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 यूं ही नहीं गुजरात चुनाव को लेकर मोदी सरकार की चिंता 

गुजरात में मचे घमासान पर पूरे देश की निगाहें लगी हुईं हैं। 15 साल से सत्ता में रही बीजेपी के लिए गुजरात चुनाव प्रतिष्ठïा का प्रश्न बना हुआ है, जिसकी वजह से केन्द्र की मोदी सरकार की चिंता बढ़ गई है। केंद्र की चिंता जायज है। साख की अहमियत क्या होती है यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बखूबी समझते हैं। पिछले चार साल में बीजेपी के कायाकल्प में मोदी की अहम भूमिका रही है। मोदी की साख की वजह से ही ताबड़तोड़ राज्यों में भाजपा का परचम फहरा। अब जब प्रधानमंत्री मोदी के गृह प्रदेश में चुनाव हो रहा है तो निश्चित ही उनकी प्रतिष्ठïा को आंका जायेगा। गुजरात में पिछले कुछ महीनों के भाजपा के खिलाफ बयार बहने की वजह से चिंता बढऩा स्वाभाविक है। गुजरात में बीजेपी की साख बचाने और विपक्ष में बैठे राहुल गांधी की कांग्रेस के फं्रट पर आने की कवायद के बीच केन्द्र में मोदी सरकार ऐसा कोई रिस्क नहीं लेना चाहती जिससे गुजरात के चुनावों में बाजी उल्टी पड़ जाए। यही वजह है कि राज्य में चुनावों के मद्देनजर केंद्र सरकार डरी हुई है। केन्द्र सरकार पर सवाल यूं ही नहीं उठ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में उठे इन सवालों के पीछे राजनीतिक वजहें भी बताई जा रही हैं। आखिर क्या कारण है कि मोदी सरकार ने संसद का शीतकालीन सत्र टाल दिया। पूरे देश में पद्मावती फिल्म पर हो हल्ला मचा हुआ है और सरकार चुप्पी साधे है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसी क्या मजबूरी थी कि मोदी सरकार को जीडीपी का ताजा आंकड़ा रोकना पड़ा। गुजरात में मचे घमासान पर पूरे देश की निगाहें लगी हुईं हैं। 15 साल से सत्ता में रही बीजेपी के लिए गुजरात चुनाव प्रतिष्ठïा का प्रश्न बना हुआ है, जिसकी वजह से केन्द्र की मोदी सरकार की चिंता बढ़ गई है। केंद्र की चिंता जायज है। साख की अहमियत क्या होती है यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बखूबी समझते हैं। पिछले चार साल में बीजेपी के कायाकल्प में मोदी की अहम भूमिका रही है। मोदी की साख की वजह से ही ताबड़तोड़ राज्यों में भाजपा का परचम फहरा। अब जब प्रधानमंत्री मोदी के गृह प्रदेश में चुनाव हो रहा है तो निश्चित ही उनकी प्रतिष्ठïा को आंका जायेगा। गुजरात में पिछले कुछ महीनों के भाजपा के खिलाफ बयार बहने की वजह से चिंता बढऩा स्वाभाविक है। गुजरात में बीजेपी की साख बचाने और विपक्ष में बैठे राहुल गांधी की कांग्रेस के फं्रट पर आने की कवायद के बीच केन्द्र में मोदी सरकार ऐसा कोई रिस्क नहीं लेना चाहती जिससे गुजरात के चुनावों में बाजी उल्टी पड़ जाए। यही वजह है कि राज्य में चुनावों के मद्देनजर केंद्र सरकार डरी हुई है। केन्द्र सरकार पर सवाल यूं ही नहीं उठ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में उठे इन सवालों के पीछे राजनीतिक वजहें भी बताई जा रही हैं। आखिर क्या कारण है कि मोदी सरकार ने संसद का शीतकालीन सत्र टाल दिया। पूरे देश में पद्मावती फिल्म पर हो हल्ला मचा हुआ है और सरकार चुप्पी साधे है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसी क्या मजबूरी थी कि मोदी सरकार को जीडीपी का ताजा आंकड़ा रोकना पड़ा। 
बीजेपी के खिलाफ जो विपरीत माहौल बन रहा है उससे बीजेपी शीर्ष नेतृत्व अंजान नहीं है। उन्हें इसका पूरा अंदाजा है कि परिस्थितियां बदल रही है। यदि ऐसा न होता तो गुजरात, जो मोदी का गढ़ है एक महीने में चार बार न जाना पड़ता। दरअसल, गुजरात चुनाव मोदी की प्रतिष्ठïा से जुड़ा है। 15 साल से वहां बीजेपी सत्ता में हैं। गुजरात मॉडल के नाम पर बीजेपी देश के अन्य राज्यों में वोट मांगती आयी है। यदि गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी अच्छा नहीं कर पाती है तो इसका खामियाजा उसे लोकसभा चुनाव 2019 में भी भुगतना पड़ सकता हैं। राजनीतिज्ञ गुजरात के चुनाव को खासतौर पर लोकसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट मान रहे हैं। गुजरात के अलावा हिमाचल प्रदेश समेत अन्य कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। विधानसभा चुनाव के नतीजे काफी हद तक लोकसभा चुनाव की तस्वीर साफ कर देंगे।  