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शिक्षा केन्द्रों का भगवाकरण

उच्च शिक्षा निदेशक और दो प्राचार्यों के निलंबन से बवाल

देहरादून। उत्तराखंड में बीजेपी की सरकार आने के बाद क्या महाविद्यालयों का भगवाकरण शुरू हो गया है? क्या जो लोग पार्टी की नीतियों पर नहीं चल रहे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी? ये सवाल उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएस मलकानी, दो प्राचार्यों और एक सहायक प्रोफेसर के निलंबन के बाद उठ रहे हैं। इन पर उन छात्रों को गलत तरीके से कॉलेज में प्रवेश देने के आरोप हैं, जो बाद में छात्र संघ चुनाव में संघ के प्रत्याशियों को हरा कर अध्यक्ष बन गए। डॉ. मलकानी पर भी इसी आरोप में निलंबन की गाज गिरी। सरकार के लिए यह आसान फैसला साबित होने वाला नहीं दिख रहा है। निलम्बन के फैसले का जमकर विरोध शुरू हो गया है। कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने भी इसमें कदम डाल दिए हैं। सम्बंधित कॉलेजों में शिक्षकों और कर्मचारियों ने हड़ताल भी कर दी।
डॉ. मलकानी हल्द्वानी के एमबी कॉलेज में प्राचार्य थे, जब मीमांशा आर्य को प्रवेश दिया गया था। इसके बाद मीमांशा चुनाव में अध्यक्ष पद पर जीत भी गई। इससे भडक़े एबीवीपी और बीजेपी ने सरकार स्तर पर उनके खिलाफ कार्रवाई करवा दी। ऐसे ही मामले जहां भी थे, वहां भी कार्रवाई हुई। कांग्रेस और आन्दोलनकारियों का आरोप है कि बीजेपी और सरकार शिक्षा के केन्द्रों का भी भगवाकरण करना चाहती है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। इसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक निलंबन आदेश वापिस नहीं लिए जाते हैं, तब तक आन्दोलन और हड़ताल जारी रहेगी। गुस्साए शिक्षकों और कर्मचारियों ने उच्च शिक्षा निदेशालय को खुलने नहीं दिया और अफसरों तथा कर्मचारियों को भी घुसने नहीं दिया। आन्दोलनकारियों की मांग है कि निलंबन का आदेश तत्काल वापिस लिया जाए। जिन लोगों को निलंबित किया गया है उनमें एमबी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद, सहायक प्रो.एनके लोहानी और देवीधुरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसएस उनियाल भी शामिल हैं। ऐसा कहीं नहीं लग रहा है कि सरकार आन्दोलनकारियों के दबाव में आ रही है। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मुताबिक सरकार ने जो कदम उठाए हैं, वे नियम के अनुरूप है। जो लोग इस फैसले को गलत बता रहे हैं, वे राजनीति से प्रेरित हैं। विरोधी दल अगर इसका विरोध कर रहे है तो इसमें अजूबा कुछ नहीं है। उनका काम विरोध करना ही है।
बीजेपी के सरकार में आने के बाद से डॉ.रावत ने कई बड़े और अहम कदम उठाये हैं लेकिन पहली बार सरकार पर शिक्षा के मंदिरों को भगवा रंग से रंगने की कोशिश करने के आरोप लगे हैं। यह बात अलग है कि मंत्री डॉ. रावत की दलील के मुताबिक छात्रा मीमांशा को कॉलेज में प्रवेश गलत तरीके से दिया गया था। बाद में डॉ. मलकानी उच्च शिक्षा निदेशक बन गए।

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