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नगर निगम की खराब आर्थिक हालत ने विकास कार्यों पर लगाया ब्रेक, 200 करोड़ की देनदारी

लगातार गिरे रहे वसूली के ग्राफ ने बढ़ाई मुसीबत, पूरा नहीं हो रहा लक्ष्य
शासन से मिले 20 करोड़ भी हो चुके हैं खर्च
31 मार्च से स्वीकृत नहीं हो रहे नए विकास कार्य
बजट सील लगने के बावजूद पुरानी फाइलें फांक रहीं धूल

विनय शंकर अवस्थी

लखनऊ। नगर निगम की खस्ता आर्थिक हालत ने विकास कार्यों पर ब्रेक लगा दिया है। वसूली का ग्राफ लगातार गिरने से मुसीबत और बढ़ गई है। इससे नए विकास कार्यों को मंजूरी नहीं मिल पा रही है। शासन ने मिले 20 करोड़ खर्च हो चुके हैं। हालत यह है कि नगर निगम पर अभी भी 200 करोड़ की देनदारी है। लिहाजा बजट सील लगने के बावजूद पुरानी फाइलें धूल फांक रही हैं।
शासन से 20 करोड़ मिलने के बाद भी नगर निगम की आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। शासन से मिली रकम कर्मचारियों की देनदारी और ठेकेदारों के बकाए भुगतान में खर्च हो चुकी है। नगर निगम पर अभी भी कर्मचारियों और ठेकेदारों का 200 करोड़ से अधिक बकाया है। नगर निगम के आठ जोनों से वसूली तय लक्ष्य के अनुसार नहीं हो पा रही है, जिसके कारण विभाग की स्थिति खराब हो गई है। आर्थिक स्थिति खराब होने का सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर पड़ रहा है। इस संबंध में नगर निगम के अफसरों का मानना है कि निकाय चुनाव के कारण नगर निगम की वसूली का ग्राफ नीचे गिरा है, जिसके चलते नवंबर माह में वसूली में कमी आयी है। हालांकि नगर आयुक्त उदयराज सिंह हर सप्ताह जोनल कार्यालयों से हो रही वसूली की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन वसूली में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है। हालत यह है कि निगम की खस्ता हालत को देखते हुए ठेकेदारों ने काम करने से मना कर दिया है।
नगर निगम में बजट न होने के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पिछले छह महीने से हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि नगर निगम की ओर से शहर में कोई भी नया कार्य स्वीकृत नहीं किया जा रहा है। नगर निगम में रजिस्टर्ड ठेकेदारों की फर्मों का बकाया लगभग 125 करोड़ से अधिक पहुंच चुका है। पुराने हो चुके कार्यों का भुगतान न होने के कारण ठेकेदार नया काम लेने से पीछे हट रहे हैं। कारण यह है कि प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद भी लेखा विभाग में 500 से ज्यादा फाइलें बजट सील लगने के लिए रूकी हुई हैं। कुछ फाइलें बजट सील लगने के बाद भी धूल फांक रही हैं, जिन ठेकेदारों के यहां शादी या अन्य कारणों से पैसे की जरूरत है, उनको ही कुछ भुगतान किया गया है। भुगतान के लिए कोई फाइल लेखा विभाग न पहुंचे इसके लिए भी लेखाधिकरी ने संबंधित अभियंताओं को निर्देश दिए हैं। अफसरों के मुताबिक सरकार ने निगम के विभिन्न मदों में मिलने वाले बजट में कटौती कर दी है, जिसके चलते विभाग की आर्थिक हालत खराब है। विभाग की टैक्स वसूली और अन्य मदों की रकम कर्मचारियों के वेतन में जा रही है। 20 करोड़ का बजट खर्च होने के बावजूद कार्यदायी संस्था के कर्मियों का वेतन अभी भी फंसा है। विभाग में रजिस्टर्ड एजेंसियों का भी भुगतान लंबित है। मार्च में हुई कार्यकारिणी की बैठक में वार्ड विकास निधि को बढ़ा कर 85 लाख कर दिया गया था, जिसकी पहली किश्त 20 लाख रुपये के रूप में जारी की गई थी। यह किश्त तीन महीनों के लिए थी।

जोनल कार्यालयों से वसूली कम हो रही है। लिहाजा आर्थिक स्थिति खराब है। खजाना खाली होने के कारण लगभग 200 करोड़ की देनदारी हो गई है। जो बजट मिला था उससे कर्मचारियों का बकाया भुगतान कर दिया गया।
निजलिंगप्पा,
मुख्य एवं वित्त लेखाधिकारी, नगर निगम
वसूली के लिए सभी जोनल अफसरों का लक्ष्य निर्धारित है। वसूली के संबंध में लागातर समीक्षा बैठक की जा रही है। जिस जोन से तय लक्ष्य के मुताबिक वसूली नहीं होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
-उदयराज सिंह,
नगर आयुक्त
20 करोड़ का बजट खर्च होने के बावजूद कार्यदायी संस्था के कर्मियों का वेतन अभी भी फंसा है। विभाग में रजिस्टर्ड एजेंसियों का भी भुगतान लंबित है।

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