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लोकसभा चुनाव की बिछने लगी बिसात कांग्रेस से किनारा कर रहे सहयोगी दल

सपा से गठबंधन पर संशय बरकरार, सीपीएम भी नहीं करेंगी तालमेल
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने साधा मौन, कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से क्षेत्र में जाने को कहा
लोकसभा चुनाव की तैयारी में अभी से जोर-शोर से जुट गई है पार्टी

वीकएंड टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आगामी लोकसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछने लगी है। भाजपा को घेरने के लिए विपक्ष के महागठबंधन का फॉर्मूला फिलहाल साकार होता नहीं दिख रहा है। कांग्रेस से बसपा और सीपीएम तालमेल करने से कतरा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सपा और कांग्रेस के गठबंधन पर कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। लिहाजा पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में संशय बरकरार है। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व गठबंधन के बारे में मौन बना हुआ है। हालांकि पार्टी अंदरखाने जोर-शोर से लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से क्षेत्र में जाकर काम करने का निर्देश जारी कर दिया है। बताया जा रहा है कि गुजरात चुनाव में मिली संजीवनी के कारण कांग्रेस अकेले दम पर चुनाव लडऩे की तैयारी कर रही है।
2019 के लोकसभा चुनाव के लिए सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है। मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी के खिलाफ विपक्ष महागठबंधन फॉर्मूले के साथ 2019 में उतरने का ख्वाब देख रहे थे लेकिन कुछ दिनों में सियासत ने ऐसा रंग बदला कि विपक्ष एकजुट होने के बजाय बिखरता दिख रहा है। कांग्रेस के सहयोगी दल एक-एक कर उससे दूर होते नजर आ रहे है। बसपा और सीपीएम 2019 के आम चुनावों में कांग्रेस से तालमेल नहीं करने का फैसला किया है। पिछले दिनों सीपीएम की केंद्रीय कमेटी ने इस बारे में एक प्रस्ताव पास किया। सीपीएम के पूर्व महासचिव प्रकाश करात कांग्रेस से किसी भी तरह के गठबंधन के खिलाफ हैं। वहीं, महासचिव सीताराम येचुरी के नेतृत्व वाला गुट बीजेपी से टक्कर लेने के लिए कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने को लेकर नरम है। सीपीएम केंद्रीय समिति की बैठक में दोनों नेताओं के प्रस्ताव पर वोटिंग कराई गई, जिसमें करात गुट को 55 और येचुरी के पक्ष में 31 वोट पड़े। इस तरह करात गुट 24 मतों के अंतर से जीता। पास किए गए इस प्रस्ताव को अप्रैल में हैदराबाद में होने वाली सीपीएम-कांग्रेस की बैठक में औपचारिक रूप से अपनाने के लिए रखा जाएगा।
कांग्रेस से गठबंधन करने और न करने को लेकर सीपीएम के अंदर दूसरी बार वोटिंग हुई है। दोनों बार येचुरी गुट की हार और करात गुट की जीत हुई। वामदलों का प्रभाव लगातार देश में कम हो रहा है। लेफ्ट विचारों वाले सियासी दल अपने वजूद को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। ऐसे में सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी को कांग्रेस एक सहारा नजर आ रही थी। यही वजह थी कि येचुरी गुट कांग्रेस के साथ गठबंधन की दिशा में आगे बढऩे का मन बना रहा था, लेकिन करात गुट की मुखालफत ने उनके सारे अरमानों पर पानी फेर दिया है। कांग्रेस के साथ लेफ्ट ही नहीं, बल्कि सपा भी 2019 में साथ उतरने से कतरा रही है। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव और राहुल गांधी की बनी दोस्ती में दरार पड़ती हुई नजर आ
रही है।
पिछले दिनों अखिलेश साफ तौर पर कहा था कि 2019 के लिए अभी तक मैं किसी पार्टी के साथ गठबंधन की नहीं सोच रहा हूं। गठबंधन और सीट शेयरिंग पर बात कर मैं अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता। मैं किसी भ्रम में नहीं रहना चाहता हूं। अभी मैं सिर्फ अपनी पार्टी को मजबूत करने में लगा हूं। यही नहीं सपा राज्य की सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लडऩे की तैयारी में जोर-शोर से जुट गई है। इसका मतलब साफ है कांग्रेस और सपा के बीच राह जुदा हो चुकी है। दूसरी ओर कांग्रेस भी गुजरात में मिली संजीवनी के बाद नए जोश में दिखाई पड़ रही है। वह फिलहाल गठबंधन के बारे में मौन साधे हुए है। चुनाव में पार्टी की हवा देखने के बाद ही वह गठबंधन पर अपने पत्ते खोलेगी। फिलहाल वह अकेले लोकसभा चुनाव में उतरने की तैयारी में दिख रही है। इसके लिए उसने मतदाताओं में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अपने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को क्षेत्र में काम करने के लिए कह दिया है।
बसपा ने भी बनाई दूरीबीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अपने 62वें जन्मदिन पर 2019 के चुनाव में गठबंधन से साफ इनकार कर चुकी है। इतना ही नहीं इस मौके पर उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को निशाने पर लिया था। मायावती ने कहा था कि उन्हें दलित उत्पीडऩ में कांग्रेस व बीजेपी वाले चोर-चोर मौसेरे भाई नजर आते हैं। दोनों पर घिनौने हथकंडे व षडयंत्र से उनकी अंबेडकरवादी पार्टी को कमजोर और खत्म करने का आरोप भी लगाया था। इससे साफ है कि मायावती 2019 में अकेले चुनावी रण में उतरेंगी जबकि माना जा रहा था कि 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी को मिली करारी हार के चलते वे गठबंधन की राह अपना सकती हैं, लेकिन इन सारे कयासों पर उन्होंने विराम लगा दिया है।

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