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आईओएस और एंड्रॉयड पर ऐसे लें वॉट्सएप्प आईओएस और एंड्रॉयड पर ऐसे लें वॉट्सएप्प 

जब कभी भी यूजऱ कोई नया फोन लेने की सोचता है या फिर उसका पुराना फोन खराब हो जाता है, तो सबसे पहले उसके दिमाग में बैकअप का ख्याल आता है। वैसे सभी मोबाइल डेटा व डॉक्यूमेंट्स, आदि का बैकअप तो आसानी से ले लिया जाता है, लेकिन वॉट्सएप्प या अन्य मैसेजिंग एप्प का कैसे बैकअप लेना है ये सब को मालूम नहीं होता है। और जिसके लिए यूज़र्स को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अब तक सिर्फ ई-मेल का बैकअप रखने से ही काम चल जाता था, लेकिन अब वॉट्सएप्प पर भी कई ऐसी जानकारियां मौजूद होती हैं, जिनका बैकअप लेना बेहद ज़रूरी हो गया है। चाहें, आप आईओएस यूजऱ हों या एंड्रॉयड यूजऱ, दोनों पर ही वॉट्सएप्प का बैकअप लिया जा सकता है। आइये जानते हैं कैसे आप वॉट्सएप्प के ज़रूरी चैट्स, फोटोज़ व वीडियोज़ का बैकअप ले सकते हैं-

आईओएस पर बैकअप:
जितने भी आईफोन यूज़र्स हैं, वो अपने वॉट्सएप्प का बैकअप बड़ी आसानी से कुछ ही स्टेप्स को फॉलो करके ले सकते हैं। आप अपने आई-फोन पर वॉट्सएप्प खोलें और फिर सेटिंग्स में जाकर चैट सेटिंग्स में जाएं। यहां पर चैट बैकअप का विकल्प मिलेगा। यहां पर दिए गए विकल्पों में अपनी सुविधा के अनुसार चुन सकते हैं। आईओएस में बैकअप बनाने की सुविधा आईक्लाउड पर होती है।
एंड्रॉयड पर बैकअप:

एंड्रॉयड यूज़र्स भी कुछ सिंपल स्टेप्स को फॉलो करके अपनी चैट्स का बैकअप ले सकते हैं।
द्यद्यसबसे पहले एप्प के इंटरफेस पर दायीं तरफ ऊपर की ओर तीन बिन्दु नजऱ आएंगे। उन पर क्लिक करें।
द्यद्यइसके बाद सेटिंग्स में जाएं, फिर चैट्स एंड कॉल्स या चैट में जाएं। अब चैट बैकअप पर टैप करें। यहां आपको गूगल ड्राइव सेटअप करने का विकल्प मिलेगा। इसी पेज पर निचले हिस्से में गूगल ड्राइव सेटिंग्स नजऱ आएंगी।
द्यद्यबैकअप टू गूगल ड्राइव पर टैप करें। यहां पर आप बैकअप का समय निर्धारित कर सकते हैं। आपको बैकअप, कभी नहीं, रोज़, साप्ताहिक और मासिक जैसे विकल्प मिलेंगे। जिसको आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से चुन सकते हैं, वैसे बेहतर रहेगा कि रोज़ का चुनाव करें।
इसके बाद आप चूज़ एन अकाउंट पर क्लिक करें। यहां पर आपको यह तय करना होगा कि आप किस जी-मेल आईडी पर वॉट्सएप्प का बैकअप बनाएं। इसके लिए जी-मेल आईडी होना अनिवार्य है।
आपको पहला विकल्प उस ई-मेल आईडी का मिलेगा जिसका इस्तेमाल एंड्रॉयड डिवाइस को इंस्टॉल करने के लिए किया गया है। अगर आप चाहें तो किसी दूसरी ईमेल आईडी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। जिसके लिए आपको एड अकाउंट पर टैप करना होगा। और दिखने वाले निर्देशों का पालन करना होगा। जिसके पश्चात आप अपना दूसरा अकाउंट भी एड कर पाएंगे।
इसके बाद, अब आप यह तय कर सकते हैं कि आप बैकअप किस इंटरनेट सोर्स पर बनाना चाहेंगे। सिर्फ वाई-फाई पर, या वाई-फाई+सेल्युलर पर। इसका चुनाव अपनी उपलब्धता के साथ करें।
आपको विडियो का भी बैकअप बनाने का विकल्प, बैकअप सेटिंग्स में मिलता है। आप ‘इंक्लियूड विडियो’ पर क्लिक करके वॉट्सएप्प पर आने वाले विडियो का भी बैकअप ले सकते हैं।
और हां, ध्यान रहे कि यहां बैकअप किया गया डेटा आपके गूगल ड्राइव अकाउंट में स्टोर होता रहता है। उसे ड्राइव क्लाइंट के तौर पर ब्राउज़ करके नहीं पढ़ा जा सकता। फोन पर इंटरनल बैकअप भी बनता है। आप पहले बैकअप पर टैप करके फोन की इंटरनल स्टोरेज में बैकअप रख सकते हैं। लेकिन फोन का डेटा डिलीट होते ही यह बैकअप भी अपने आप मिट जाएगा।
पब्लिक वाई-फाई यूज करते हैं तो सुरक्षा की इन बातों का जरूर ध्यान रखें

