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नगर निगम के दावों की पोल खोल रही इंदिरा नगर की बदहाली, सडक़ और प्लाटों को बना दिया गया कूड़ाघर

खाली प्लाटों में जलभराव के कारण क्षेत्र में फैल रही दुर्गंध, संक्रमण का खतरा बढ़ा
मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त से शिकायत के बाद भी नहीं सुधरे हालात

विनय शंकर अवस्थी
लखनऊ। एक ओर शहर के पॉश इलाकों में स्वच्छता अभियान के दावे किए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर तमाम इलाके अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। कुछ इलाकों को छोड़ दिया जाए तो बजबजाती नालियां, खस्ताहाल सडक़ें, कूड़े के ढेर और आवारा जानवर शहर की पहचान बन चुके हैं। यह हाल तब है जब नगर निगम लम्बे समय से शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे कर रहा है। शहरों के कई इलाके मलिन बस्ती के रूप में नजर आ रहे हैं। ऐसे में स्मार्ट सिटी के दावे मुंह चिढ़ा रहे हैं। बता दें कि जब लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने की बात शुरू हुई थी तक लोगों को लगा था कि उन्हें पक्की सडक़ें, बेहतर सफाई व्यवस्था, शुद्ध जलापूर्ति व अन्य मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिलेगा, लेकिन अभी तक लोगों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। लोगों को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इससे लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
नगर निगम शहर में लगातार स्वच्छता अभियान चलाने और विकास होने के दावे कर रहा है लेकिन समस्याएं इन दावों की पोल खोल रही हैं। इंदिरा नगर इलाके के शिवाजी पुरम, विमल नगर, कमता, तकरोही, वैश्रोंपुरम, मयूर विहार, चंदनपुर समेत आस-पास के तमाम इलाकों की हालत खराब है। इलाके को देख कर उसको एक मलिन बस्ती कहना गलत नहीं होगा। यहां चारों तरफ गंदगी फैली है। सडक़ों और खाली प्लाटों में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इन कूड़े के ढेर पर आवारा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है। रही सही कसर क्षेत्र में संचालित अवैध डेयरियां पूरी कर रही हैं। इन डेयरियों के जरिए गंदगी फैलाई जा रही है। डेरी संचालक खाली प्लाटों और सडक़ पर गंदगी फैला रहे हैं। नतीजन इलाके में दुर्गंध का माहौल है। लोगों का सडक़ पर निकलना मुश्किल हो चुका है। इलाके में अवैध डेयरियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

अफसरों के झूठे दावे के कारण नहीं हो रहा समस्या का समाधान

शिवाजीपुरम की जन विकास कल्याण सेवा समिति के मुख्य संरक्षक विजय गुप्ता ने बताया कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर कई बार मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त से शिकायत की थी लेकिन आज तक क्षेत्र की समस्या का समाधान नहीं हुआ। इस संबंध में नगर निगम के अधिकारियों ने जिलाधिकारी को पत्र के माध्यम से गलत जानकारी दी। उन्होंने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि शिवाजीपुरम इंदिरा नगर के बाहरी इलाके की अनियोजित कॉलोनी है। कॉलोनियों में बहुत से खाली प्लॉट पड़े हुए हैं जिनमें आसपास के लोग गंदगी फैला देते हैं। प्लॉट मालिकों का नाम व पता की जानकारी भी की जा रही है। इससे समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।

क्या कहना है लोगों का
सरोज ने बताया कि क्षेत्र में खाली प्लाट कूड़ाघर बन चुके हैं। जिसके कारण दुर्गंध का माहौल रहता है। समस्या को लेकर कई बार नगर निगम के अफसरों से शिकायत की जा चुकी है लेकिन कोई समाधान नहीं हो सका है।

राम सिंह का कहना है कि टूटी नालियों के कारण घरों से निकलने वाला गंदा पानी खाली प्लाटों में भर जाता है। जिससे क्षेत्र में दुर्गंध फैली रहती है साथ ही इलाके में संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।

आरती रावत का कहना है कि इलाके में डेयरियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। डेयरी संचालकों द्वारा खाली प्लाटों में गोबर डाल कर गंदगी फैलाई जा रही है।

अफरोज रिजवी के मुताबिक इलाके में कूड़ा उठाने की कोई उचित व्यवस्था न होने के कारण जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा रहता है जिसमें दिन भर आवारा जानवरों का झुंड घूमता रहता है। इससे इलाके में दुर्गंध फैली
रहती है।

मो. जमा का कहना है कि इलाके में सफाई न होने से नालियां चोक हो गई हैं। नालियों का पानी सडक़ पर बहता है जिससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है।

बसंत ने बताया कि क्षेत्र में बने खाली प्लाटों की संख्या ज्यादा है। क्षेत्र में कूड़ा डालने के लिए कोई स्थान नहीं है। लोग इधर-उधर कूड़ा डालते हैं और सफाई करने वाले भी नहीं आते हैं।

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