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मुझे मोदी जी का इंटरव्यू करके बहुत अच्छा लगा यूएई से अच्छे हुए हैं भारत के रिश्ते: बॉबी नकवी

भारत और भारत के प्रधानमंत्री के बारे में जब कोई संपादक अपने विचार रखता है, खासकर जब वह देश के अखबार/ चैनल का संपादक हो तो उसकी बात से सभी सहमत नहीं होते। कुछ लोग इत्तेफाक रखते हैं तो कुछ सरकार का फेवर करने का आरोप लगाते हैं, लेकिन जब वहीं बात दूसरे देश के अखबार का संपादक कहे तो विश्वास न करने की कोई वजह नहीं होती। पिछले दिनों भारत आए गल्फ न्यूज के नेशन एडीटर बॉबी नकवी ने मोदी सरकार के कामकाज, यूएई और भारत की पत्रकारिता पर खुलकर बातचीत की। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी का सबसे पहले इंटरव्यू करने वालों में बॉबी नकवी का नाम शामिल है। बॉबी ने पत्रकारिता की शुरुआत भारत में की लेकिन पिछले 16 साल से वह दुबई में हैं। उन्होंने मोदी सरकार के कामकाज की जमकर तारीफ की तो कुछ खामियां भी गिनाईं। उनका मानना है कि मोदी सरकार को तीन तलाक बिल में संशोधन करने की जरूरत हैं। 4पीएम की कार्यकारी संपादक प्रीति सिंह ने विभिन्न मुद्दों पर बॉबी नकवी से विस्तृत बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश-

आपने पत्रकारिता की शुरु आत कहां से की?
मैंने पत्रकारिता की शुरुआत भोपाल से दैनिक भास्कर गु्रप के एक छोटे से अंग्रेजी अखबार नेशनल मेल से की। अब वह अखबार बंद हो चुका हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ मैं पढ़ाई भी करता था। उसके बाद मैं एमपी क्रॉनिकल से जुड़ गया। फिर 1997 में लखनऊ हिंदुस्तान टाइम्स लांच हो रहा था तो उससे जुड़ गया। 2002 में यहां से दुबर्ई चला गया। तब से वहीं हूं।
भारत और यूएई की पत्रकारिता में क्या अंतर पाते हैं?
यूएई में हमें मालूम है कि हमें किस बारे में नहीं लिखना है। बड़ी क्लीयरली बता दिया जाता है कि आपको इन विषयों पर नहीं लिखना है, जबकि भारत में यह नहीं मालूम होता। यहां अक्सर देखने में आता है कि खबर छपने के बाद संपादक की नौकरी चली जाती है। यहां आप सब कुछ लिख सकते हैं फिर भी नौकरी चली जाती है। ये बड़ा फर्क है। दूसरा आजकल डिजिटल जर्नलिज्म पर बहुत ज्यादा जोर है। पूरी दुनिया में डिजिटल जर्नलिज्म पर बड़ा इनवेस्टमेंट किया जा रहा है। वैसे ही यूएई और मिडिल ईस्ट में भी डिजिटल जर्नलिज्म में काफी इनवेस्टमेंट हो रहा है। हमारे अखबार की भी पॉलिसी है कि खबर कन्फर्म होने के पांच मिनट के भीतर हमारी वेबसाइट पर होनी चाहिए। इसके लिए बकायदा गाइडलाइन है। अगर देखा जाए तो जिस तरह भारत में डिजिटल जर्नलिज्म में काम हो रहा है उससे अच्छा मिडिल ईस्ट में हो रहा है। अच्छा इसलिए कहूंगा कि हमारे यहां अन्य देशों के भी जर्नलिस्ट है। वह लोग अपना-अपना एक्सपीरियंस लेकर आते है तो कुल मिलाकर काम अच्छा हो
जाता है।
भारत की पत्रकारिता के प्रति वहां के लोगों का नजरिया क्या है?
भारत की पत्रकारिता को अच्छी नजरों से देखा जाता है। लोगों की धारणा है कि भारत की पत्रकारिता स्वतंत्र है। न्यूज रूम में भी स्वतंत्रता है। काफी बोल्ड अखबार हैं। न्यूज चैनल भी बेबाकी से खबर चलाते हैं। हालांकि पिछले तीन या चार साल में जो बदलाव आया है उसे भी नोट किया गया है लेकिन हर आदमी यही समझता है कि यह टेम्पररी फेज है। जिस तरह की सेल्फ सेंसरशिप हम देख रहे हैं अखबारों में या मीडिया चैनल में, दूसरे सरकार की तरफ से जो प्रतिबंध है उसे भी नोट किया जाता है। मिडिल ईस्ट में भी नोट किया जा रहा हैं, लेकिन कुल मिलाकर देखा जाए तो भारतीय पत्रकारिता का रिकार्ड अच्छा रहा है।

