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पर्यटन स्थल न बन जाए केदार धाम

मोदी ने केदारनाथ धाम को आधुनिक तौर पर विकसित करने और यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं को हर मुमकिन सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनाई है, जिससे यहां अधिक से अधिक लोग पहुंच सके। उन्होंने कहा कि केदारपुरी भव्य और दिव्य दोनों होगी। इसमें तकनीक का सहारा लिया जाएगा लेकिन यह ख्याल रखा जाएगा कि धाम की धार्मिक मान्यता के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न होने पाए। प्रधानमन्त्री की इच्छा और निर्देश के बाद राज्य की त्रिवेंद्र सरकार ने भी त्वरित कार्रवाई शुरू की और योजनायें बनानी शुरू कर दीं। जब मोदी दोबारा मसूरी आए तो उनको लगे हाथों केदारपुरी के पुनर्निर्माण के बारे में डेमो भी दे दिया। इससे बेहतर कुछ हो नहीं सकता कि धर्म और मान्यताओं में यकीन करने वाले लोगों को उनकी आकांक्षा पूरी करने का मौका दिया जाए।

छले एक हफ्ते के भीतर केदारनाथ धाम लगातार महत्वपूर्ण चर्चाओं और सुर्खियों में छाया रहा। इसकी पूरी उम्मीद है की आने वाले दिनों में भी धाम को और सुर्खियां मिलती रहेंगी। वैसे जब से भीषण आपदा ने कहर बरपाया तभी से हिम चोटियों की सुंदर मालाओं के बीच स्थित यह धाम किसी न किसी कारण से चर्चाएं बटोरता रहा है। कभी आपदा के बाद तरीके से राहत कार्य न होने तो कभी इतने सालों बाद भी नर कंकालों के मिलते रहने और सैकड़ों के गुमशुदा ही रह जाने तो कभी राहत कार्य घोटालों के कारण। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण यह धाम लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। मोदी जब दिवाली के अगले दिन यहां पहुंचे तो यह धाम एक बार फिर देश भर की मीडिया में सुर्खियां अर्जित कर चुका था। यह बात अलग है कि मोदी ने धाम के दर्शन के साथ ही अपने दौरे का इस्तेमाल सरकारी और राजनीतिक तौर पर भी कर लिया। इसके कारण कांग्रेस परेशान रही और बीजेपी तथा केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
मोदी ने केदारनाथ धाम को आधुनिक तौर पर विकसित करने और यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं को हर मुमकिन सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनाई है, जिससे यहां अधिक से अधिक लोग पहुंच सके। उन्होंने कहा कि केदारपुरी भव्य और दिव्य दोनों होगी। इसमें तकनीक का सहारा लिया जाएगा लेकिन यह ख्याल रखा जाएगा कि धाम की धार्मिक मान्यता के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न होने पाए। प्रधानमन्त्री की इच्छा और निर्देश के बाद राज्य की त्रिवेंद्र सरकार ने भी त्वरित कार्रवाई शुरू की और योजनायें बनानी शुरू कर दीं। जब मोदी दोबारा मसूरी आए तो उनको लगे हाथों केदारपुरी के पुनर्निर्माण के बारे में डेमो भी दे दिया। इससे बेहतर कुछ हो नहीं सकता कि धर्म और मान्यताओं में यकीन करने वाले लोगों को उनकी आकांक्षा पूरी करने का मौका दिया जाए। उनको दर्शन और यात्रा में कोई दिक्कत न हो इसके लिए सरकार को निश्चित रूप से कार्य करना चाहिए लेकिन सवाल इतना भर नही है। धार्मिक आकांक्षाओं को सुव्यवस्थित और सुगम तरीके से पूरा कराने में सरकार यह गलती न कर बैठे कि वह केदारनाथ धाम को अनजाने में पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर दें। यह सवाल उठना लाजिमी है कि इसमें क्या गलत है अगर यहां पर्यटक भी आते हैं। इसमें गलत कुछ नहीं है लेकिन ऐसा नहीं हो कि सरकार इस धाम का स्वरुप इतना और इस तरह विकसित कर दे कि वह धाम से ज्यादा पर्यटक स्थल बन कर रह जाए।