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में जहां आए दिन टेक्नॉलाजी और बाज़ार में रोज़ फेरबदल होते रहते हैं वहीं लोग हर वक्त इंटरनेट के जरिये दुनिया से जुड़े रहना चाहते हैं। घर हो या ऑफिस, हम हर जगह इंटरनेट से जुड़े रहने की कोशिश करते रहते हैं। हालांकि कई बार हम ऐसी जगहों पर भी होते हैं जहां हम मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। ऐसे में पब्लिक वाई-फाई से कनेक्ट होना हमारा एकमात्र साधन बन जाता है। सरकार या फिर कुछ प्राइवेट कंपनियों ने कई जगह पब्लिक वाई-फाई उपलब्ध करवा रखा है। चाहे वो मेट्रो स्टेशन हो या रेलवे स्टेशन हो या फिर कोई शॉपिंग मॉल, लगभग सभी जगह पब्लिक फ्री वाई-फाई मौजूद है लेकिन यह पब्लिक वाई-फाई सेफ नहीं होते हैं। जिसका इस्तेमाल करना हमारे लिए काफी घातक साबित हो सकते हैं। जैसे कि इसके इस्तेमाल से पर्सनल डेटा, पासवर्ड, फाइनेंनशियल या अन्य कोई इन्फोरमेशन को चुराया जा सकता है।
आज हम आपको यहां ऐसी ही कुछ सिक्योर स्ट्रैटजी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आप सभी पब्लिक वाई-फाई से कनेक्ट होते हुए भी अपने आप को सेफ रख सकते हैं। चलिए डालते हैं एक नजऱ इन सभी ट्रिक्स पर-

मोबाइल एंटी-वायरस टूल्स:
जब कभी भी आप पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करें, उससे पहले ये सुनिश्चित कर लें कि मोबाइल में सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर इंस्टाल्ड है या नहीं। एंड्रॉयड यूज़र्स के लिए यह एक सॉफ्टवेयर फायरवॉल का काम करता है। अगर आप का मोबाइल अनसेक्योर्ड वाई-फाई से कनेक्ट होता है तो यह आपको रिस्क दिखाता है और उस रिस्क को स्कैन करके रीमूव कर देता है।

फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम अप-टू-डेट:
आपके फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम अप-टू-डेट होना चाहिए। मोबाइल का ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट रखने से ना केवल आपको फोन में नए फीचर्स मिलते हैं, बल्कि इससे फोन की सिक्योरिटी भी बढ़ती है। मोबाइल के ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट करने से मोबाइल में मौजूद वायरस को भी निकाल देता है।

ऑनलाइन शॉपिंग और बैंकिंग से परहेज़:
जब कभी भी आप पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करें तो ऑनलाइन शॉपिंग या बैंकिंग ना करें क्योंकि जैसे कि आपको बताया गया है कि ये पब्लिक वाई-फाई अनसेफ होते हैं तो पब्लिक वाई-फाई पर ये दोनों ही काम ना ही करें तो अच्छा होगा। पब्लिक वाई-फाई सिक्योर नहीं माने जाते हैं और ऐसा हो सकता है कि कोई हैकर आपका पासवर्ड चुरा ले जिससे आपको आगे जाकर परेशानी हो सकती है।

