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हिमालयन मेडिकल कॉलेज का दीक्षांत समारोह

मां,जन्मभूमि और मातृभाषा का सम्मान करें
उपराष्ट्रपति ने बांटी युवा डॉक्टरों को डिग्रियां

देहरादून। राजधानी के स्वामी राम हिमालयन मेडिकल कॉलेज में दूसरे दीक्षांत समारोह में युवा डॉक्टर्स को उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने डिग्रियां बांटीं। इस मौके पर उन्होंने मां, जन्मभूमि और मातृभाषा का हमेशा सम्मान करने और कभी न भूलने को कहा। उन्होंने मातृभाषा को आंख और विदेशी भाषा को चश्मा बताया तथा कहा कि अन्य भाषा सीखने में हर्ज नहीं है पर मातृभाषा का स्थान सबसे ऊपर है। जो भावनाएं अपनी भाषा में व्यक्त की जा सकती है, वह अन्य भाषा में मुमकिन नहीं है। प्राथमिक शिक्षा बच्चों को अपनी भाषा में ही दी जानी चाहिए।
दीक्षांत समारोह में शामिल छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि कड़ी मेहनत और अनुशासन से ही सपने साकार होते हैं। मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। साथ ही अपनी संस्कृति और परम्पराओं का भी सम्मान करने तथा इस पर गर्व करने की भी उन्होंने जरूरत जताई। भारतीय संस्कृति को उन्होंने सर्वश्रेष्ठ करार दिया तथा कहा कि अनेक भाषाएं और बोलियों के बावजूद यह नहीं भूलना चाहिए कि देश एक है। शिक्षा के महत्व पर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ रोजगार देने के लिए नहीं है बल्कि मस्तिष्क को आलोकित भी करता है। शिक्षा ही इंसान को सामथ्र्यवान और संस्कारवान बनाता है। चिकित्सा व्यवसाय को बहुत पवित्र बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा धर्म मानव सेवा है। इसको नहीं भूलना चाहिए। वेंकैया ने भारत के नव निर्माण की जरुरत जताई और कहा कि स्किल इंडिया, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, स्वच्छ भारत मिशन, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के जरिये सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है। इस कार्य में युवाओं की भूमिका को अहम बताया। गांवों से पलायन की समस्या पर उन्होंने कहा कि इसको रोकने के लिए मोदी सरकार कार्य कर रही है। इस समस्या का इलाज पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा मॉडल सहायक साबित हो सकता है। राज्यपाल केके पॉल ने वर्तमान काल को ज्ञान का काल बताया तथा विश्वविद्यालयों को ज्ञान का सृजन केंद्र बनने की जरूरत जताई। साथ ही मौलिक और स्तरीय शोध को महत्व देने पर बल दिया। युवाओं को जागरूक और दक्ष बनाने वाली शिक्षा पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
पॉल ने कहा कि जब वे पढ़ते थे तो भारत की गिनती तीसरे विश्व के देशों में की जाती थी। आज उसको शक्तिशाली देश के तौर पर सम्मान दिया जाता है। पलायन को सरकार के लिए चिंता का सबब बताने के साथ उन्होंने कहा आने वाले सालों में इस समस्या को रोकने में सरकार की कोशिशों का नतीजा जरूर दिखाई देगा। उन्होंने स्वामी राम हिमालयन मेडिकल कॉलेज को एक हजार से ज्यादा गांव गोद लेने के लिए बधाई भी दी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अच्छी शिक्षा के साथ ही सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास को भी जरूरी बताया। स्वामीराम को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने एक छोटे से गांव में जन्म लिया था लेकिन अपनी सोच और मेहनत के बूते उन्होंने इतना बड़ा संस्थान खड़ा कर दिया।
मुख्यमंत्री ने युवा चिकित्सकों से कहा कि उनको मरीजों के साथ हमेशा आत्मीयता भरा संबंध रखना चाहिए। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने उम्मीद जताई कि अगले तीन सालों में उत्तराखंड उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के मामले में देश में सबसे ऊपर होगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार टैलेंट सर्च के जरिये चयनित 100 छात्रों को निशुल्क शोध की सुविधा देगी। साथ ही आईपीएस, आईएएस और अन्य बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी मुफ्त कोचिंग की सुविधा दी जाएगी। इस मौके पर मेडिकल कॉलेज के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने कॉलेज के पाठ्यक्रमों और गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। समारोह में 400 छात्र-छात्राओं को डिग्री दी गई।

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