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वोट बैंक की सियासत, संवेदनहीनता और लोकतंत्र

दरअसल, देश में वोट बैंक की राजनीति काफी पुरानी है। सियासी दलों ने अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए इसे लगातार हवा दी और दे रहे हैं। लिहाजा यह लगातार फल-फूल रही है। सत्ता तक पहुंचने के लिए तमाम सियासी दलों ने इसका हमेशा प्रयोग किया। लिहाजा आज किसी भी घटना को वोट बैंक के चश्मे से देखा जाता है। यदि छोटी से छोटी घटना राजनीतिक फ्रेम में फिट बैठती है तो नेता जमीन-आसमान एक कर देते हैं। हर मिनट बयान जारी किए जाते हैं। मातमपुर्सी की जाती है। धरना-प्रदर्शन और न जाने क्या-क्या किया जाता है। देश के लोकतंत्र तक को खतरे में बता दिया जाता है, लेकिन जिस घटना से दलों का वोट बैंक सधता नहीं दिखता है, सियासी दलों की संवेदनशीलता अचानक कोमा में चली जाती है।

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