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अब तक का सबसे खराब साबित हुआ यूपी का स्थानीय निकाय चुनाव

उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में जीत हासिल करने के लिए योगी सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। सीएम योगी खुद पूरे प्रदेश में जगह-जगह चुनावी रैली कर वोट की अपील की। योगी के साथ डिप्टी सीएम और उनके मंत्री भी चुनाव प्रचार में लगे रहे। मतदाताओं के सामने सीएम योगी ने अपने सात महीने की उपलब्धियों को गिनाया। कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर पर योगी ने हर बार यही कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा, लेकिन अपने पहली ही परीक्षा में योगी सरकार कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर फेल हो गई। प्रदेश में तीन चरण में निकाय चुनाव संपन्न हुआ। तीनों चरणों में अव्यवस्था चरम पर रही। प्रदेश में कुल 16 नगर निगमों, 198 नगर पालिकाओं और 438 नगर पंचायतों के चुनाव हुए। 22 नवंबर को 24 जिलों की 230 नगर निकायों के लिए मतदान हुआ। मतदान के दौरान कई जगह से हिंसा की खबरें आईं। सबसे ज्यादा बवाल मेरठ में हुआ। मेरठ नगर निकाय चुनाव में रशीद नगर में चल रहे निकाय चुनाव में कांग्रेस महापौर प्रत्याशी के पति ने ईवीएम में गड़बड़ी की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि बटन कोई और दबा रहे हैं लेकिन वोट कमल पर जा रहा है। वहीं मेरठ के आशियाना स्थित रोजी पब्लिक स्कूल में आईडी को लेकर एजेंट और वोटरों में भिड़ंत हो गई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन मामला शांत नहीं हुआ जिसके बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए मामले को शांत किया। इसके अलावा कानपुर, आगरा, अयोध्या, उन्नाव, हापुड़ में भी ईवीएम में गड़बड़ी और वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम गायब होने की शिकायतें मिली। छिटपुट हिंस भी हुई। ऐसा ही स्थिति 26 नवंबर को दूसरे चरण के मतदान में भी देखने को मिली। अव्यवस्था चरम पर रही। राजधानी लखनऊ भी इससे अछूता नहीं रहा। भारी संख्या में मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम गायब रहे। और तो और इस बार निकाय चुनाव में यहां अब तक सबसे कम लगभग 38 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। दर्जनों बूथों पर सूची में नाम न होने पर मतदाताओं ने हंगामा किया। बाकी जिलों में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। 29 नवंबर को तीसरे व अंतिम चरण के मतदान में भी कई जगह विरोध प्रदर्शन, अव्यवस्था और पोलिंग का बहिष्कार किया गया। कई जगह पुलिस को मामला शांत कराने में लाठियां भांजनी पड़ी। पश्चिम उत्तर प्रदेश में बागपत, सहारनपुर और बुलंदशहर में एक-दो स्थानों पर फर्जी वोटिंग को लेकर हंगामा हुआ। सहारनपुर, बागपत व बुलंदशहर जिलों में भी फर्जी वोट डालने की खबरें मिली। बागपत में तो फर्जी वोट डालने को लेकर जमकर हंगामा हुआ। पुलिस और फर्जी वोट डाल रहे युवक में हाथापाई हुई। इससे अफरा-तफरी मच गई। बाराबंकी के पीर वटावन के वार्ड 26 में पुलिस ने मतदाताओं पर जमकर लाठियां बरसाई और एजेंटों की कुर्सियां तोड़ डाली। जिसके बाद जनता ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। दूसरी तरफ सहारनपुर के नानौता नगर पंचायत क्षेत्र में पुलिस ने फर्जी वोट डालते तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है। वहीं जौनपुर के दो वार्डों में करीब 500 लोगों के नाम गायब होने के बाद लोगों ने प्रदर्शन किया। मतदाता सूची में नाम न होने के बाद सरस्वती कॉलेज के बूथ 151 पर लोगों ने प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं वार्ड-28 जोगियापुर और 24 नक्खास के बूथ में लोग जबरन घुस गए। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें खदेड़ कर बाहर किया। दूसरी तरफ तमाम जिलों से भी मतदाता सूची में गड़बड़ी के मामले सामने आए। लखीमपुर खीरी में जहां मृतकों के नाम वोटिंग लिस्ट में थे तो वहीं कई लोगों के नाम काट दिए गए थे। इतना ही नहीं कई जगहों पर मतदान केंद्र भी बदल दिए गए थे। जौनपुर में सपा सरकार में मंत्री रहे पारसनाथ यादव समेत उनके पूरे परिवार का नाम वोटर लिस्ट से गायब था।
कुल मिलाकर गुड गवर्नेंंस का दावा करने वाली सरकार ने निकाय चुनाव के पहले चरण से भी सबक नहीं लिया। पहले चरण में जिस तरह की लापरवाही बरती गई वह दूसरे और तीसरे चरण के मतदान में भी बरकरार रही। इस पर राज्य निर्वाचन आयोग ने भी अपना असंतोष जाहिर किया है। साफ है योगी सरकार अपने पहले इम्तिहान में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर फेल साबित हुई।

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