स्लो पब्लिक वाई-फाई यानी डेंजर:
जब भी आप ओपन वाई-फाई नेटवर्क इस्तेमाल करने जाएं तो उससे पहले ओपन वाई-फाई नेटवर्क को ओपन कर के देख ज़रूर लें की क्या कनेक्शन स्लो है? क्या आपको पेज साइन-इन करने में परेशानी हो रही है या काफी टाइम लग रहा है? अगर ऐसा है तो अच्छा होगा कि आप पब्लिक वाई-फाई को लॉग-आउट कर दें। स्लो नेटवर्क के कारण कई बार यह भी होता है कि किसी ने राउटर के साथ छेडख़ानी की हो, जिससे आपको राउटर से सीधा डेटा नहीं मिल रहा हो। तो स्लो कनेक्शन से कभी भी अपना डीवाइस कनेक्ट ना करें।

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल:
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का मतलब ये है कि जब भी आप किसी ऑनलाइन सर्विस को लॉग-इन करते हैं तो वहां आपको दो सिक्योरिटी लेयर्स से गुजऱना पड़ता है। पहली सिक्योरिटी लॉग-इन क्रेडन्शियल की होती है और सिक्योरिटी में एक कोड आपके मोबाइल पर जेनरेट होता है, जो काफी ज्यादा सेफ होता है। बिना उस कोड के आप कोई भी ट्रांज़ैक्शन या फिर किसी भी वेबसाइट पर लॉग-इन नहीं कर सकते हैं।

वाई-फाई को इस्तेमाल करते ही बंद कर दें:
ये ट्रिक बेहद ही आसान है, अपने मोबाइल को सेफ रखने के लिए। लेकिन ज्यादातर लोग फ्री वाई-फाई को इस्तेमाल करके उसे बंद करना भूल जाते हैं। जो आपकी सिक्योरिटी के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। पब्लिक वाई-फाई को बंद करने से आपके मोबाइल की बैटरी भी खर्च होने से बचेगी।
तो ये थे कुछ ट्रिक्स जिससे आप पब्लिक वाई-फाई को सेफली यूज कर सकते हैं और किसी भी लॉस से बच सकते हैं।

जब कभी बदलें मोबाइल
जब कभी भी आप किसी नए मोबाइल पर वॉट्सएप्प इस्तेमाल करना चाहते हैं और उस पर भी पुरानी चैट देखना चाहते हैं तो इसके लिए वॉट्सएप्प पर रीस्टोर का ऑप्शन मिलता है। ऐसा करते वक्त भी वॉट्सएप्प आपसे पूछेगा कि आप वाई-फाई डेटा का इस्तेमाल करना चाहते हैं या सेल्युलर। बेहतर होगा रीस्टोर वाई-फाई डेटा पर ही करें। और ध्यान रहे कि आपको दूसरे एंड्रॉयड डिवाइस पर भी उसी गूगल अकाउंट से साइन-इन करना होगा, जिस पर आपने वॉट्सएप्प का बैकअप बनाया था। तो ये थे कुछ आसान से टिप्स, जिनको चुनकर आप अपने वॉट्सएप्प चैट्स का बैकअप बड़ी आसानी से ले सकते हैं। जिसमें किसी भी तरह की कीमत लागू नहीं हैं। बस, ज़रूरत है तो एक जीमेल अकाउंट की और वाई-फाई कनेक्शन की।

मोबाइल पर ट्वीटर उपयोग करते हैं तो डेटा को खतरा

अगर आप भी माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्वीटर प्रयोग कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं। ट्वीटर भारत में अपने यूजरों के डेटा विदेश ले जा सकती है। यह आपके लिए तब और भी खतरनाक हो सकता है, जब आप मोबाइल पर ही ट्वीटर प्रयोग कर रहे हों तथा इन्हीं स्मार्टफोन का प्रयोग कर बैंकों और सरकार के साथ वित्तीय लेन देन कर रहे हों। दरअसल माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्वीटर ने हाल ही में संकेत दिया कि यूजर्स के डेटा को विदेश ले जाना उसकी सेवा शर्तों के दायरे में है। वहीं दूसरी ओर सरकार विदेशी इंटरनेट और मोबाइल कंपनियों के लिए लोकल स्तर पर डेटा स्टोर करने की अनिवार्यता पर विचार कर रही है। इस मामले में राइट टू प्राइवेसी और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों ही गंभीर मामले संबद्ध हैं।

