इसीलिए राजनीतिक विश्लेषक कहते है कि सत्ताधारी नेताओं को बड़बोलेपन से हमेशा बचना चाहिए क्योंकि सियासत में तिल का ताड़ बनते देरी नहीं लगती। ऐसा ही कुछ पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में हुआ। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल पर सत्ताधारी दल के नेताओं ने अनाप-शनाप बयान देकर विवाद को हवा दे दी। विवाद की शुरूआत तक हुई जब सरकार ने पर्यटन की पुस्तिका से ताजमहल को ही गायब कर दिया। ताजमहल पर सत्ताधारी दल के नेताओं के बयानों की पूरे देश में आलोचना हुई। लिहाजा सरकार बचाव में उतरना पड़ा। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आगे आए। डैमेज कंट्रोल को कम करने के लिए मुख्यमंत्री ने न केवल ताजमहल की तारीफ में कसीदे पढ़े बल्कि आगरा की विरासत के संरक्षण की बात भी कही। यही नहीं उन्होंने ताजमहल के सामने झाड़ू लगाकर अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर कर दी।

प्रेम की निशानी ताजमहल पर हर भारतीय गर्व महसूस करता है। करे भी क्यों न, आखिर ताजमहल विश्व के सात अजूबों में शुमार है। बावजूद इसके पिछले दिनों ताजमहल पर जमकर सियासत हुई। योगी सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा जारी बुकलेट में ताजमहल को जगह नहीं दी गई। इस पर सरकार की जमकर किरकिरी हुई। सोशल मीडिया से लेकर विपक्षी दलों ने सरकार को आड़े हाथों लिया। फिलहाल योगी सरकार को आगे आकर सफाई देनी पड़ी। अभी यह मामला चल ही रहा था कि भाजपा विधायक संगीत सोम ने ताजमहल पर विवादित बयान देकर मामले को और गरमा दिया। इस मामले में भाजपा सांसद विनय कटियार भी कूद पड़े। संगीत सोम ने इस ऐतिहसिक भवन को भारतीय संस्कृति पर ‘धब्बा’ बताया तो विनय कटियार ने ताजमहल को ‘तेजो महालय’ कह दिया। इन नेताओं के बयान के बाद से तो सियासी गलियारे का माहौल काफी गर्म हो गया। योगी सरकार से लेकर केन्द्र सरकार तक विपक्षी दलों के निशाने पर आ गई। सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की टिप्पणी की जाने लगी। बदले राजनीतिक माहौल को देखकर योगी सरकार ने यू टर्न लिया। विवादों के बीच सीएम योगी ने ताजमहल को भारतीयों के ‘खून पसीने’ से बनी इमारत बताया और इसे विश्वस्तरीय करार दिया। इतना ही नहीं उन्होंने ताज के दीदार भी किया। हालांकि मुख्यमंत्री बनने से पहले खुद योगी आदित्यनाथ ताजमहल पर विवादित बयान दे चुके हैं। हालांकि ताजमहल पर उठे बवाल के बाद उत्तर प्रदेश सरकार डैमेज कंट्रोल करने में जुट गई है। यूपी सरकार की ओर से एक कैलेंडर जारी किया गया जिसमें ताजमहल को प्रमुखता से जगह दी गई। यह कैलेंडर साल 2018 के लिए जारी किया गया है। इसमें जुलाई के महीने वाले पेज पर ताजमहल को जगह दी गई है, साथ ही पीएम मोदी और सीएम योगी की भी तस्वीर है। इसके अलावा संगीत सोम और कटियार के बयान से भी पार्टी ने किनारा कर लिया।
सीएम योगी के आगरा दौरे के कई निहितार्थ है। एक तो ताजमहल पर हुई किरकिरी की भरपाई, दूसरे निकाय चुनाव। सीएम योगी ताजमहल में झाड़ू लगाकर क्या संदेश दिया और इसका लोगों में क्या संदेश गया यह तो वक्त बतायेगा लेकिन एक बात तो तय है कि हिंदुत्व को प्रमुखता से उठाने के चक्कर में बड़ी गलतियां हो रही है। अयोध्या में त्रेता युग की दीवाली से बीजेपी को जितना फायदा नहीं हुआ उससे ज्यादा नुकसान ताजमहल पर विवादित बयान देने से हो गया। खैर योगी सरकार इस डैमेज कंट्रोल को मैनेज करने में जुटी हुई है। वह हाल-फिलहाल 2019 तक कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। अभी प्रदेश में निकाय चुनाव होने है और 2019 में लोकसभा चुनाव। निकाय चुनाव के लिए विपक्षी दलों ने कमर कस ली है। योगी सरकार के लिए भी निकाय चुनाव प्रतिष्ठïा का प्रश्न बना हुआ है। सीएम योगी पर दबाव काफी है शायद इसीलिए ताजमहल पर उन्हें खुद आगे आना पड़ा और ताजमहल के दीदार तक करना पड़ा। भले ही योगी
सरकार हिंदुत्व के सहारे लोकसभा चुनाव में विजय पताका फहराने की जुगत में हो लेकिन वह जानती है कि यह इतना आसान नहीं है। बीजेपी को यूपी में प्रचंड बहुमत मिला तो उसमें मुस्लिम वोट का भी बड़ा
योगदान था। इसलिए बीजेपी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है।

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