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स्वच्छ सर्वेक्षण: आंकड़ों की बाजीगरी दिखा रहा नगर निगम, दस फीसदी भी नहीं एक्टिव हैं स्वच्छता ऐप

डाउनलोड कराए गए 77 हजार ऐप, शहरवासियों से फीडबैक लेने में निगम हो हो रहा नाकाम
नागरिकों की भागीदारी और फीडबैक पर होगी मार्किंग, अफसरों के हौसले हो रहे पस्त

वीकएंड टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 को लेकर राजधानी का नगर निगम केवल आंकड़ों की बाजीगरी दिखा रहा है। निगम के अफसरों ने हजारों स्वच्छता ऐप शहरवासियों को डाउनलोड करा दिए, लेकिन इनमें दस फीसदी ऐप भी एक्टिव नहीं है। यही नहीं इस ऐप के जरिए अफसर शहरवासियों से स्वच्छता के संदर्भ में फीडबैक तक ले पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। यह स्थिति तब है जब शहर को स्मार्ट बनाने की कवायद की जा रही है। वहीं शहरवासियों का फीडबैक नहीं आने से नगर निगम के अफसरों की हालत खराब हो रही है।
चार जनवरी 2018 से देश भर में स्वच्छ सर्वेक्षण की शुरुआत हो चुकी है। सर्वेक्षण में स्वच्छता ऐप डाउनलोडिंग और जनता से फीडबैक लेना भी शामिल है। इसके लिए माक्र्स निर्धारित किए गए हैं। योजना के तहत नगर निगम के अफसरों-कर्मचारियों ने स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत नंबर बढ़ाने के लिए तमाम माध्यमों से राजधानीवासियों को ऐप डाउनलोड कराने का काम पूरा कर दिया। कुल 77 हजार ऐप डाउन लोड कराए गए। हालांकि स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए कम से कम 62 हजार ऐप डाउन लोड कराए जाने थे। इसके सापेक्ष नगर निगम के अफसरों ने यह आंकड़ा 77 हजार पहुंचा दिया। यह निर्धारित लक्ष्य से करीब 15 हजार ज्यादा है। लेकिन जिन लोगों को ऐप डाउनलोड कराए गए हैं वे ऐप का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डाले तो फीडबैक और एक्टिव यूजर के मामले में राजधानी ने काफी निराश किया है। 77,000 ऐप डाउनलोडिंग में मात्र 7,086 एक्टिव हैं और 69614 लोग ऐसे है जिनके द्वारा ऐप डाउनलोड करने के बाद से उसका प्रयोग नहीं किया गया है। लिहाजा इनको इनएक्टिव मान लिया गया है जबकि जनसंख्या के हिसाब से करीब 2.8 लाख लोगों का फीडबैक आना चाहिए था। लेकिन ये संख्या 2600 के पास ही रह गई। ऐसे में नगर निगम लखनऊ के आगे बड़ी चुनौती है। चूंकि 10 मार्च से पहले स्वच्छता सर्वेक्षण होना है। अन्य शहरों की तुलना करें तो स्वच्छता ऐप डाउनलोडिंग और फीडबैक के मामले में लखनऊ पूरे देश में 19वें नंबर पर आ गया है। वहीं,कानपुर दूसरे, गाजियाबाद दसवें और आगरा 16वें स्थान पर है। प्रदेश की बात करें तो कानपुर नंबर एक पर है जबकि गाजियाबाद दूसरे स्थान पर आ गया है। आगरा तीसरे और चौथे स्थान पर राजधानी लखनऊ है।
कुछ दिन पहले जारी देशभर के अन्य शहरों की रैंकिंग में लखनऊ टॉप 20 से बाहर था जबकि प्रदेश के अन्य शहरों के मुकाबले उसकी रैंकिंग पांच थी। 31 जनवरी तक ऐप डाउनलोड का समय था। आंकड़ों के अनुसार कानपुर का प्रदर्शन शानदार दिख रहा है। पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे अच्छा प्रदर्शन कानपुर कर रहा है। इस समय पूरे देश में कानपुर दूसरे नंबर पर है, जबकि प्रदेश में उसकी रैंकिंग पहले नंबर पर है। यहां स्वच्छता ऐप डाउनलोड करने वालों में लगभग 65 प्रतिशत यूजर एक्टिव हैं। लखनऊ के एक्टिव यूजरों का आंकड़ा अभी 10 प्रतिशत से भी कम है। सूत्रों के मुताबिक अफसरों ने ऐसे लोगों को भी ऐप डाउनलोड करा दिए जो उसे चलाना तक नहीं जानते हैं। जाहिर है सर्वेक्षण के नाम पर नगर निगम की यह बाजीगरी अब उसके लिए मुसीबत बनती जा रही है।

ऐसे होती है रैंकिंग
रैंकिंग तीन आधार पर की जाती है। शहर के लोगों की भागीदारी पर 30 प्रतिशत, फीडबैक के आधार पर 30 प्रतिशत और विभाग के रिस्पांस के आधार पर 40 प्रतिशत अंक दिए जाते हैं। हर एक एक्टिव यूजर के लिए दो नंबर जोड़े जा रहे हैं, इसके अलावा दो नंबर अच्छे फीडबैक और एक नंबर अन्य फीडबैक के दिए जा रहे हैं। समस्याओं के निस्तारण के लिए दो अंक और अन्य समस्याओं का एक अंक निर्धारित किया गया है।

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