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2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला : गुनहगार कौन ?

पिछले दिनों सीबीआई की विशेष अदालत के एक फैसले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। जिस 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की वजह से यूपीए को सत्ता गंवानी पड़ी थी, अदालत ने घोटाले में नामजद सभी आरोपियों को बरी कर दिया। छह साल तक इस मामले की पड़ताल हुई और जब फैसला आया तो परिणाम सिफर रहा। कोर्ट के फैसले के बाद पूरे देश में चर्चा शुरु हो गई कि जब ए. राजा और कनिमोझी आरोपी नहीं है तो इस घोटाले को असली गुनहगार कौन है? इस फैसले की वजह से सीबीआई की साख पर बट्टïा तो लगा ही साथ ही यह भी सवाल खड़ा हो गया कि 1.76 लाख करोड़ के घोटाले के सूत्रधार कैसे पकड़ में आएंगे। इतिहास गवाह है कि देश में सभी उलझे मामलों को सीबीआई ने ही सुलझाया है तो फिर 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले के आरोपियों को कौन पकड़ेगा? सीबीआई के कामकाज पर कोर्ट ने वैसे ही बड़ा सवाल खड़ा ही कर दिया है, तो क्या यह समझा जाए कि 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले का अंत भी आरुषि-हेमराज हत्याकांड की जैसा ही होगा।
दूर संचार स्पेक्ट्रम के आवंटन में कथित धांधली के शुरूआती आरोपों के बाद से ही भारतीय राजनीति में जोरदार उथल पुथल शुरू हो गई थी। 2जी घोटाला साल 2010 में प्रकाश में आया जब भारत के महालेखाकार और नियंत्रक ने अपनी एक रिपोर्ट में साल 2008 में किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन पर सवाल खड़े किए। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कंपनियों को नीलामी की बजाए ‘पहले आओ और पहले पाओ’ की नीति पर लाइसेंस दिए गए थे, जिसमें भारत के महालेखाकार और नियंत्रक के अनुसार सरकारी खजाने को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ था। आरोप था कि अगर लाइसेंस नीलामी के आधार पर होते तो खजाने को कम से कम एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये और प्राप्त हो सकते थे। हालांकि महालेखाकार के नुकसान के आंकड़ो पर कई तरह के आरोप थे लेकिन ये एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया था और मामले पर देश के सर्वोच्च न्यायालय में याचिका भी दाखिल की गई। सुप्रीम कोर्ट ने 2जी मामले में सवाल खड़े होने पर 122 स्पेक्ट्रम लाइसेंस रद्द कर दिए थे। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए विशेष अदालत गठित करने का निर्देश दिया था। विशेष अदालत ने अपने फैसले में ए राजा, डीएमके सांसद कनिमोझी समेत सभी 17 आरोपियों को बरी कर दिया। सीबीआई की विशेष अदालत के जज ओपी सैनी ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि वह पिछले सात साल से सभी कामकाजी दिनों में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ओपन कोर्ट में बैठे और इसका इंतजार किया कि कोई कानूनी तौर पर मान्य प्रमाण पेश करेगा लेकिन यह कोशिश बेकार गयी। जज की यह टिप्पणी बेहद गंभीर है और सीबीआई को कटघरे में खड़ा करती है।
देेश में हुए अब तक के घोटालों के इतिहास में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला सबसे बड़ा बताया गया था। इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय और तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम पर भी सवाल उठाए गए। मामले में ए राजा के अलावा मुख्य जांच एजेंसी सीबीआई ने सीधे-सीधे कई बड़ी हस्तियों और कंपनियों पर मुख्य आरोप लगाए थे। पूर्व दूर संचार मंत्री पर आरोप था कि उन्होंने साल 2001 में तय की गई दरों पर स्पेक्ट्रम बेच दिया जिसमें उनकी पसंदीदा कंपनियों को तरजीह दी गई। ए राजा और तमिलनाडू के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की बेटी कनिमोझी को इस मामले में जेल जाना पड़ा था। 2जी घोटाले से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचा है, ऐसा उस समय कहा जा रहा था। यह सच है कि इस घोटाले ने यूपीए की साख को समाप्त कर दिया था। विपक्षी दलों ने भी यूपीए सरकार पर जमकर निशाना साधा था। बीजेपी से लेकर अरविंद केजरीवाल ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को यूपीए के खिलाफ बड़ा हथियार बनाया था। यह हथियार कामयाब भी रहा। यूपीए सत्ता से बेदखल हो गई। केन्द्र की सत्ता में बीजेपी काबिज हुई और दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी सत्तारूढ़ हुई। कांग्रेस उस समय के नुकसान की भरपाई अब तक कर रही है। भ्रष्टाचार पर अभी तक कांग्रेस का रवैया रक्षात्मक रहा है लेकिन इस फैसले के बाद कांग्रेस को भाजपा से मुकाबला करने का नैतिक आधार मिल सकता है।
छह साल पहले 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला प्रकाश में आया था। जाहिर है छह साल तक इस मामले की पड़ताल में कई करोड़ लगे होंगे।
तो क्या यह माना जाए कि इसके लिए दोषी जांच एजेंसियां है? इतिहास गवाह है कि जब भी किसी मामले में नामीगिरामी लोग फंसे हैं, हमारी जांच एजेंसियां सबूत जुटाने में अक्सर असफल हो जाती हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है। आर्थिक अपराधों के लिए सजा दिलाने में हम अक्सर नाकाम हो जाते हैं। इस मामले में भी तमिलनाडु के प्रभावशाली नेता और बड़े कारोबारी लपेटे में आ रहे थे और इस मामले का हश्र क्या हुआ, यह हम सबके सामने है। फिलहाल चर्चा है कि सीबीआई उच्च अदालत में जाने का मन बना रही है। अब देखना होगा कि वहां क्या फैसला आता है। आरुषि मर्डर केस का उदाहरण हम सबके सामने है।

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