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भारी न पड़ जाए सीमा विस्तार

कोटद्वार और ऋषिकेश के अध्यक्षों का हटना तय

38 स्थानीय निकायों के प्रमुखों पर भी खतरे के बादल
देहरादून। राज्य सरकार के कई स्थानीय निकायों का सीमा विस्तार किए जाने का फैसला उनके प्रमुखों पर भारी पड़ सकता है। कोटद्वार और ऋषिकेश के नगर पालिका से निगम बन जाने के कारण बोर्ड भंग होना तय है लेकिन बाकी पालिकाओं और पंचायतों को लेकर सरकार मंथन में जुटी है कि इनका क्या किया जाए। मंथन में बोर्ड भंग करने का फैसला हुआ तो तकरीबन तीन दर्जन पालिका अध्यक्षों की कुर्सी जा सकती है।
त्रिवेंद्र सरकार ने हाल ही में न सिर्फ देहरादून नगर निगम की सीमा में विस्तार किया है बल्कि कई पालिकाओं और पंचायतों की सीमा भी बढ़ा दी है। ऋषिकेश और कोटद्वार नगर पालिकाओं को नगर निगम का दर्जा दे दिया है। एक्ट के मुताबिक यह तय है कि स्थानीय निकायों का उच्चीकरण होता है तो बोर्ड आवश्यक रूप से भंग होगा। अलबत्ता, यह तय नहीं है कि क्या सीमा विस्तार पर भी बोर्ड भंग होगा? सूत्रों के मुताबिक सरकार चाहती है कि सीमा विस्तार के कारण प्रभावित पालिकाओं और पंचायतों के बोर्ड भी भंग कर दिए जाए। खास तौर पर अगले लोक सभा चुनाव से पहले।
नगर निकायों को दो एक्ट के मुताबिक संचालित किया जाता है। नगर निगम के लिए अलग और नगर पालिका तथा पंचायतों के लिए अलग एक्ट है। उत्तराखंड ने अभी तक अपना एक्ट नहीं बनाया है। वह उत्तर प्रदेश एक्ट के मुताबिक ही चल रहा है। इस एक्ट में प्रावधान है कि अगर निकाय का उच्चीकरण होता है तो बोर्ड जरूर भंग होगा। सीमा विस्तार होने की सूरत में ऐसा करना जरूरी नहीं है। फिर भी सरकार की कोशिश सीमा विस्तार से प्रभावित सभी निकायों को भंग करने का मन बनाया है। सरकार की मंशा को भांप कर सरकार में अहम कुर्सियों पर बैठ नौकरशाह सरकार की इच्छा के मुताबिक कदम उठाने के लिए गृह कार्य शुरू कर दिया है। ऐसे निकायों की तादाद 38 है।
जिन निगमों में सीमा विस्तार हुआ है, उनमें देहरादून के साथ ही हरिद्वार, हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर और रूडक़ी शामिल है। देहरादून के मेयर विनोद चमोली विधायक भी हैं इसलिए उनको निगम भंग होने पर भी कोई असर नहीं पडऩे वाला है। विकासनगर, लंढौरा, झबरेड़ा, कर्णप्रयाग, कीर्तिनगर, देवप्रयाग, नरेंद्र नगर, कोटद्वार, बागेश्वर, लालकुआं, पोखरी, पिथौरागढ़, गदरपुर, किच्छा, सितारगंज, दिनेशपुर, शक्तिगढ़, लुल्तानपुर पट्टी, बडकोट, जोशीमठ, डोईवाला, अल्मोड़ा, बाजपुर, भवाली, खटीमा, भीमताल, हर्बर्टपुर, ऋषिकेश, रुद्रप्रयाग, ऊखीमठ, अगस्त्यमुनि, उत्तरकाशी, टनकपुर और गूलरभोज नगर पालिका और पंचायतें सीमा विस्तार से प्रभावित हैं।
सरकार के प्रवक्ता और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने इस बात से इनकार नहीं किया कि सरकार पालिकाओं और पंचायतों को भंग करने के बारे में सोच रही है। उन्होंने कहा कि इस बाबत न्याय विभाग से विधिक राय ली जा रही है। जब देहरादून नगर पालिका का उच्चीकरण हुआ था और नगर निगम का दर्जा मिला था तब भी पालिका अध्यक्ष चमोली ही थे। उन्होंने पालिका के उच्चीकरण के लिए खूब संघर्ष किया था। जब निगम बना तो सबसे पहला झटका उनको ही लगा। उनकी अध्यक्ष की कुर्सी चली गई और बोर्ड भंग हो गया था।
सरकार के देहरादून नगर निगम के सीमा विस्तार को लेकर कांग्रेस ने ऊंगली उठा दी है। पूर्व विधायक राजकुमार ने कहा कि सरकार का यह कदम कतई उचित नहीं है। पहले ही निगम की आर्थिक दशा ठीक नहीं है। कर्मचारी भी नहीं हैं। पालिका होने के दौरान कार्मिकों की तादाद 1500 थी, लेकिन निगम होने पर यह तादाद 500 रह गई। दूसरी तरह इलाका बढ़ चुका है। ऐसे में सरकार का फैसला बिल्कुल ही अप्रासंगिक कहा जा सकता है।

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