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राजधानी के निजी अस्पतालों का धंधा चमकाने के लिए सरकारी डॉक्टर ठेके पर दे रहे हैं अपना नाम

राजधानी के कई अस्पतालों में चल रहा है खेल, मोटी कमाई कर रहे हैं चिकित्सक
स्वास्थ्य विभाग ने पांच डॉक्टरों को किया चिंहित, एमसीआई को लिखेगा पत्र

वीकएंड टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के निजी अस्पतालों में खेल चल रहा है। अस्पतालों के संचालक अपना धंधा चमकाने के लिए सरकारी अस्पतालों में कार्यरत नामचीन चिकित्सकों के नाम का पूरा उपयोग कर रहे हैं। सरकारी चिकित्सक अपने नाम का उपयोग करने के ऐवज में इन अस्पतालों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। वे अपना नाम ठेके पर दे रहे हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब सीएमओ की टीम ने पिछले दिनों विभिन्न अस्पतालों में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान टीम ने ऐसे पांच डॉक्टरों को चिंहित किया है। स्वास्थ्य विभाग इन डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को भी पत्र लिखने जा रहा है।
राजधानी में सरकारी चिकित्सकों और निजी अस्पताल संचालक मिलीभगत से मोटी कमाई करने में जुटे हैं। नामचीन डॉक्टरों के नाम के सहारे ही इन अस्पतालों में मरीजों से मोटी रकम वसूली जा रही है। सूत्रों के मुताबिक इस खेल में केवल पांच नहीं बल्कि दो सौ से अधिक सरकारी चिकित्सक शामिल हैं। हैरत यह है कि जब कभी इन अस्पतालों में छापा पड़ता है या जांच होती है, तो ये डॉक्टर तुरंत हाजिर हो जाते हैं। वहीं सबकुछ जानते बूझते स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने से कतराता रहता है। हालांकि चेकिंग के दौरान सीएमओ की टीम ने ऐसे कई डॉक्टरों को चिंहित किया है जो दर्जन भर से अधिक नर्सिंग होम से संबद्ध हैं। इनके नाम वहां के बोर्ड और लिस्ट में बाकायदा लिखे गए हैं। इन डॉक्टरों में एमडी और एमएस डिग्री धारी तक शामिल हैं।
ये डॉक्टर इन अस्पतालों से मोटी रकम लेकर अपना नाम इस्तेमाल करने की छूट दे देते हैं। हैरत यह है कि एक ही डॉक्टर रोजाना इतने अस्पतालों में कैसे पहुंचता है। सीएमओ कार्यालय के अधिकारी इन सभी डॉक्टरों पर शिकंजा कसने जा रहे है। गौरतलब है कि सीएमओ कार्यालय में 650 नर्सिग होम व क्लीनिक रजिस्टर्ड हैं जबकि लगभग 50 के फार्म रजिस्ट्रेशन के लिए पेंडिंग पड़े हैं। हालांकि राजधानी में 1200 से अधिक नर्सिग होम व क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं। यहां तक कि पुराने लखनऊ में दो दुकानों के शटर के अंदर ही अस्पताल बना दिए गए हैं। छोटी सी जगह में ऑपरेशन के लिए वहीं आईसीयू बनाए गए हैं। ज्यादातर यहां डॉक्टर आन कॉल ही रहते हैं। कभी कोई टीम जांच करने जाती है तो बताया जाता है कि डॉक्टर आन कॉल हैं जो यहां ऑपरेशन करके चले जाते हैं। ऐसे हॉस्पिटल पुराने लखनऊ, हरदोई रोड और सीतापुर रोड पर हैं। अस्पताल के मालिक बीयूएमएस, बीएचएमएस या बीएएमएस डिग्रीधारी हैं।
निजी अस्पतालों में इन डॉक्टर्स के नाम पर केजीएमयू सहित सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ऑपरेशन करने पहुंचते हैं। जांच होती है तो ऑन पेपर यही डॉक्टर मिलते हैं। सूत्रों के मुताबिक ये डॉक्टर्स अस्पताल में बेड और उनकी सुविधाओं के आधार पर उन्हें चलाने का ठेका लेते हैं। अस्पताल में जिस तरह सुविधाएं बढ़ती हैं, उसी हिसाब से इनका रेट बढ़ता जाता है जो कि डेढ़ लाख से पांच लाख रुपए महीने तक है।

डॉक्टर कभी नहीं जाते अस्पताल
सीएमओ ऑफिस के अधिकारियों के अनुसार ये डॉक्टर कभी इन अस्पतालों में नहीं जाते हैं, लेकिन रजिस्टर में इनकी इंट्री जरूर मिलती है और मरीजों के ऑपरेशन भी इनके नाम से होते हैं। कागज पर गंभीर मरीजों को यही देखते हैं। एक ही समय में ज्यादातर अस्पतालों में इन डॉक्टरों केे मिलने की जानकारी मिली है।

प्रैक्टिस के लिए देना होता है शपथ पत्र
सभी डॉक्टर्स को अस्पताल में प्रैक्टिस के लिए रजिस्ट्रेशन के समय शपथ पत्र देना होता है। बावजूद इसके आधा दर्जन डॉक्टरों ने दर्जन भर से अधिक अस्पतालों में शपथ पत्र लगा रखे हैं। यानी वे खुद मानते हैं कि इन सभी अस्पतालों में वे काम करते हैं। इन्हीं शपथ पत्रों के सहारे अब सीएमओ कार्यालय सभी को नोटिस भेजने जा रहा है।

अस्पतालों के रिकार्ड की जांच में पांच डॉक्टर्स के नाम सामने आए हैं। साथ ही अस्पतालों में जाकर भी चेकिंग की जा रही है। अस्पताल और डॉक्टर्स दोनों को नोटिस देने के साथ एमसीआई में भी शिकायत की जाएगी।
-डॉ. आरके चौधरी
डिप्टी सीएमओ

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