You Are Here: Home » Front Page » क्या संघ सुधार पायेगा योगी और केशव के रिश्ते

क्या संघ सुधार पायेगा योगी और केशव के रिश्ते

सीएम योगी की ताजपोशी के बाद बीजेपी की खूब वाहवाही हुई। सीएम योगी ने भी अपने आक्रामक कार्यशैली से पूरे देश की निगाहें अपनी ओर आकर्षिक कीं। योगी की कार्यशैली से बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से लेकर आरएसएस के पदाधिकारी तक काफी खुश दिखे लेकिन कुछ महीने बाद ही सार्वजनिक मंच से लेकर राजनीतिक गलियारों तक जिस तरह सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच की तल्खी नजर आने लगी उससे बीजेपी और संघ की चिंताएं बढ़ा दीं। योगी और केशव के रिश्ते शुरू से अच्छे नहीं थे, यह सभी को मालूम था, पर उम्मीद थी कि समय के साथ दोनों के बीच सामंजस्य बन जायेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। रिश्ते मधुर होने के बजाए और कटु होते गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए संघ को हस्तक्षेप करना पड़ा। राजधानी में हुई बैठक में आरएसएस और बीजेपी नेतृत्व ने हिदायत दी कि दोनों रिश्ते सुधारकर जनता के लिए काम करें। फिलहाल संघ की नसीहत कितना काम करती है, यह तो वक्त बतायेगा लेकिन दोनों के रिश्तों की कड़वाहट पार्टी और सरकार के लिए ठीक नहीं है।

सीएम योगी और डिप्टी सीएम योगी के रिश्तों की कड़वाहट जगजाहिर है। इसका असर सरकार के कामकाज पर भी दिखने लगा है। सियासी गलियारों से बात निकलकर सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुकी है। शायद इसीलिए संघ को दखल देने की जरूरत पड़ी। योगी आदित्यनाथ जब यूपी के सीएम बने थे, तब उनकी मदद के लिए दो डिप्टी सीएम बनाए गए थे, उनमें से एक यूपी बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य भी थे, लेकिन सरकार बनने के कुछ दिनों बाद ही उनके बीच खटपट की खबरें आने लगी। इतना ही नहीं दिल्ली दरबार तक ये बातें पहुंचायी गई। वहां से संबंध सुधारने की हिदायत दी गई। बीच में ऐसी भी खबरें आई कि केशव को केन्द्र सरकार में मंत्री बनाया जायेगा लेकिन केशव ने ऐसी सूचनाओं को सिरे से नकार दिया। वह उत्तर प्रदेश छोडक़र जाने को तैयार नहीं हैं। कुल मिलाकर दोनों के रिश्ते सुधरने के बजाए बिगड़ते गए। हालत यह हो गई कि सीएम योगी और डिप्टी सीएम एक मंच पर यदा-कदा ही दिखते। हालांकि जब भी केशव से इस मुद्दे पर पूछा गया उन्होंने किसी भी तरह के मतभेद की खबर को सिरे से खारिज कर दिया। इतना ही नहीं उन्होंने दो टूक कह दिया कि जो लोग भी सीएम योगी के साथ उनके रिश्ते में खटास ढूंढ रहे हैं, उन्हें कुछ भी हाथ नहीं लगने वाला है और वो हर हाल में मुंह की खायेंगे। खुद को सीएम योगी का मजबूत सहयोगी करार देते हुए, केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश में बीजेपी बढ़ते दबदबे से परेशान विरोधी जल भुन रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार को विपक्ष अब तक पचा नहीं पाया है और इसलिए हताशा में वह इस तरह की अफवाहें फैला रहे हैं। मौर्य के मुताबिक विपक्ष को आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी अपनी हार दिखाई दे रही है, शायद इसलिए वो इस तरह की अफवाहें फैलाकर बीजेपी में फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं।
डिप्टी सीएम केशव का दिल्ली दरबार में कितना रूतबा है यह किसी से छिपा नहीं है। केशव की पहुंच का नतीजा है कि उन्हें यूपी से अब तक कोई हटा नहीं सका। सबसे बड़ी विडंबना है कि रिश्तों की कड़वाहट को दूर करने की कोशिश न तो योगी की तरफ से हो रही है और न ही केशव की तरफ से। मामले की गंभीरता को देखकर बीजेपी और संघ को दखल देना पड़ा। जाहिर है इनकी आपस की लड़ाई का असर पार्टी की सेहत पर पडऩे लगा है। 
पिछले दिनों लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, योगी सरकार और भाजपा संगठन के चुनिंदा लोगों की बैठक हुई। बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने किसी का नाम तो नहीं लिया किंतु मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बीच चल रहे मनमुटाव पर नाराजगी जताते हुए नसीहत दी कि सरकार के बड़े पदाधिकारी समन्वय से काम करें और संवादहीनता को समाप्त करें। संवादहीनता से एक दूसरे के प्रति मनमुटाव बढ़ता है। किसी मुद्दे पर असहमति होने पर उस पर चर्चा होनी चाहिए। संघ ने अफसरों की मनमानी तथा कार्यकर्ताओं और जनता की समस्याओं पर ध्यान न देने के लिए सरकार और भाजपा नेताओं को व्यवस्था में बदलाव दिखाई देने की हिदायत दी। फिलहाल इस मामले को सुलझाने के लिए 
संघ से लेकर बीजेपी तक लगी हुई है लेकिन जिस तरह के हालात है उससे लगता नहीं कि यह मामला जल्द सुलझ पायेगा।

All Rights Reserved to Weekand Times . Website Developed by Prabhat Media Creations.