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4पीएम की खबर से हडक़ंप

डीजीपी ने एसएसपी से कहा तत्काल जांच कराएं इन फ्लैटों की, अगर अपराधियों ने लिए हों फ्लैट तो किए जाएं जब्त

डीजीपी सुलखान सिंह ने पुलिस अधिकारियों को 4पीएम की खबर की कटिंग के साथ दिए आदेश
टीम बना कर पुलिस करेगी जांच, 15 दिन के अंदर मांगी रिपोर्ट, एलडीए से मांगी जाएंगी लिस्ट

वीकएंड टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। 4पीएम की खबर के बाद एक बार फिर राजधानी में हडक़ंप मच गया है। गोमती नगर विस्तार की कई कॉलोनियों में राजनेताओं और अफसरों द्वारा कालेधन खपाने की खबर 4पीएम में प्रकाशित होने के बाद सरकार ने अब कार्रवाई शुरू कर दी है। डीजीपी सुलखान सिंह ने इस मामले में वरिष्ठï पुलिस अधीक्षक को पत्र जारी कर मामले की जांच-पड़ताल करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। पत्र में उन बिंदुओं पर जांच करने को कहा गया है जिसे 4पीएम ने अपनी खबर में उठाया था। डीजीपी ने टीम बनाकर गोमतीनगर विस्तार के एलडीए के फ्लैटों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 15 दिन के अंदर रिपोर्ट तलब की है। पुलिस के इस कदम से कई बड़ी मछलियों के फंसने की संभावना है।
4पीएम ने अपने 28 नवंबर के अंक में गोमती नगर विस्तार में करोड़ों का कालाधन खपाया राजनेताओं और अफसरों ने, शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। पड़ताल से पता चला कि गोमतीनगर विस्तार में फ्लैट बुकिंग के नाम पर खूब कालाधन खपाया गया। यह भी पता चला था कि सरस्वती अपार्टमेंट में 319 फ्लैट हैं, जिसमें से 42 फ्लैट ऐसे हैं जो कभी खोले ही नहीं गए। यमुना अपार्टमेंट में एक दर्जन से ज्यादा फ्लैटों का ताला कभी नहीं खुला। यही हाल गंगा, शारदा, अलकनंदा समेत एक दर्जन सोसायटी का है। जहां दर्जनों फ्लैट सालों से कभी नहीं खुले। इनमें से अधिकांश फ्लैट किसी अंजान व्यक्ति के नाम या अपने रिश्तेदारों के नाम से खरीदे गए हैं, जिससे उन तक कभी भी पहुंचा न जा सके। इस संबंध में सोसायटी के पदाधिकारियों न एलडीए को भी कई खत लिखे, मगर एलडीए ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि इन बंद पड़े फ्लैटों से एलडीए का कोई लेना-देना नहीं है। गौरतलब है कि एक फ्लैट की कीमत 70 से 75 लाख रुपए है। यही नहीं सरस्वती अपार्टमेंट का 103 नंबर फ्लैट इस बात की गवाही दे रहा है कि किस तरह राजनेताओं ने अपनी काली कमाई छिपाने के लिए गोमती नगर विस्तार में भी संपत्ति खरीद डाली मगर उसके बाद कभी मुडक़र उस संपत्ति की तरफ नहीं देखा। यह फ्लैट पूर्वमंत्री रंगनाथ मिश्रा का है। इस फ्लैट में सोसायटी की तरफ से मेंटीनेंस का नोटिस तक लगाया गया, मगर आज तक न तो नोटिस का जवाब मिला और न ही यह फ्लैट कभी खुला। 4पीएम में खबर प्रकाशित होने के बाद सरकार में हडक़ंप मच गया था। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने 4पीएम से बात करते हुए मामले की जांच कराने की बात कही थी। इसलिए सरकार के संज्ञान में मामला आने के बाद पुलिस महकमा सक्रिय हो गया है।
इस मामले में डीजीपी सुलखान सिंह ने 29 नवंबर को राजधानी लखनऊ के वरिष्ठï पुलिस अधीक्षक को पत्र लिख कर मामले की जांच-पड़ताल करने को कहा है। डीजीपी ने खबर का हवाला देते हुए जारी पत्र में लिखा है कि छद्म नामों से एलडीए के फ्लैट क्रय किए गए है, यह धोखाधड़ी और जालसाजी का अपराध है। लोकसेवकों ने कई-कई फ्लैट खरीदे हैं। यह भ्रष्टïाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत अपराध है। सरस्वती अपार्टमेंट के बंद फ्लैटों और नाम पता गलत होने का संज्ञान भी पुलिस ने लिया है। यही नहीं डीजीपी कार्यालय से जारी पत्र में पूर्व में गोमतीनगर विस्तार के एक फ्लैट में किसी अपहृत को छिपाकर रखने का हवाला भी दिया गया है। यह भी आशंका जताई गई है कि माफिया और अन्य संगठित अपराधी फर्जी नाम से फ्लैट लेकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम तो नहीं दे रहे हैं। डीजीपी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को टीम बनाकर गोमतीनगर विस्तार स्थित एलडीए के फ्लैटों की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार ने 4पीएम की खबर का संज्ञान पहले ही ले लिया। पीएम मोदी जी और सीएम योगी कालाधन और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। इस मामले में भी कार्रवाई होगी।
-श्रीकांत शर्मा, ऊर्जा मंत्री
डीजीपी सर के निर्देशों के अनुपालन में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस अधीक्षक नगर को दस दिन के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट देने के निर्देश दे दिए गए हैं।
-दीपक कुमार, एसएसपी, लखनऊ

पुलिस ऐसे करेगी जांच

गोमतीनगर विस्तार के तमाम फ्लैटों की जांच के लिए पुलिस ने योजना तैयार की है। पुलिस यहां स्थित सभी अपार्टमेंट की सोसायटी से फ्लैटों की सूची लेकर उसका सत्यापन लखनऊ विकास प्राधिकरण से कराएगी। सत्यापन के दौरान इस बात पर भी गौर किया जाएगा कि फ्लैट मालिक की हैसियत क्या है? क्या वह इतने महंगे फ्लैट खरीद सकता है। इस दौरान फ्लैट में रहने वाले किराएदारों के बारे में भी पुलिस गहन जांच-पड़ताल करेगी।

मौके पर होगी कार्रवाई
पुलिस टीम को निर्देश दिए गए है कि जांच के दौरान धोखाधड़ी और जालसाजी के संकेत मिलते ही मौके पर एफआईआर दर्ज की जाए। पूरे मामले की जांच पड़ताल की जाए। फर्जी नामों या बिना हैसियत से लिए गए फ्लैटों के मामले में यह भी देखा जाए कि इसका संबंध किसी अपराधिक गैंग से तो नहीं हैं। गैंग से संबंध मिलने पर गिरोह बंद अधिनियम के तहत संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी और संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।

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