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वाजपेयी के करीबी रहे स्वामी चिन्मयानंद को मिल सकता है गोरखपुर से टिकट

राम जन्म भूमि आंदोलन को लेकर नब्बे के दशक में सुर्खियों में रहे थे स्वामी चिन्मयानंद
अटल सरकार में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री तो जौनपुर, बदायूं और मछलीशहर से रहे हैं सांसद

वीकएंड टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन द्वारा योगी आदित्यनाथ का गोरखपुर की संसद सदस्यता से इस्तीफा स्वीकार होने के बाद अब गोरखपुर में जल्द ही उप चुनाव होना है। भाजपा समेत सभी दलों में यहां से प्रत्याशी उतारने को लेकर मंथन शुरू हो चुका है। भाजपा खेमे में एक नाम पूर्व केंद्रीय गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद का भी लिया जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद से जुड़़े इस संत के जरिये भाजपा अपने गढ़ को बचाने का रास्ता खोज रही है।
गोरखपुर संसदीय सीट पर गोरक्षपीठ का कब्जा रहा है। पिछले पांच चुनाव तो खुद योगी आदित्यनाथ ने जीते हैं। इससे पहले योगी के गुरु महंत अवैद्यनाथ यहां से सांसद थे। सीट खाली होने के बाद चुनाव आयोग अगले महीने गोरखपुर चुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है। विपक्षी दल जहां इस उप चुनाव को लेकर गठबंधन की राजनीति तैयार करने में जुटे हैं वहीं भाजपा अपने प्रत्याशी को लेकर मंथन कर रही है। स्वामी चिन्मयानंद ने भाजपा के टिकट पर पहला चुनाव बदायूं से लड़ा था और तब बदायूं के सांसद शरद यादव और सलीम शेरवानीको पटकनी देकर स्वामी राजनीति के राष्ट्रीय फलक पर उभरे थे। उस दौरान अयोध्या आंदोलन चरम पर था और स्वामी चिन्मयानंद राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के राष्ट्रीय संयोजक होने के नाते आंदोलन से जुड़े थे। विश्व हिंदू परिषद ने संसद में मंदिर का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने के लिए कुछ संतों को लोकसभा के आम चुनाव में उतारा था जिसमें स्वामी चिन्मयानंद प्रमुख थे। बदायूं के बाद वह मछलीशहर और जौनपुर से भी लोकसभा का चुनाव जीते। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें गृह राज्यमंत्री बनाया गया था। गोरक्षपीठ से स्वामी चिन्मयानंद का बहुत पुराना नाता रहा है। वर्षों से वह गोरक्षपीठ के कार्यक्रमों में जाते रहे हैं। महंत अवैद्यनाथ को वह अपना राजनीतिक प्रेरणा स्त्रोत मानते रहे हैं। शाहजहांपुर और हरिद्वार समेत देश के कई संस्थाओं के अध्यक्ष भी स्वामी चिन्मयानंद रहे हैं। गोरखपुर संसदीय सीट के लिए कई और नामों की भी अटकलें लगाई जा रही हैं जिसमें भोजपुरी गायक रविकिशन का नाम भी है। रविकिशन ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कांग्रेस के साथ की थी, वह पिछला चुनाव जौनपुर से लड़े थे लेकिन बाद में उनका हृदय परिवर्तन हुआ और वह भाजपा से जुड़ गए। कुछ दिन पहले अटलजी के जन्मदिवस पर अटल गीत गंगा कार्यक्रम में उन्होंने अटल जी की कविता को स्वर दिया था और कहा था कि मैं हिंदू हूं और मेरा जन्म मंदिर में हुआ था। इस सीट के लिए पूर्व से ही क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेन्द्रदत्त शुक्ला और गोरक्षनाथ मन्दिर के मुख्य पुजारी स्वामी कमलनाथ भी चर्चाओं में हैं।

चिन्मयानंद का महंत अवैद्यनाथ से है पुराना नाता
स्वामी चिन्मयानंद का गोरखपुर से पुराना नाता रहा है। मालूम हो कि महंत अवैद्यनाथ राम जन्मभूमि न्यास के पहले अध्यक्ष और राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के संयोजक भी थे। वह राम मंदिर निर्माण आंदोलन के दौरान बढ़-चढक़र आगे रहे। वहीं स्वामी चिन्मयानंद भी राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के राष्ट्रीय संयोजक होने के नाते आंदोलन से जुड़े थे। मंदिर आंदोलन में एक साथ काम करने की वजह से ये दोनों लोग करीब आए। महंत अवैद्यनाथ को अपना राजनीतिक प्रेरणा स्रोत मानने वाले चिन्मयानंद गोरक्षपीठ के कार्यक्रमों में जरूर पहुंचते थे। इस तरह गोरखपुर उनका आना-जाना लगा रहता था।

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