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राम, अयोध्या और योगी 

राम का जितना मजबूत रिश्ता अयोध्या से है उतना ही मजबूत रिश्ता भारतीय जनता पार्टी का अयोध्या से हैं। राम के कारण अयोध्या जानी जाती है तो अयोध्या की वजह से भाजपा। राम और अयोध्या के नाम पर फली-फूली भाजपा आज वटवृक्ष बन चुकी है लेकिन आज भी उसकी पालनहार रामजन्मभूमि और अयोध्या ही है। करीब एक साल पहले तक अयोध्या का जिक्र गिने-चुने अवसरों पर होता था लेकिन विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद से अयोध्या आए दिन चर्चा में बनी रही। उत्तर प्रदेश की सत्ता में भाजपा को आए सात माह से ज्यादा का समय हो गया है और इस दौरान अयोध्या की चर्चा देश ही नहीं विदेशों तक हो रही है। अयोध्या को लेकर सीएम योगी की सोच जितनी आध्यात्मिक हैं उतनी ही सियासी, तभी तो प्रदेश निकाय चुनाव का प्रचार अभियान योगी ने अयोध्या से शुरू किया। जब योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स का ऐलान और यहां भव्य दीपावली का आयोजन किया था तभी यह लगने लगा था कि वे राम के सहारे मिशन 2019 का रास्ता भी तलाश रहे हैं। तभी तो एक तरफ राम मंदिर को लेकर अदालत के बाहर मामला सुलझाने की कोशिशें दिख रही है तो दूसरी ओर पर्यटन की संभावनाओं को लेकर बड़े-बड़े ऐलान किए जा रहे हैं।म का जितना मजबूत रिश्ता अयोध्या से है उतना ही मजबूत रिश्ता भारतीय जनता पार्टी का अयोध्या से हैं। राम के कारण अयोध्या जानी जाती है तो अयोध्या की वजह से भाजपा। राम और अयोध्या के नाम पर फली-फूली भाजपा आज वटवृक्ष बन चुकी है लेकिन आज भी उसकी पालनहार रामजन्मभूमि और अयोध्या ही है। करीब एक साल पहले तक अयोध्या का जिक्र गिने-चुने अवसरों पर होता था लेकिन विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद से अयोध्या आए दिन चर्चा में बनी रही। उत्तर प्रदेश की सत्ता में भाजपा को आए सात माह से ज्यादा का समय हो गया है और इस दौरान अयोध्या की चर्चा देश ही नहीं विदेशों तक हो रही है। अयोध्या को लेकर सीएम योगी की सोच जितनी आध्यात्मिक हैं उतनी ही सियासी, तभी तो प्रदेश निकाय चुनाव का प्रचार अभियान योगी ने अयोध्या से शुरू किया। जब योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स का ऐलान और यहां भव्य दीपावली का आयोजन किया था तभी यह लगने लगा था कि वे राम के सहारे मिशन 2019 का रास्ता भी तलाश रहे हैं। तभी तो एक तरफ राम मंदिर को लेकर अदालत के बाहर मामला सुलझाने की कोशिशें दिख रही है तो दूसरी ओर पर्यटन की संभावनाओं को लेकर बड़े-बड़े ऐलान किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जब भी मौका मिलता है अयोध्या और राम की महत्ता को बताने से नहीं चूकते। इतना ही नहीं वह विरोधियों को भी अयोध्या और राम की उपेक्षा के लिए घेर लेते हैं। 1992 में बाबरी मस्जिद ढहने के बाद सीएम योगी अकेले ऐसे मुख्यमंत्री है जो कई बार रामलला के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। इनसे पहले वर्ष 2002 में राजनाथ सिंह ने अयोध्या दौरे के दौरान रामलला के दर्शन किए थे। राजनाथ के बाद से 15 सालों में किसी भी मुख्यमंत्री ने इस विवादित स्थान का दौरा नहीं किया। सभी मुख्यमंत्री अयोध्या से परहेज करते रहे। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव का प्रचार अयोध्या से शुरु किया। निकाय चुनाव का बिगुल फूंकने की जगह अयोध्या को चुने जाने के सवाल पर योगी ने कहा था कि राम के बिना भारत में कोई काम नहीं हो सकता। उन्होंने बड़े ही दार्शनिक अंदाज में राम का गुणगान कर अयोध्यावासियों के साथ-साथ पूरे देशवासियों को प्रभावित किया। दरअसल, योगी आदित्यनाथ जब भी अयोध्या के लिए कुछ करते हैं तो उसमें आध्यात्मिक के साथ सियासी हित भी साधते हैं। चूंकि मुख्यमंत्री, योगी हैं इसलिए भगवान राम के प्रति उनकी आस्था पर कोई उंगली भी नहीं उठा सकता। अलबत्ता वह खुद ही विरोधी दलों को अयोध्या की उपेक्षा के लिए कटघरे में खड़ा कर देते हैं।  