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इंजीनियरिंग का नया सिलेबस जारी, जानें क्या हुआ बदलाव

देश में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की पहल करते हुए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने इंजीनियरिंग और तकनीकी पाठ्यक्रमों का नया करिकुलम जारी कर दिया है। नया करिकुलम लांच करते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि पढ़ाई अच्छी नहीं होगी तो उत्पाद अच्छा नहीं होगा, इसलिए हमें परिणाम आधारित अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। केंद्रीय मंत्री तकनीक के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं आदर्श पाठ्यक्रम पेश करने के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। जावड़ेकर ने कहा कि अच्छे पाठ्यक्रम तैयार करना बोर्ड ऑफ स्टडजीज का काम है। पर आज विश्वविद्यालयों के पास इसके लिए समय नहीं है। काफी समय राजनीति में ही चला जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि स्थानीय निकायों, विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराए जाएं। मैं समझता हूं कि इसकी शुरुआत विश्वविद्यालयों से करनी चाहिए। पाठ्यक्रम सुधार नहीं हो पा रहा है। छात्रों के साथ इससे बड़ा अन्याय और हो ही नहीं सकता है।

छात्रों को अधिक सामयिक चीजें सिखाने की जरूरत
मंत्री ने कहा कि छात्रों को और अधिक सामयिक चीजें सिखाने की जरूरत है। इस दिशा में तकनीकी शिक्षा का मॉडल पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। यह अच्छी पहल है और हर साल इसे अपडेट किया जाना चाहिए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से सबसे अधिक भला देश का होता है। शिक्षा भविष्य, देश का भविष्य और एक नई पीढ़ी तैयार करने में सहायक होती है। पढ़ाई अच्छी होगी, तब देश का भविष्य अच्छा होगा। जावेडक़र ने कहा, तकनीकी शिक्षा का करिकुलम हर साल अपडेट होना चाहिए ताकि छात्रों को इंडस्ट्री की डिमांड के अनुसार तैयार किया जा सके।

क्या होगा नए करिकुलम में
नए करिकुलम में इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के प्रैक्टिकल स्किल डेवलपमेंट पर ज्यादा जोर दिया गया है। नए करिकुलम में इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। नए सिस्टम में थ्योरी पेपर के क्रेडिट को घटाकर 160 कर दिया गया है, जिसमें 14 क्रेडिट समर इंटर्नशिप के भी होंगे। इसके तहत छात्रों को इंडस्ट्री में दो से तीन महीने की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग लेनी होगी जिसमें समर विकेशन में की गई इंटर्नशिप भी शामिल होगी। एआईसीटीई के निदेशक अनिल सहस्त्रबुद्धे ने कहा, इससे छात्र जॉब के लिए नए स्किल्स सीखेंगे। गौरतलब है कि पिछले दिनों एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि इंजीनियरिंग कॉलेजों से निकलने वाले 60 फीसदी छात्र रोजगार के लायक नहीं थे। इसे ध्यान में रखते हुए एआईसीटीई ने सिलेबस में परिवर्तन किया है।

छात्रों को लेनी पड़ेगी इंडक्शन ट्रेनिंग
नए करिकुलम के तहत इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को एक अनिवार्य इंडक्शन ट्रेनिंग लेनी पड़ेगी। इससे छात्र फंडामेंटल कॉन्सेप्ट सीख सकेंगे और तकनीकी शिक्षा के लिए जरूरी भाषीय ज्ञान भी मिलेगा। काउंसिल ने एफिलिएटेड विश्वविद्यालयों से आग्रह किया है कि वे हर साल करिकुलम को अपडेट करने के लिए अपने यहां कंसल्टेशन कमिटी का गठन करें।

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