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प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की जान से खिलवाड़, स्वास्थ्य विभाग खामोश

इलाज के दौरान हुई मौतों पर जांच टीम गठित कर पल्ला झाड़ रहा विभाग
महीनों बाद भी नहीं आई जांच रिपोर्ट, कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं अफसर
स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती से प्राइवेट अस्पताल संचालकों के हौसले बुलंद
मरीजों से जांच व इलाज के नाम पर मोटी कमाई कर रहे अस्पताल

वीकएंड टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्राइवेट अस्पतालों पर मरीजों के साथ इलाज में लापरवाही बरतने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लापरवाही के कारण कई मरीजों की मौत तक हो चुकी है। वहीं जांच के नाम पर स्वास्थ्य विभाग टीम गठित कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रही है। कड़ी कार्रवाई नहीं होने के कारण प्राइवेट अस्पतालों के संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
पिछले तीन माह के दौरान राजधानी के प्राइवेट अस्पतालों में मरीज के इलाज में जमकर लापरवाही बरती गई। ऐसे कई मामले स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में आ चुके हैं। कुछ मामलों में लापरवाही के कारण मरीज के जान तक चली गई है। यही नहीं ये अस्पताल मरीजों से जांचों के नाम पर मोटी कमाई कर रहे हैं। अगस्त माह में अमेठी निवासी राजेश सिंह की तेलीबाग के जावित्री अस्पताल में ऑपरेशन के समय ओटी टेबल पर मौत हो गई। राजेश को सांस लेने में दिक्कत थी और साथ ही उसे सिर में दर्द की समस्या भी थी। परिजनों के मुताबिक राजेश को जावित्री अस्पताल की ओपीडी में दिखाया था। यहां डॉक्टर ने उसकी नाक की हड्डी टेढ़ी होने की बात कह कर जल्द से जल्द से ऑपरेशन की सलाह दी। परिजन उसका ऑपरेशन कराने के लिए अस्पताल पहुंचे। जहां ऑपरेशन केदौरान ओटी टेबल पर ही मरीज की मौत हो गई। डॉक्टरों ने मरीज की मौत को घंटों तक दबाए रखा। बाद में दिल का दौरा पडऩे से मौत हो जाने की बात परिजनों को बताई गई। जब घरवालों ने हंगामा करना शुरू किया तो जबरन शव को गाड़ी में लदवाकर भेज दिया गया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने गलत एनेस्थीसिया दिया, इसके कारण मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने इसकी शिकायत सीएमओ से की थी। मामले को संज्ञान में लेते हुए सीएमओ डॉ. जीएस वाजपेयी ने जांच के लिए टीम गठित कर दी थी। वहीं दूसरी ओर डेढ़ माह पूर्व सहारा सिटी के रामलाल ने अपनी पत्नी राधा को प्रसव पीड़ा के बाद गुडंबा के सेंट मेरी अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां सिजेरियन के जरिए प्रसव कराने के बाद प्रसूता की हालत बिगडऩे लगी थी। प्रसूता की हालत अधिक बिगडऩे पर उसे वेंटीलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। इस पर परिजन प्रसूता को इलाज के लिए दूसरे अस्पताल लेकर चले गए थे। पंद्रह दिन बाद प्रसूता की मौत हो गई थी। मौत के बाद परिजनों ने सेंट मेरी अस्पताल प्रशासन को इसका जिम्मेदार बताया था। यही नहीं पति रामलाल व देवर दीपक ने सीएमओ कार्यालय में इसकी शिकायत की थी। इसके अलावा गुडंबा थाने में भी अस्पताल के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। इस मामले में अभी तक जांच पूरी नहीं हो सकी।
दूसरी ओर सेंट मेरी अस्पताल प्रशासन का कहना है कि गर्भवती प्रीएक्लेमशिया से पीडि़त थी। जिसके चलते प्रसव के बाद अचानक उसकी हालत बिगड़ गई थी। इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई थी। वहीं पिछले माह अलीगंज के वीरेंद्र की पत्नी किरन बच्चेदानी की जांच के लिए महानगर के सरकार डायग्नोस्टिक सेंटर में गई थीं। जांच से पहले इंजेक्शन लगाने के बाद महिला बेहोश हो गई थी। इस पर डायग्नोस्टिक सेंटर वालों ने जल्द होश में आने की बात कही। जब काफी देर बाद महिला को होश नहीं आया तो सेंटर के डॉक्टर परीक्षण के बाद उसे बीआरडी अस्पताल में छोडक़र भाग गए। बीआरडी अस्पताल के चिकित्सकों ने महिला को मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद परिवारीजनों ने गलत इंजेक्शन से मौत का आरोप लगाते हुए डायग्नोस्टिक सेंटर पर जमकर हंगामा किया था। ये कुछ घटनाएं है, जो राजधानी में चल रहे प्राइवेट अस्पतालों की लापरवाही की पोल खोलने के लिए काफी हैं। इन सभी मामलों में परिजनों ने सीएमओ कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। मामले को संज्ञान में लेकर इन मामलों की जांच के लिए कमेटी भी बनाई गई, लेकिन आज तक न इस मामले में न कोई रिपोर्ट आई न स्वास्थ्य विभाग ने इन अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई ही की है। जांच को कोई नतीजा नहीं निकलने से परिजन निराश हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हर बार एक ही जवाब देते हैं। मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी लेकिन महीनों बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आई है। साफ है स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट अस्पतालों पर शिकंजा कसने में नाकाम साबित हो रहा है। दूसरी ओर निजी अस्पतालों के संचालक मरीजों की न केवल सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं बल्कि इलाज और जांच के नाम पर मोटी कमाई भी
कर रहे हैं।

इन मामलों की जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. सुनील कुमार रावत
अपर चिकित्सा अधिकारी

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