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यूपी इन्वेस्टर्स समिट आगाज तो अच्छा है…..

पिछले दिनों यूपी की राजधानी लखनऊ में उद्योगपतियों के महाकुंभ में जिस तरह से लाखों करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए उससे तो यही लगता है कि सीएम योगी आदित्यनाथ अपनी मंशा में सौ फीसदी कामयाब हुए हैं। यदि सही तरीके से उद्योगपतियों को लाल फीताशाही से सकारात्मक सहयोग मिला तो वाकई आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल जायेगी। इस इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। इस समिट के माध्यम से जहां योगी सरकार ने अपने पूरे हो रहे एक साल के कार्यकाल का खाका खींचा तो वहीं मिशन 2019 के तहत लोकसभा चुनाव के दौरान गिनाने के लिए अपनी उपलब्धियों में इजाफा भी कर लिया है। यदि 2019 से पहले कुछ परियोजनाएं कागजों से निकल कर धरातल पर आ गईं तो लोकसभा चुनाव में योगी सरकार की बल्ले-बल्ले रहेगी। उनके पास गिनाने के लिए बहुत कुछ होगा।

लखनऊ में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट पर पूरे देश की निगाहें लगी थीं। सीएम योगी आदित्यनाथ खुद इन्वेस्टर्स समिट को लेकर बहुत सजग और आशान्वित थे। समिट में जिस तरह उद्योगपतियों ने निवेश की मंशा जतायी, उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। समिट के पहले दिन 4.48 लाख करोड़ के एमओयू साइन हुए। निश्चित ही यह बहुत बड़ा निवेश है। यदि सही मायनों में इस पर काम होता है तो उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने में महज कुछ साल लगेंगे। यदि इन्वेस्टर्स समिट सौ फीसदी सफल रही तो इसका श्रेय सीएम योगी को जाता है। सीएम योगी के सार्थक पहल की वजह से समिट में उद्योगपतियों का जमावड़ा लगा और वह निवेश के लिए तैयार हुए।
सीएम योगी सत्ता में आने के बाद से लगातार रोजगार पर जोर दे रहे हैं। सार्वजनिक मंच से वह कई बार ऐलान कर चुके हैं कि सरकार तीन साल में लाखों युवकों को रोजगार उपलब्ध करायेगी। सीएम योगी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से भी युवकों के स्किल डेवलपमेंट पर जोर दे रहे हैं। कुल मिलाकार उनका एक ही उद्देश्य है कि उत्तर प्रदेश बीमारू प्रदेश की श्रेणी से निकलकर उत्तम प्रदेश बने। सीएम योगी जानते हैं कि बिना उद्योग धंधों के प्रदेश का विकास नहीं हो सकता। उत्तर प्रदेश में निवेशक क्यों नहीं आते इससे भी वह भलीभांति परिचित है। शायद इसीलिए लगातार वह अपराधियों पर नकेल कसने के साथ-साथ लाल फीताशाही की मनमानी पर नकेल डालने में लगे हुए हैंं। कुछ महीने पहले तक कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्ष के निशाने पर सीएम योगी थे और आज अपराधियों की धरपकड़ और एनकाउंटर की वजह से। पिछले दिनों कई दुर्दांत अपराधियों का एनकाउंटर हुआ। इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में अपराधी सलाखों के पीछे पहुंचाये गए। विपक्ष दलों के विरोध के बावजूद योगी ने विधानसभा में कहा कि अपराधियों के खिलाफ मुहिम नहीं रूकेगी। प्रदेश में शांति व्यवस्था कायम करना सरकार की पहली प्राथमिकता है। दरअसल, सीएम योगी जानते हैं कि अपराधिक गतिविधियों की वजह से अधिकांश उद्योगपति यूपी में नहीं आना चाहते। शायद इसीलिए वह सबसे पहले कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने पर जुटे हुए हैं। इसके अलावा दूसरा सबसे बड़ा कारण है 2019 में होने वाला लोकसभा चुनाव।
दरअसल सीएम योगी के कंधों पर बहुत जिम्मेदारी है। एक तरफ उत्तर प्रदेश को विकास के पथ पर ले जाने की जिम्मेदारी है तो दूसरी ओर लोकसभा चुनाव 2019 की जिम्मेदारी। 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को अपनी सीटें बचाने की बहुत बड़ी चुनौती है। इन सीटों को बचाने में योगी का कामकाज बहुत हद तक जिम्मेदार होगा। शायद इसीलिए इन्वेस्टर्स समिट में केन्द्र सरकार के अधिकांश मंत्री और खुद पीएम मोदी मौजूद रहे। पीएम ने भी समिट में उत्तर प्रदेश को बड़ा तोहफा डिफेंस कॉरिडोर का दिया। बीस हजार करोड़ की डिफेेंस कॉरिडोर की परियोजना बुंदेलखंड में शुरू होगी जिसका कामकाज अगले महीने शुरू भी हो जायेगा। जाहिर है यह सब उपलब्धियां लोकसभा चुनाव में गिनाने में मददगार साबित होंगी।

2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को अपनी सीटें बचाने की बहुत बड़ी चुनौती है। इन सीटों को बचाने में योगी का कामकाज बहुत हद तक जिम्मेदार होगा। शायद इसीलिए इन्वेस्टर्स समिट में केन्द्र सरकार के अधिकांश मंत्री और खुद पीएम मोदी मौजूद रहे। पीएम ने भी समिट में उत्तर प्रदेश को बड़ा तोहफा डिफेंस कॉरिडोर का दिया। बीस हजार करोड़ की डिफेेंस कॉरिडोर की परियोजना बुंदेलखंड में शुरू होगी जिसका कामकाज अगले महीने शुरू भी हो जायेगा। जाहिर है यह सब उपलब्धियां लोकसभा चुनाव में गिनाने में मददगार साबित होंगी।

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