धार्मिक स्थलों पर जहां धार्मिक और आत्मिक शुद्धता का अहसास होता है वहीं पर्यटक स्थलों पर तमाम सामाजिक विसंगतियां और वैधानिक चुनौतियां जन्म बहुत तेजी से लेने लग जाती हैं। केदारनाथ धाम की पवित्रता और शुद्धता की शपथ ली जा सकती है। यह यात्रा अभी बहुत आसान नहीं है, सिवाय पैसे वालों को छोडक़र जो लगातार वायु मार्ग से धाम तक जा पहुंचते हैं और थोड़ा ही पैदल सफर करते हैं या फिर अपनी शानदार एसयूवी में बैठ कर आते हैं। जिस दिन इस धाम पर पहुंचना सभी के लिए बहुत आसान हो जाएगा, उस दिन यहां हर तरह के लोग, जिनमें वे भी शामिल होंगे, जिनकी कोई आस्था किसी भी धर्म में नहीं होगी, यहां महज पर्यटन के लिए पहुंचने लगेंगे। ऐसा हुआ तो यहां बुराइयों की पैठ जम जाना कोई मुश्किल कतई नहीं होगा। यह तो कोई छिपी बात नहीं है कि पहाड़ों में शराब की उपलब्धता कितनी आसान है लेकिन सिर्फ शराब ही अकेली बीमारी नहीं है, सामाजिक विसंगतियों को जन्म देने के लिए। जहां भी पर्यटक ज्यादा तादाद में पहुंचते हैं वहां किस कदर गलत और गैर कानूनी कार्य होते हैं, किसी से छिपा नहीं रह गया है। हिन्दुओं का बहुत ही सम्मानित तीर्थ स्थल हरिद्वार हो या ऋषिकेश, आए दिन वहां सेक्स स्कैंडल और सेक्स रैकेट पकड़े जाने के मामले सामने आते रहते हैं। केदार धाम भी पर्यटक स्थल बन गया तो यहां हर तरह के तत्व घुसपैठ कर सकते हैं। इस पर रोक के लिए भी सरकार को साथ-साथ कोशिशें और योजनायें बनानी चाहिए। याद रखिये कि पवित्र नगरी की पवित्रता को बर्बाद करने की कोशिश करने वालों को लगता है कि भीड़ में किसी की नजर उन पर नहीं जाएगी। यह कार्य श्रद्धालु नहीं पर्यटक करते हैं। एक हकीकत यह भी है कि ईश्वर को पाने का आनंद कड़ी तपस्या और परिश्रम के बाद ही आता है।
यह दुर्भाग्य से कम नहीं है कि हरिद्वार का ग्राफ जहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के मामले में काफी ऊपर रहता है वहीं सामान्य और यौन अपराधों के मामले में भी अग्रणी रहता है। उत्तर प्रदेश के विभाजन से पहले और आज भी हरिद्वार अपना यह शर्मनाक दर्जा बनाए हुए है। केदारनाथ अभी इस तरह की गंदगी से अछूता है। इस पवित्र धाम तक अभी वही पहुंचते हैं जिनकी धार्मिक आस्था बहुत बलवती होती है और जिनको सिर्फ ईश्वर में समाने की ख्वाहिश रहती है। सरकार और मंदिर समिति को इस बात का विशेष रूप से ख्याल रखना पड़ेगा कि केदारनाथ धार्मिक के साथ ही रोमांचक और विलासिता पर्यटन से बहुत ज्यादा नाता न जोड़ ले। इससे मोदी और सरकार का जो मंतव्य है वह खत्म हो जाएगा। बेहतर होगा कि केदारनाथ में श्रद्धालुओं के लिए जरूरी मूल भूत सुविधाएं, जिनमें पीने का साफ पानी, रास्तों पर पर्याप्त तादाद में पर्यावरण को दूषित न करने वाले मोबाइल टॉयलेट्स, स्तरीय रैन बसेरे बनाने में ज्यादा ध्यान दिया जाए। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की शिकायत यह रहती है कि सीजन के दौरान उनके साथ तकरीबन लूटमार हो जाती है। दुकान में जाओ तो दुगुनी कीमत पर सामान, होटलों और रेस्तराओं में तिगुनी-चौगुनी कीमत, टैक्सी किराया भी बहुत ज्यादा। इसका असर यह भी होता है कि पर्यटक और श्रद्धालु यहां से खराब अनुभव लेकर लौटते हैं। सरकार की उनके साथ बेहतर बर्ताव की कोशिशें कभी परवान नहीं चढ़ी। पहाड़ों में मोबाइल नेटवर्क भी अभी तक बहुत खराब है। मोबाइल नेटवर्क कंपनियों से बात करके उनको अपनी सेवाएं बेहतर करने के लिए कहा जा सकता है। आपात स्थिति में मोबाइल नेटवर्क के भी कार्य न करने से कई बार पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भारी दिक्कत होती है। सारा पैसा और जोर सिर्फ केदार धाम क्षेत्र में लगाने से बेहतर है कि रास्ते में जो भी खतरनाक और हादसों के मद्देनजर संवेदनशील है, वहां सुरक्षा और चिकित्सा तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी बंदोबस्त को स्तरीय किया जाए, जिससे लोगों में यात्रा को लेकर कोई भय या आशंका न रहे। वे सुरक्षित, बेफिक्र तथा आनंददायक यात्रा का लुत्फ ले सके। याद रखने की जरूरत है कि सुविधाओं से पहले सुरक्षा पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

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