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सपा ने बदली रणनीति, मोदी के गढ़ बनारस को केंद्र बनाकर भाजपा को घेरने की तैयारी

पिछड़ा वर्ग को जोडऩे पर है सपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अखिलेश की नजर
भाजपा और सहयोगी दलों के बिगड़ते संबंधों पर भी फोकस

वीकएंड टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। लोकसभा चुनावों को देखते हुए सपा ने अपनी रणनीति बदल दी है। सपा मुखिया अखिलेश यादव पीएम मोदी के गढ़ बनारस को केंद्र बनाकर भाजपा को घेरने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा सपा यहां से पूर्वांचल को साधने की कोशिश कर रही है। सपा की नजर भाजपा के सहयोगी दलों भासपा और अपना दल के असंतोष पर भी टिकी हुईं है। यदि सपा ने यहां अपनी स्थिति मजबूत कर ली तो भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव में मुश्किलें खड़ी हो सकती है।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लोकसभा के लिए अभी से बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी को मजबूती देने के लिए वे न केवल अपने जनाधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं बल्कि भाजपा को घेरने की रणनीति पर भी काम कर रहे हैं। यही वजह है कि वे विभिन्न मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते रहते हैं। इसके अलावा उन्होंने पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर क्षेत्र में सक्रिय होने का निर्देश जारी कर दिया है। सपा मुखिया नहीं चाहते कि लोकसभा चुनाव में किसी प्रकार की कोताही की जाए। इसके अलावा उनकी नजर पिछड़े वर्ग को पार्टी से जोडऩे पर लगी हुई है। यही वजह है कि उन्होंने पिछले दिनों बनारस में आयोजित जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनना स्वीकार किया। अखिलेश ने इस कार्यक्रम में शिरकत कर एक तीर से दो निशाने साधे हैं। सपा पर जातिवाद करने का आरोप लगता रहता है, जिसके चलते पिछड़े वर्ग की अन्य जातियां सपा से दूर हो गयी है। अखिलेश ने इस कार्यक्रम में साफ तौर पर कहा कि अभी कोई चुनाव दूर-दूर तक नहीं है। हम यहां आपको गले लगाने आए हैं। यह कार्यक्रम चौहान समाज ने शिरकत की थी। इसके जरिए सपा ने क्षेत्रीय दलों से गठबंधन का संकेत भी दे दिया। अखिलेश का यह दांव कितना काम आता है यह तो समय ही बतायेगा। इतना साफ है कि बीजेपी के पास अब अपने सहयोगी दलों को सहेजने के अलावा अन्य विकल्प नहीं है। यदि बीजेपी ऐसा नहीं करती है तो सपा उन दलों के साथ गठबंधन भी कर सकती है। अखिलेश के इस कदम से यूपी चुनाव 2017 में प्रचंड बहुमत पाने वाली बीजेपी बैकफुट पर आ सकती है। बीजेपी के लिए सबसे महत्वपूर्ण संसदीय चुनाव 2019 जीतना है। सपा ने जो संकेत दिये हैं उससे बीजेपी को झटका लग सकता है। बीजेपी ने संसदीय चुनाव 2014 में अपना दल से गठबंधन किया था जिसका लाभ पार्टी को मिला। इसके बाद बीजेपी ने सुभासपा से गठबंधन किया है और प्रचंड बहुमत मिला है। बीजेपी ने अपना दल की अनुप्रिया पटेल व सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को मंत्री पद दिया। सीएम योगी आदित्यनाथ के सत्ता संभालने के बाद से सहयोगी दलों व बीजेपी के बीच मतभेद उभरने लगे हैं। निकाय चुनाव से पहले अनुप्रिया पटेल ने कानून व्यवस्था खराब होने की बात कहते हुए सीएम योगी पर हमला बोला था बाद में अपना दल ने निकाय चुनाव ही लडऩे से इंकार कर दिया था। इसके बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने निकाय चुनाव में बीजेपी से सीट मांगी थी लेकिन सीटों का बंटवारा नहीं हुआ था इसके चलते सुभासपा ने अकेले ही चुनाव लड़ा था। सुभासपा भले ही चुनाव नहीं जीत पायी थी, लेकिन कई बीजेपी प्रत्याशियों का समीकरण बिगाड़ दिया था इसके बाद से सुभासपा व बीजेपी में मतभेद बढ़ते जा रहे हैं, जिसके चलते दोनों पार्टी के अलग होने की संभावना बन गयी है।
सीएम योगी आदित्यनाथ के सत्ता संभालने के बाद से सहयोगी दलों व बीजेपी के बीच मतभेद उभरने लगे हैं। निकाय चुनाव से पहले अनुप्रिया पटेल ने कानून व्यवस्था खराब होने की बात कहते हुए सीएम योगी पर हमला बोला था बाद में अपना दल ने निकाय चुनाव ही लडऩे से इंकार कर दिया था। इसके बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने निकाय चुनाव में बीजेपी से सीट मांगी थी लेकिन सीटों का बंटवारा नहीं हुआ था इसके चलते सुभासपा
ने अकेले ही चुनाव लड़ा था।

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