लिखने की आजादी कहां अधिक है?
अच्छा सवाल है। देखिए भारत और यूएई की पत्रकारिता में बहुत अंतर है। भारत में जितनी आसानी से खबरें मिल जाती है वहां नहीं मिल पाती। इसका कारण है कि यूएई में विदेशी जर्नलिस्ट ज्यादा है। इसलिए विश्वसनीयता का संकट हमेशा बना रहता है। भारत में क्राइम रिपोर्टर को सिपाही से लेकर अन्य सूत्रों से सूचनाएं मिल जाती हैं लेकिन वहां ऐसा नहीं है।

भारत में पत्रकारिता आसान है या यूएई में ?
यूएई में पत्रकारिता बहुत ही डिफिकल्ट है। सोर्सेज स्ट्रांग न होने की वजह से खबरें नहीं मिलती। चूंकि ज्यादातर पत्रकार दूसरे देशों से होते हैं तो उन पर पुलिस-प्रशासन के लोग जल्दी विश्वास नहीं कर पाते। ऐसा नहीं है कि आप इनफॉर्मेशन मागेंगे तो वो देंगे नहीं, देंगे लेकिन काफी समय लग जाता है। कुछ मामलों में बड़ी तेजी दिखाते हैं तो कुछ में वह अपनी सहुलियत के हिसाब से करते हैं।

आपने पीएम नरेन्द्र मोदी का इंटरव्यू किया था, क्या उनके इंटरव्यू के सवाल पहले से निर्धारित होते हैं? कैसा अनुभव था?
बहुत अच्छा एक्सपीरियंस था। वह बहुत ही आत्मीयता और गर्मजोशी से मिलते हैं। मेरे साथ अच्छी बात यह हुई थी कि जब उनसे मेरी मुलाकात हुई थी तो उस कमरे में दो-तीन लोगों के अलावा सिर्फ मैं और मोदी जी थे। मैं और वह हिंदी में बात कर रहे थे। बहुत अच्छी बातचीत हुई। हां, उन्होंने इंटरव्यू में पूछे जाने वाले सवाल को पहले ही मंगा लिया था।

मतलब सवाल आपके ही रहेंगे, बस उन्हें पता होता है कि क्या पूछा जाना है?
हां ये तो हैं, लेकिन इंटरव्यू का दायरा पहले से डिसाइडेड था वो सिर्फ मिडिल ईस्ट की पॉलीटिक्स और ईशूज के बारे में हैं। इंडिया और यूएई के संबंधों के बारे में ही इंटरव्यू था।
पीएम मोदी ने भारत और यूएई के संबंधों को नई ऊंचाई दी है। वहां के लोगों का पीएम मोदी के प्रति क्या नजरिया है? ,
बहुत ही सकारात्मक नजरिया है। इनफैक्ट सरकार किसी की भी बने वहां के लोग बहुत इंटरेस्ट लेते हैं। इसका कारण यह है कि हमारे अखबार का 70 प्रतिशत सब्सक्राइबर इंडियन हैं। पेड सब्सक्राइबर मतलब साल भर का सब्सक्रिप्शन लेते हैं। हमारे यहां डेली इंडिया के चार पन्ने होते हैं। इंडिया की कोई बड़ी स्टोरी होती है तो वह पहले पेज पर होती है। उसके अलावा इंडियन कम्युनिटी की जो खबरें होती है वह लोकल पेज पर छपती हैं। इसलिए हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण देश है भारत।