सीएम योगी का अयोध्या प्रेम यूं ही नहीं है। सीएम पद संभालने के बाद से ही वह समझ गए थे कि उनके लिए आगे की राह आसान नहीं है। भारतीय जनता पार्टी से लेकर संघ तक को उनसे बहुत उम्मीदें हैं। लोकसभा चुनाव में अब कम समय बचा है। उत्तर प्रदेश की लोकसभा चुनाव में क्या अहमियत है इससे भाजपा आलाकमान से लेकर आरएसएस सभी वाकिफ हैं। उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद से ही योगी सरकार धार्मिक स्थलों पर ज्यादा मेहरबान रही है। उसमें अयोध्या प्राथमिकता में रही है। भाजपा और अयोध्या का नाता जगजाहिर है। अब जब 2019 में लोकसभा चुनाव होने वाला है और भाजपा को कुछ करने का मौका मिला है तो योगी सरकार दिल खोलकर अयोध्या के लिए काम कर रही है। योगी मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार जब अयोध्या पहुंचे थे तो 350 करोड़ रुपये से भगवान राम की नगरी को सजाने का लक्ष्य रखा था। मिशन 2019 को लेकर भाजपा की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। भाजपा का सबसे ज्यादा फोकस उत्तर प्रदेश पर है। 2014 लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सत्ता में भाजपा को पहुंचाने में यूपी का सबसे बड़ा योगदान रहा है। भाजपा की झोली में कुल 71 सीटें आई थीं। इस बार भी भाजपा कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है। लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें पार्टी को दिलाने का दबाव सीएम योगी पर भी है क्योंकि योगी के हाथ में उत्तर प्रदेश की बागडोर है। उनके कामकाज का असर चुनाव पर पड़ेगा ही, इसलिए सीएम योगी अपने तरीके से हिंदुत्व को धार देने में जुटे हैंं। सीएम योगी ने अयोध्या का कायाकल्प करने के लिए सरकार का खजाना खोल दिया है। योगी सरकार ने राम के नाम पर कई विकास योजना शुरू की हंै। इसमें रामायण सर्किट, राम म्यूजियम, अविरल रामायण शामिल हैं। केंद्र की मोदी सरकार ने अयोध्या समेत ऋं ग्वेरपुर और चित्रकूट को मिलाकर रामायण सर्किट के रूप में विकसित करने के लिए 223.94 करोड़ की योजना स्वीकृत की है। इस धनराशि से घाटों-मंदिरों और पर्यटन स्थलों को आधुनिक शक्ल देते हुए अयोध्या को रामकालीन रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। केंद्र ने अयोध्या में राम म्यूजियम बनवाने की योजना बनाई थी, उसे योगी ने पूरा करने के लिए जमीन देने का फैसला किया है। अब देखना दिलचस्प होगा की भगवान राम चुनाव में कितना असर दिखाते हैं।  दूसरी ओर प्रदेश में निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। सीएम योगी के लिए निकाय चुनाव किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। इस चुनाव में उनके आठ महीने के कामकाज का आंकलन होना हैं। निकाय चुनाव का परिणाम बहुत हद तक लोकसभा चुनाव को प्रभावित करेगा। हालांकि लोकसभा चुनाव में अभी लगभग डेढ़ वर्ष का समय शेष है और इतने समय में योगी सरकार प्रदेश में बहुत कुछ कर सकती है। इसलिए निकाय चुनाव को सीएम योगी और उनकी लोकप्रियता से आंका जा सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पर फोकस बनाए हुए हैं। निकाय चुनाव में जन सभा को संबोधित करने के लिए 14 नवंबर को वह मुख्यमंत्री बनने के बाद पांचवी बार अयोध्या पहुंचे। अयोध्या के विकास को लेकर बड़ी रूपरेखा तैयार करने की बात की जा रही है। सरयू के किनारे भगवान राम की बड़ी मूर्ति लगाने की योजना पर्यटन विभाग ने बनाई है। निकाय चुनाव में अपनी जनसभाओं की शुरूआत भी योगी ने अयोध्या से ही की है। योगी अपने हिंदुत्व के एजेंडे को तो आगे बढ़ा ही रहे हैं साथ ही अयोध्या को भी प्रदेश की राजनीति का अहम हिस्सा बताते हैं। बावजूद इसके पिछले चुनाव में अस्सी में से 73 सीटें जीतने वाली भाजपा के लिए यूपी में मिशन 2019 का सफर आसान नहीं होगा। पिछला आंकड़ा छूने के लिए मुद्दों को उठाना होगा और भाजपा मिशन 2019 के लिए अयोध्या को सबसे बड़ा मुद्दा बनाने जा रही है।

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