सोशल वेबसाइटों की प्राइवेसी पॉलिसी का प्रभावित होना तय

यह संपू्र्ण प्रकरण तब सामने आया है, जब 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने एक अतिविशिष्ट एवं ऐतिहासिक फैसले में राइट टू प्राइवेसी को भारतीय संविधान के अति महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार जीवन के अधिकार में शामिल किया था। व्हाट्सएप के भारतीय यूजरों के डेटा का मालिकाना हक रखने वाली कंपनी फेसबुक द्वारा इस्तेमाल किए जाने के मामले पर उच्चतम न्यायालय में भी सुनवाई चल रही है। इसकी अगली सुनवाई नवंबर में होनी है। सुप्रीम कोर्ट के राइट टू प्राइवेसी वाले आदेश का प्रभाव व्हाट्सएप मामले पर पडऩा भी तय है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 सितंबर 2016 को दिए अपने आदेश में व्हाट्सएप को नई निजता नीति लागू करने की इजाजत दी थी। परंतु न्यायालय ने व्हाट्सएप को 25 सितंबर 2016 तक एकत्रित किए गए अपने यूजर्स का डाटा फेसबुक या किसी दूसरी कंपनी को देने पर रोक लगा दी थी।
इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट के 24 अगस्त के निजता के अधिकार फैसले से प्राइवेसी मामले में भारतीय विधिक स्थिति स्पष्ट हो चुकी है, ऐसे में ट्वीटर की नई प्राइवेसी पॉलिसी समझ से परे है।

ये मामला अब क्यों उठा?

माइक्रोब्लॉगिंग कंपनी ट्वीटर ने भारत सहित दुनियाभर के अपने प्रयोग कर्ताओं के लिए सेवा की शर्तों और निजता नीति (प्राइवेसी पॉलिसी) को अपडेट किया है, जो 2 अक्टूबर से लागू होंगी। इन शर्तों के अनुसार कंपनी अपने यूजर्स के डेटा न केवल विदेश ले जा सकती है, बल्कि वहां भी अपनी सहयोगी कंपनियों के साथ इसे साझा कर सकती है। ट्वीटर के लिए भारत एक बहुत बड़े बाजार के रूप में है। कंपनी के सबसे अधिक दैनिक सक्रिय यूजरों की संख्या भारत में ही है। इस कारण ट्वीटर की इस नई नीति का सबसे ज्यादा प्रभाव भारत पर ही होगा। गूगल, फेसबुक, ट्वीटर जैसी वैश्विक इंटरनेट कंपनियां विज्ञापनों के लिए अपने यूजर्स के डेटा का जमकर प्रयोग कर रही हैं। भारत में जिस तरह से सोशल वेबसाइटों का जमकर प्रयोग हो रहा है, ऐसे में साइबर सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा व अति महत्वपूर्ण राइट टू प्राइवेसी को देखते हुए, इन मामलों पर सरकार को शीघ्र एक ठोस नीति बनाने की आवश्यकता है।

डेटा के विदेश जाने से उत्पन्न खतरे
अगर निजी जानकारी देश से बाहर स्थित सर्वरों पर ले जाई जाती है तो निश्चित रूप से यह निजता के कानून का उल्लंघन होगा, क्योंकि इसका कई तरीकों से दुरुपयोग हो सकता है। साथ ही देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा होगा। ऐसे में भारत के लिए अब अनिवार्य हो गया है कि इन मामलों के लिए कानून बने तथा डेटा को देश के अंदर ही रखने के विकल्प पर पूर्ण विचार हो। अगर इस तरह के कानून बनाने में समय लगता है तो सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 83 के तहत सरकार नियम बनाकर सेवा प्रदाता कंपनियों को भारतीय यूजरों और भारत में मौजूद कंप्यूटरों के डेटा को सुरक्षित करने के लिए कदम उठाने के लिए कह सकती है।
इंटरनेट कंपनियां तथा मोबाइल कंपनियां यूजर्स की व्यक्तिगत जानकारी, उनके संपर्क और अन्य जानकारियों के बारे में डाटा जुटाती हैं तथा इन जानकारियों को जिस प्रकार हाथोंहाथ अन्य कंपनियों के साथ साझा करती हैं, यह हम यूजर्स के लिए खतरनाक है। ऐसे में हमारा ध्यान भारत में डेटा के स्टोर पर तो होना ही चाहिए, लेकिन केवल यह पर्याप्त नहीं है। हम लोगों को भारत में भी डेटा को सुरक्षित रखने तथा कॉपी करने से रोकने के लिए यूरोपीय व्यवस्था लागू करने की जरूरत है।