भारत में साम्प्रदायिक घटनाओं के प्रति क्या सोचते हैं आप?
देखिए, भारत से हमारी जड़ें जुड़ी हैं तो यहां की हर खबर हमें प्रभावित करती हैं। बेशक पीएम मोदी अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन वर्तमान में हिंदुस्तान में जो साम्प्रदायिक माहौल है उससे यूएई के भारतीय मुसलमानों में भय का माहौल है। चूंकि यूएई में भारी संख्या में भारतीय मुसलमान रहते हैं तो वह अपने परिवार और रिश्तेदार को लेकर चिंतित रहते हैं। यह सच है कि पीएम मोदी अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन उन्हें देश के माहौल पर भी ध्यान देना चाहिए। साम्प्रदायिक घटनाएं देश की छवि प्रभावित करती हैं। मेरा मानना है कि फरवरी में पीएम मोदी दुबई आ रहे है तो वह भारतीय मुसलमान को एड्रेस करते हुए उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दें।
हाल ही में सरकार ने तीन तलाक बिल लोकसभा में पास किया। राज्यसभा में यह अटक गया लेकिन सरकार अध्यादेश लाने की बात कर रही है।

तीन तलाक बिल पर आप क्या सोचते हैं?
पीएम मोदी की यह पहल सराहनीय है लेकिन इस बिल में कुछ खामियां हैं। बिल में तीन साल की सजा का जो प्रावधान है वह सही नहीं है। उससे मुसलमान महिला को ही सबसे ज्यादा नुकसान है। आदमी को जेल भेज दिया जायेगा तो सोर्स ऑफ इनकम खत्म हो जायेगी। परिवार की देखभाल कौन करेगा। ये एक सोशल इशू है। मोदी जी क्रेडिट ले रहे हैं उन्हें लेना भी चाहिए। किसी और प्रधानमंत्री ने इतना बड़ी कुरीति को दूर करने की कोशिश नहीं की लेकिन लॉ मिनिस्टर रवि शंकर प्रसाद ने इस तरह का काम किया है जैसे लग रहा है कि उन्होंने मुसलमान आदमियों से बदला लेने के लिए कानून बनाया है। ऐसा नहीं लगना चाहिए। सरकार हमेशा जस्टिस के लिए काम करती है। दूसरा मेरा आकलन है कि जिस तरह का दुरूपयोग दहेज वाले मामले में हुआ था उस तरह का दुरुपयोग इसमें भी हो सकता है। मैंने बहुत सारे आर्टिकल पढ़े जो महिलाओं ने लिखे हैं, उन लोगों ने भी यही आशंका जाहिर की है।

भारत और यूएई के बीच कैसे संबंध हैं?
मोदी सरकार से यूएई के बहुत अच्छे संबंध हैं। इसका कारण है कि मोदी जी ने गल्फ में इंट्रेस्ट लिया। बाकी कई सरकार आई और गई, उन्हें गल्फ कंट्री से कोई लेना-देना नहीं था। गल्फ से उन्हें इतना ही सरोकार था कि उन्हें बस तेल खरीदना है और कुछ नहीं करना है। किसी प्रधानमंत्री ने ये प्रोसेस नहीं किया कि इन लोगों से रिलेशनशिप बनाई जाए। यूएई में 10 लाख से ज्यादा भारतीय काम करतेहैं। भारत में बाहर के देशों से जो पैसे आते हैं उसमें सबसे ज्यादा पैसा गल्फ कंट्री से आता है। उस हिसाब से देखा जाए तो इंडिया के लिए गल्फ कंट्री महत्वपूर्ण है। उस हिसाब से मोदी जी ने जो कदम उठाए हैं वह महत्वपूर्ण हैं। 2015 मोदी जी यूएई गए और फिर फरवरी में आ रहे हैं। दुबई में वल्र्ड गवर्नेंस समिटि होने वाली है, इंडिया उसमें गेस्ट कंट्री हैं। इसमें मोदी जी चीफ गेस्ट हैं।

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