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भव्य और सुविधा संपन्न होगा केदार धाम

देहरादून। सरकार केदारपुरी को भव्य स्वरुप देने और तीर्थयात्रियों को यहां पर्याप्त सुविधाएं देने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस बारे में समीक्षा बैठक भी की और कहा कि यह ऐसा तीर्थस्थल होगा जहां, तीर्थयात्रियों को बेहतरीन अनुभव होगा और उनके साथ ही तीर्थ पुरोहितों व निवासियों की सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा। केदारधाम पुनर्निर्माण योजना से जुड़े प्रस्तुतीकरण को देखने के दौरान उन्होंने इस योजना के हर फ्रेम को गौर से समझा। योजना के मुताबिक केदार धाम को छह हिस्सों में बांटा गया है। इसमें यात्रियों की सुविधाओं, सुरक्षा, पुरोहितों की व्यवस्था और अवस्थापना सुविधाओं को शामिल किया गया है।
अवस्थापना सुविधाओं में बिजली की लाइन, पेयजल लाइन, संचार व्यवस्था और सीवरेज पर कार्य किया जाएगा। ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि सीवरेज की लाइन मुख्य मार्ग में नहीं होगी। यह धाम के बाहरी परिसर से होते हुए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में जाएगी। शुरू में 20 हजार आते-जाते रहने और पांच हजार स्थाई लोगों को ध्यान में रख के योजना बनाई जाएगी। सिंचाई, पेयजल, बिजली, पर्यटन और संचार से जुड़े विभाग भी इस मामले में अपनी राय देंगे। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के मुताबिक मई 2018 तक बिजली के केबलों को भूमिगत कर दिया जाएगा। इसके साथ ही अन्य जरूरी सुविधाओं को विकसित करने की तैयारी की जा रही है। प्रमुख सचिव (गृह) आनंदबर्धन, पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर, पेयजल सचिव अरविन्द सिंह हयांकी, रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल भी प्रस्तुतीकरण के दौरान मौजूद थे।
सरकार चाहती है कि लोकसभा चुनाव से पहले ही केदार धाम को ऐसा स्वरुप दे दिया जाए कि अगले लोकसभा चुनाव के दौरान इसको उपलब्धि के तौर पर पेश किया जाए। इस दिशा में हालांकि पिछली सरकार ने भी बहुत कोशिश की थी लेकिन जब कांग्रेस की सरकार थी तो वह पुनर्निर्माण के बजाय घोटालों में घिर गई थीं। उस पर निर्माण कार्यों के ठेके उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम और निगम के जरिये अपने चहेते एक चर्चित ठेकेदार को ही ठेका दे देने के आरोप लगे थे। यह बात अलग है कि तब सरकार के मुखिया के तौर पर विजय बहुगुणा थे, जो मुख्यमंत्री थे। आज वह बीजेपी में हैं और पिछली कांग्रेस सरकार गिराने में अहम् भूमिका निभाई थी। अब जब बीजेपी सरकार में है तो वह केदारधाम के पुनर्निर्माण को अधिक बेहतर और व्यवस्थित तरीके से कराने में जुटी है। उसकी कोशिश है कि धाम की ऐतिहासिकता बरकरार रहे और सुविधाएं आधुनिक हों, जिससे धाम में न तो गन्दगी हो और न ही किसी को किसी किस्म की असुविधा ही हो।
केदारनाथ में आपदा आने से पहले जितने तीर्थ यात्री आते थे, सरकार की कोशिश उससे ज्यादा लोगों को दर्शन के लिए प्रेरित करने की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केदारनाथ यात्रा भी इसका ही हिस्सा थी, जिससे लोगों में केदार धाम को लेकर कोई शुबहा न रहे। आपदा से पहले केदारनाथ धाम की यात्रा करना काफी दुष्कर भरा था, लेकिन सरकार ने अब रास्तों को पहले से बेहतर ही नहीं कर दिया है बल्कि ठहरने के बंदोबस्त भी अधिक अच्छे कर दिए हैं। अब उसकी कोशिश मौजूदा व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने की है।

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