आपके लिए बड़े काम के हैं ये टेक टिप्स, आजमा कर देखें

देखें ऑफ लाइन विडियो
अपने पसंदीदा यू-ट्यूब विडियो को बार-बार देखने से आपके डाटा और बैंडविथ का बिल बहुत ज्यादा आने लगता है। तो आप विडियो को अपने कंप्यूटर से डाउनलोड कर लें और उन्हें ऑफ लाइन देखें। इसके लिए आपको यू-ट्यूब के यूआरएल में थोड़ा सा बदलाव करना होगा। उस लिंक में एसएस जोड़ दें, उदाहरण के तौर पर अगर आपके विडियो का यूआरएल youtube.com/watch? है तो आपको यू-ट्यूब के यूआरएल में थोड़ा बदलाव करना होगा। उसमें अगर स्स् जोड़ दें तो आपको यू-ट्यूब लिंक ऐसा बनाना पड़ेगा ssyoutube.com/watch । इसके बाद आपके सामने ऑप्शन की लिस्ट ओपन हो जाएगी और जिस फॉरमेट में डाउनलोड करना चाहेंगे, कर सकेंगे।

पॉप-अप से पाएं छुटकारा
जब भी हम ब्राउजिंग करते हैं तो वेबसाइट्स पर ऊल-जुलूल व चिड़चिड़ाहट पैदा करने वाले पॉप-अप विज्ञापनों से परेशान हो जाते हैं। ये विज्ञापन ना सिर्फ आपके कीमती डाटा को खत्म कर देते हैं बल्कि आपका महत्वपूर्ण समय भी बरबाद कर देते हैं। इनसे बचने के लिए क्रोम और फायरफॉक्स ब्राउजऱ में इनका हल मौजूद है, एक प्ल्ग-इन के रूप में जिसका नाम है ऐडबल्क प्ल्स। इसे इंस्टाल करें और विज्ञापन को हमेशा के लिए भूल जाएं। इसे इंस्टाल करने के लिए एप्प क्रोम के वेब स्टोर में जाएं, क्रोम वेबस्टोर में जाने के लिए ये लिन्क है chrome.google.com/webstore/categ ory/e&tension यहां सर्च बॉक्स में ऐडब्लॉक प्ल्स को ढूंढें और फिर इंस्टाल करें।
स्लो ब्राउजऱ सोल्यूशन अक्सर हमारा ब्राउजऱ चलते-चलते बहुत स्लो होने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपके ब्राउजऱ में बहुत सारा वेब डाटा भर जाता है और उसकी स्पीड को प्रभावित करने लगता है। इसके लिए आप Ctrl+Shift+Del प्रेस कर के कुछ समय तक के स्टोर्ड किए गए वेब डाटा जैसे कुकिज़, पासवर्ड, कैच मेमोरी को डिलीट कर सकते हैं। और इस तरह आपका ब्राउजऱ फिर से सही स्पीड में काम करने लगेगा।
किसी दूसरे कंप्यूटर पर संभल कर करें काम
अगर आप किसी और शख्स के कंप्यूटर का इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं तो हमेशा इनकॉग्निटो विंडो में ही करें। इनकॉग्निटो विंडो आपका पासवर्ड, कूकीज़, हिस्ट्री को सेव नहीं करता है। इसके इस्तेमाल से एक तो आपका प्राइवेट डाटा को डीलीट करने की ज़रूरत नहीं होती और आपकी ज़रूरी जानकारियां चोरी होने का डर भी नहीं रहता है। इनकॉग्निटो विंडो को क्रोम और फायरफॉक्स में खोलने के लिए ष्टह्लह्म्द्य+स्द्धद्बद्घह्ल+हृ दबाएं।
आमतौर पर एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स वायरस की गिरफ्त में ही आते हैं। कुछ ऐसे ऐड्स होते हैं जो आपको गलत जानकारी देते हुए दिखाता है कि आपके फोन में वायरस है और इसे ठीक करने के लिए हरा एप्प डाउनलोड कर लें। ऐसा नहीं है कि एंड्रॉयड फोन एकदम सेफ होते हैं, इनमें भी वायरस आ सकते हैं।

