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ताबड़तोड़ डकैती की घटनाओं से थर्राई राजधानी

ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल, रात भर जागकर पहरा दे रहे लोग

वीकएंड टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में चार दिनों के भीतर ताबड़तोड़ तीन डकैतियों ने चंबल घाटी की याद दिला दी। ग्रामीण क्षेत्रों में डकैतों के तांडव से दहशत का माहौल है। यहां ग्रामीण रातभर जागकर पहरा दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर डकैतों के आगे हाईटेक पुलिस पूरी तरह फेल दिख रही है। कई टीमों के गठन के बावजूद अभी तक बदमाशों का सुराग नहीं मिल सका है।
राजधानी में चार दिन के अंदर डकैतों ने जमकर तांडव मचाया। डकैतों ने विरोध करने पर गोली मार दी। गोली लगने से दो लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हो गए। इनका इलाज राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में कराया जा रहा है। ताबड़तोड़ डकैती की वारदातों ने 80 और 90 के दशक के चंबल घाटी के डकैतों के आतंक की याद दिला दी है। हालत यह है कि अब ग्रामीण और शहरी लोगों के जेहन में इन डाकुओं की दहशत पूरी तरह से घर कर गई है। डकैतों पर पुलिस का कोई खौफ नहीं दिखाई पड़ रहा है। वहीं राजधानी की हाईटेक पुलिस इन डकैतों के आगे पूरी तरह लाचार दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि डकैत बेखौफ हो चुके हैं। वे कब और किस घर में डकैती की घटना को अंजाम दे दें ,कहा नहीं जा सकता है। डकैती की पहली वारदात चिनहट थाना क्षेत्र के उत्तर धोना गांव में हुई। यहां डकैतों ने एक कारीगर के घर में डकैती की वारदात को अंजाम दिया। जब कारीगर दीनानाथ सिंह चौहान ने डकैतों से उलझने की कोशिश की तो डकैतों ने उसे गोली मार दी। साथ ही बचाने पहुंची उसकी पत्नी अमरावती और बहू को भी गोली मार दी। यही नहीं डकैत इतने बेखौफ थे कि उन्होंने गांव में लगातार कई राउंड फायर किए। इतना ही नहीं यहां से फरार होने के बाद उन्होंने बगल के गांव में भी घटना को अंजाम दिया। इतनी बड़ी वारदात के बाद भी चिनहट पुलिस ने इसे हल्के में लिया। पुलिस का कहना था कि पीडि़त ने अपने पड़ोस में रहने वाले दो लोगों पर डकैती का आरोप लगाया था। पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं गांव में चर्चा है कि यदि पुलिस इस घटना के बाद से ही पूरी तरह सक्रिय हो जाती तो शायद काकोरी और मलिहाबाद में डकैत घटना को अंजाम देने में सौ बार सोचते। चिनहट में हुई डकैती की इस वारदात का खुलासा करने में पुलिस अभी लगी ही थी तभी काकोरी थाना क्षेत्र में 21 जनवरी को डकैतों ने कटौली और बनिया खेड़ा गांव में डकैती डाली। डकैतों ने बनिया खेड़ा के पूर्व प्रधान इंद्रपाल के घर में धावा बोल दिया। यहां डकैतों ने जमकर फायरिंग की। इससे पूरे गांव में दहशत फैल गई। डकैतों ने जमकर लूटपाट की। इसके बाद डकैत जगपाल, सुनील यादव के घर लूटपाट करने पहुंचे। डकैतों की सूचना पाकर एसएसपी भी गांव पहुंचे। अभी वे तहकीकात कर ही रहे थे तभी खटोली गांव में गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजने लगी। जब तक एसएसपी दीपक कुमार उस गांव में पहुंचते तब तक डकैतों ने गांव के प्रधान हरिशंकर के बेटे अभिषेक को गोली मार दी। इससे उसकी मौत हो गई। डकैतों ने ग्रामीणों को फिर आने की धमकी देकर फरार हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि जिस समय डकैत यहां घटना को अंजाम दे रहे थे उस समय 100 डायल की गाड़ी पहुंची और गाड़ी से निकले वर्दी वाले थोड़ी दूर तक तो आगे बढ़ें और जब गोलियां चलने लगी तो वह भी अपनी जान बचाकर गाड़ी में बैठ गए। डकैतों ने 23 जनवरी को काकोरी से सटे हुए मलिहाबाद थाना क्षेत्र में फिर दस्तक दी और सरावा गांव के पूर्व प्रधान परमेश्वर रावत के बेटे श्यामू को मौत की नींद सुला दिया। डकैतों ने जमकर लूटपाट की। इसके बाद डकैतों ने उसी गांव के रहने वाले बुजुर्ग छत्रपाल के घर डकैती डाली। जब डकैतों का विरोध छत्रपाल ने किया तो उसे गोली मार दी गई। गोली छत्रपाल के पैर में लगी जिससे वह गिर पड़ा। इसके बाद डकैतों ने कई अन्य घरों को निशाना बनाया। इन वारदातों को हुए पांच दिन से अधिक बीत चुके हैं लेकिन अभी तक डकैतों का कोई सुराग नहीं मिल सका है। है डकैतों का गैंग पर नकेल नहीं कसी गई तो राजधानी को चंबल बनने में देरी नहीं लगेगी।
डकैती की जो वारदातें हुई हैं वह चिंता का विषय है। इन घटनाओं के खुलासे के लिए पुलिस टीमें लगी हुई हैं। कुछ क्लू मिले हैं। उन पर काम किया जा रहा है। जल्द ही इन घटनाओं का खुलासा कर डकैतों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
-आनंद कुमार, एडीजी लॉ एंड आर्डर

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