पिछले कुछ महीनों में केन्द्र सरकार कुछ मुद्दों की वजह से बैकफुट पर है। आर्थिक मुद्दे पर घिरी केन्द्र सरकार सबकुछ ठीक होने के दावे तो कर रही है लेकिन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अपने रिसर्च में दावा कर चुकी है कि वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 6 फीसदी से नीचे रहने के आसार हैं। चालू वित्त की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान जीडीपी आंकड़े तीन साल के न्यूनतम स्तर 5.7 फीसदी पर पहुंच गई थी। इस गिरावट के लिए नोटबंदी और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी)को जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि एसबीआई रिसर्च के मुताबिक गिरावट का यह सिलसिला चालू वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही के दौरान 6.5 फीसदी पर आकर थम जाएगा, लेकिन दूसरी तिमाही के आंकड़ों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुजरात में वोटिंग की है। गौरतलब है कि आमतौर पर दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ें एक नवंबर तक जारी हो जाने चाहिए थे लेकिन सरकार ने आंकड़े जारी नहीं किए। दरअसल, गुजरात में आर्थिक मुद्दे पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भाजपा को घेरने में जुटे हुए हैं। अपनी बात को गुजरात की जनता के बीच रखने के लिए कांग्रेस ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत पार्टी से जुड़े सभी छोड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों की मदद ली है। इतना ही नहीं राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की पहल के बाद सवाल उठ रहा है कि केन्द्र सरकार चुनावों के मद्देनजर आर्थिक आंकड़ों के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार को डर है कि कहीं दूसरी तिमाही के आने वाले आंकड़ें कांग्रेस के हमले को बल न दे दें और उन्हें चुनावों में मुंह की खानी पड़े। ऐसे ही संसद का शीतकालीन सत्र की तारीख का ऐलान न होने की वजह से केन्द्र सरकार विरोधियों के निशाने पर है। गौरतलब है कि संसद का शीतकालीन सत्र आमतौर पर नवंबर के तीसरे हफ्ते में शुरू हो जाता है लेकिन दिसंबर में गुजरात विधानसभा चुनावों के मद्देनजर संसद का यह अहम सत्र फिलहाल टाल दिया गया है। आमतौर पर दीपावली के आसपास कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स शीतकालीन सत्र की तारीख निर्धारित कर देती है, लेकिन दीपावली को बीते एक महीने से ऊपर हो चुका है और इस आशय से केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक नहीं बुलाई गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार ने ऐसा गुजरात चुनाव की वजह से किया है। सूत्रों का दावा है कि अब शीतकालीन सत्र का ऐलान गुजरात चुनावों में प्रचार थमने के बाद किया जाएगा। इसके अलावा फिलम पद्मावती के मुद्दे पर केन्द्र सरकार की चुप्पी अनेक सवाल खड़ी करती है। पिछले एक पखवाड़े से पूरे देश में इस फिल्म पर महासंग्राम छिड़ा हुआ है और केन्द्र सरकार चुप्पी साधे हुए है। करणी सेना ने तो फिल्म की अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की नाक काटने की धमकी तक दे दी है। देशभर से बीजेपी सांसद, विधायक और नेता फिल्म के विरोध में सुर तेज कर रहे हैं। हालांकि फिल्म की रिलीज को गुजरात चुनावों के प्रचार तक टालने के संकेत दिए जा चुके हैं। माना जा रहा है कि फिल्म में रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच दर्शाए गए प्रेम पर देश भर से राजपूत परिवारों ने आपत्ति उठाई है। इन लोगों का कहना है कि फिल्म में इतिहास को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि फिल्म के विरोध में बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस नेताओं ने भी अपना सुर अलापा है। अब राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि इस विवादित फिल्म पर विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल भी खड़ा है। लिहाजा संभावना है कि इस फिल्म को भी गुजरात में चुनावों से पहले रिलीज नहीं किया जाएगा। 

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