इनको कैसे हटाएं इसकी कुछ ज़रूरी जानकारियां नीचे बताई जा रही हैं-

एप्प के जरिये अच्छे संस्कार और संस्कारी गेम देगा
आरएसएस

आरएसएस से जुड़ा संगठन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास बच्चों के जीवन में वीडियो गेम के माध्यम से संस्कार पिरोने का काम शुरू करने जा रहा है। कक्षा 5 से छात्रों को स्कूल बैग और कॉपी पैन से आजादी दिलाने के लिए एक विंडो बेस्ट एप्प डेवलेप किया जा रहा है। संघ के शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की योजना ये है कि इसे महाराष्ट्र सरकार को देकर इस एप्प को लागू करने के सुझाव भी दिए जाएं। इसी एप्प में पढ़ाई के साथ-साथ एक संस्कारी वीडियो गेम भी बच्चों के लिए उपल्बध कराया जाएगा।

एप में वैदिक गणित/ मैथ्स भी मौजूद
न्यास ने बताया है कि वो इस एप्प में वैदिक गणित भी जोड़ रहे हैं। साथ ही इसमें एक दिलचस्प कार्टून कॉर्नर भी होगा। जिससे बच्चे जुड़ाव महसूस करेंगे। इस एप्प में नैतिक शिक्षा की कहानियां भी होंगी। होगा यह कि इस एप्प के जरिए छात्र पढ़ाई तो करेंगे ही साथ ही उनका खूब मनोरंजन भी होगा, और इसी मनोरंजन के जरिए उन्हें अच्छे संस्कार भी दिए जाएंगे।
अब पढऩे के लिए कॉपी किताब की जरूरत नहीं
न्यास के संयोजक ने बताया है कि वो इस एप्प को अगले 6-7 महीने में तैयार कर लेंगे। इस एप्प को स्टूडेंट, स्कूल, घर या कहीं भी मोबाइल पर या कंप्यूटर पर इस्तेमाल कर सकेंगे। वह कहते हैं कि इस एप्प के लिए हम छात्रों को ई-पेन भी देंगे जिससे छात्र डिजिटल कॉपी-पेन का इस्तेमाल कर सकेंगे। छात्र इस एप्प के जरिए अपने नोट्स लिखकर अपलोड कर सकेंगे और उसे बाद में घर पर या कहीं और भी देख सकेंगे। इससे फर्क ये पड़ेगा कि स्कूल जाने के लिए स्कूल बैग की जरूरत खत्म हो जाएगी। सब कुछ एप्प के जरिए होगा।

मौजूद होंगे संस्कारी ई-गेम्स
न्यास संयोजक ने कहा है कि आजकल ना जाने कैसे-कैसे गेम्स आ रहे हैं। जिनको खेलकर बच्चों में एरोगेंस बढ़ रहा है। इन गेम्स में सिर्फ मरना और मारना सिखाया जाता है। इन्हीं गेम्स से बच्चों के अंदर एक भाव पैदा होता है। यही भाव उनके व्यवहार में झलकता है। साथ ही ऐसे और कई तरह के वल्गर गेम्स भी मौजूद हैं जो बच्चों के भविष्य के लिए खासा हानिकारक हैं। इसी कारण हमने अपनी इस एप में एक ई गेम्स जोन भी रखा है जो बच्चों में संस्कार भी डालेंगे। हम बच्चों को मॉरल एजुकेशन गेम्स देंगे जिससे बच्चों का मानसिक विकास होगा। उनके मन में सकरात्मक भाव आएंगे। उन्होंने ये भी बताया कि इसके अलावा हम और भी कई गेम्स बना रहे हैं जिसमें कबड्डी, कुश्ती-खोखो जैसे देसी खेलों को जगह मिलेगी। न्यास संयोजक ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि ये स्कूल एप्प सबसे पहले तैयार कर महाराष्ट्र सरकार को देने का फैसला किया है। क्योंकि महाराष्ट्र में शिक्षा को लेकर नए-नए प्रयोग होते रहते हैं।

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