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पीएम मोदी और अमित शाह के अलावा कर्नाटक चुनाव में अहम किरदार निभाएंगे सीएम योगी

तू डाल-डाल मैं पात-पात की रणनीति पर काम कर रही है भाजपा
छोटे-बड़े हर मुद्दे पर नजरें गड़ाए हैं भाजपा के नेता

वीकएंड टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी गुजरात के बाद अब कर्नाटक फतह की रणनीति को अमलीजामा पहनाने में जुट गई है। गुजरात की तरह कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का किरदार काफी अहम होगा। भाजपा के पास यहां बीएस येदियुरप्पा जैसा प्रभावी और मुखर नेतृत्व है। वहीं सत्ताधारी कांग्रेस के खिलाफ गिनाने के लिए स्थानीय मुद्दे भी हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के अलावा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुनाव में सक्रिय भूमिका होगी।
मार्च-अप्रैल में विधानसभा चुनाव की संभावित घोषणा से पहले ही वह प्रदेश के सभी सात चुनावी जोन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रैलियों को संबोधित करेंगे। दक्षिण के अपने इस पुराने प्रवेश द्वार में भाजपा इतनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है कि इसकी गूंज दक्षिण तक सुनाई दे। इसी कड़ी में योगी आदित्यनाथ का दौरा अभी से ही शुरू हो गया है, हाल ही में वह कर्नाटक के दौरे पर भी गये थे। इसलिए माना जा रहा है कि चुनाव के दौरान भी वह कर्नाटक में दो दर्जन रैलियां कर सकते हैं। गुजरात चुनाव में भी योगी आदित्यनाथ ने 35 रैलियां की थीं। गुजरात के नतीजों ने यूं तो कांग्रेस को थोड़ा उत्साहित कर दिया है, लेकिन वह यह भी जानती है कि कर्नाटक की राजनीति में जमीन आसमान का फर्क होगा। 2013 में येदियुरप्पा की अलग पार्टी बनने के कारण भाजपा का अपना ही वोट बैंक टूट गया था। वहीं, मोदी लहर 2014 के बाद आई है। इस बार सबकुछ भाजपा के पक्ष में है।

हिन्दुत्व को हवा देने का प्रयास
कर्नाटक में यूपी की आबादी के साथ हिंदुत्व को लेकर योगी का नजरिया भी लोगों को काफी आकर्षित करता है। ठोस रणनीति के साथ मार्च से अप्रैल तक खुद प्रधानमंत्री छह से सात सभाएं कर सकते हैं। येदियुरप्पा की परिवर्तन यात्रा 28 जनवरी को खत्म हो रही है। उस दिन भी प्रधानमंत्री वहां मौजूद रहेंगे। दूसरी ओर कांग्रेस को गुजरात से थोड़ी संजीवनी जरूर मिली है, लेकिन अंदरूनी हालात सही नहीं हैं। वहां येदियुरप्पा की तर्ज पर ही यात्रा की रूपरेखा तो बनी लेकिन अलग-अलग नेताओं को संतुष्ट करने की कोशिश में पार्टी बिखर गई। अब यह देखना होगा कि राहुल गांधी के करिश्मे को कर्नाटक में कितना बल मिलता है।

रिस्क नहीं लेना चाहती भाजपा
भाजपा तू डाल-डाल, मैं पात-पात की रणनीति पर काम कर रही है। भाजपा नेताओं के अनुसार, कर्नाटक चुनाव में कोई भी पेंच ढीला नहीं छोड़ा जाएगा। हर मुद्दे को गंभीरता से लेकर रणनीति तैयार की जा रही है। उसी रणनीति के अनुसार काम किया जायेगा। वहीं कांग्रेस की ओर से परोक्ष तौर पर विशेष समुदाय को स्वतंत्र धर्म का दर्जा दिए जाने की मांग को भी हवा मिली। लेकिन कांग्रेस के पास खुद भाजपा मुख्यमंत्री उम्मीदवार येदियुरप्पा के मुकाबले का कोई लिंगायत चेहरा नहीं हैं। यानी लिंगायत मुख्यमंत्री को हराने के लिए दूसरे समुदाय को वोट देना खुद लिंगायत कितना पसंद करेंगे यह भी रोचक होगा। इसलिए भाजपा और कांग्रेस दोनों दल अभी से सतर्क हो गये हैं।
जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर हो रहा काम
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कुछ समय पहले वोकालिग्गा समुदाय के मठ आदिचुनचुनगिरी गए थे। वहां उन्होंने स्वामी निर्मलानंद के साथ आधा दिन बिताया था। भाजपा के लिए कमजोर और वोकालिग्गा नेता एचडी देवगौड़ा के मजबूत गढ़ मैसूर क्षेत्र के लिए शाह की रणनीति भी कुछ कहती है। इन सबसे ऊपर खुद येदियुरप्पा तीसरी बार पूरे कर्नाटक का दौरा पूरा करने वाले हैं। उनके दौरे के केंद्र में ओबीसी और दलित वोटर हैं। दौरे में वह खुद दलितों के ही घर नाश्ता करते हैं। उन्होंने यह नियम भी बनाया है कि कुछ अंतराल पर उन दलित और ओबीसी परिवारों को अपने घर भोजन कराते हैं जिनके यहां उन्होंने खाना खाया था। रणनीति से स्पष्ट है कि जातिगत समीकरण दुरुस्त रहे और किसानों की आत्महत्या, कानून व्यवस्था जैसे स्थानीय मुद्दे हावी रहें। इतना ही नहीं टीपू सुल्तान जैसे विवाद अभी ठंडे नहीं पड़े हैं। यानी कांग्रेस की ओर से ज्यादा शोर मचा तो उसका उल्टा प्रभाव भी हो सकता है।

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